हापुड़ में टीवी पत्रकार चंदन सिंह के साथ कोतवाल राजेंद्र कुमार यादव द्वारा की गई मारपीट के विरोध में चल रहा धरना पांचवें दिन खतम हो गया. हालांकि इसमें पत्रकारों की मांग नहीं मानी गई. धरना स्थल पर एसडीएम जयशंकर मिश्र और अपर पुलिस अधीक्षक सुधीर कुमार सिंह ने पहुंचकर पत्रकारों को समझाया बुझाया तथा आगे ऐसी घटना ना होने देने का आश्वासन दिया, जिसके बाद पत्रकारों ने अपना धरना समाप्त किया. हालांकि कोतवाल के खिलाफ कार्रवाई किए जाने की मांग पूरी नहीं हुई.
यूपी में सपा सरकार आने के बाद पत्रकारों पर उत्पीड़नात्मक रवैया लगातार बढ़ा है. रायबरेली, सुल्तानपुर, देवरिया समेत कई जिलों में पत्रकारों के साथ अभद्रता हुई है. हापुड़ इस कड़ी में नया नाम है. इन जिलों में भी आरोपी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं हुई. रायबरेली में तो असंवेदनशीलता की हद हो गई. वैसे तय है कि पत्रकारों के उत्पीड़न की कीमत सपा को लोकसभा चुनावों में चुकाना पड़ेगा. तमाम जिले के पत्रकारों में सपा सरकार में पुलिस की बढ़ी गुंडई को लेकर नाराजगी है.

चंदन को भी कोतवाल के क्रोध की कीमत इस लिए चुकानी पड़ी कि उन्होंने छापे की खबर का विजुअल बना लिया था, जिससे पुलिस को खेल खेलने में दिक्कत हो गई. बताया जा रहा है कि कोतवाल की शासन में अच्छी पकड़ होने के चलते पत्रकारों की आवाज नक्कारखाने की तूती बनकर रह गई. धरना देने वाले पत्रकारों में जनार्दन सैनी, सुनील गिरी, चंदन सिंह, हरीश शर्मा, शक्ति ठाकुर, संजय त्यागी, सोनू त्यागी, विशेष शर्मा, अमित अग्रवाल, प्रवीण शर्मा, मनीष कुमार, यतेंद्र भारद्वाज, देवेंद्र शर्मा, राम किशोर, अनिल कवेरा, मोहम्मद ताहिर, नदीम खान समेत कई पत्रकार शामिल रहे.






