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सुकमा में कांग्रेसी नेताओं पर नक्सली हमला या राजनीतिक साजिश?

रायपुर : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमले के पीछे क्या कोई राजनीतिक साजिश है? यह सवाल कांग्रेसियों के साथ-साथ अब आम जनता की जुबान पर रह-रह कर आ रहा है। आलम यह है कि अब तो प्रदेश के एकमात्र केंद्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत और नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे को भी यही संदेह है, इन नेताओं ने घटना को लेकर कुछ बड़े सवाल भी उठाए हैं।

रायपुर : छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा के काफिले पर नक्सली हमले के पीछे क्या कोई राजनीतिक साजिश है? यह सवाल कांग्रेसियों के साथ-साथ अब आम जनता की जुबान पर रह-रह कर आ रहा है। आलम यह है कि अब तो प्रदेश के एकमात्र केंद्रीय मंत्री डॉ. चरणदास महंत और नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे को भी यही संदेह है, इन नेताओं ने घटना को लेकर कुछ बड़े सवाल भी उठाए हैं।

सुकमा के ताजा नक्सली हमले में कांग्रेस को बहुत कुछ खोना पड़ा है। प्रदेश अध्यक्ष नंदकुमार पटेल, पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा, पूर्व विधायक उदय मुदलियार सहित कई कार्यकर्ताओं की असामयिक मौत ने कांग्रेसियों को दहला दिया है। पार्टी के साथ-साथ मृतकों के परिवार का बुरा हाल है।

कांग्रेस के नेताओं पर नक्सलियों का यह हमला ऐसे वक्त हुआ है, जब कांग्रेस विधानसभा चुनाव की तैयारी में पूरी ताकत से जुट गई थी। चुनाव को मुश्किल से छह माह ही बचे हैं और इतने कम समय में कांग्रेस के लिए पूरे दमखम से चुनाव मैदान में उतरना आसान नहीं होगा। आज से दो साल पहले तक कांग्रेस की प्रदेश में जो हालत थी, वो भी किसी से छिपी नहीं है। प्रदेश कांग्रेस की कमान संभालते ही नंदकुमार पटेल ने पार्टी में नई जान फूंक दी। कार्यकर्ताओं में जोश और उत्साह का नया संचार हो गया।

प्रदेश में बस्तर से सरगुजा और सराईपाली से राजनांदगांव के अंतिम छोर तक वे लगातार दौरे, बैठकें और कार्यक्रम कर रहे थे। उनकी मेहनत देखकर कांग्रेसियों में भी उत्साह जाग उठा था। पटेल पार्टी के सारे गुटों को साथ लेकर चलने में भी काफी हद तक कामयाब हो रहे थे। प्रदेश में कांग्रेस नेतृत्व का इस तरह से सफाया होने कांग्रेसजन सदमे और दहशत में हैं। अब कांग्रेसियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती है कि अब कोई नेता दोबारा नक्सली इलाकों में यात्रा का साहस शायद ही जुटा पाएंगे।

पूर्व नेता प्रतिपक्ष महेंद्र कर्मा अपनी जान की परवाह किए बगैर कुछ दिनों से बस्तर में दौरे कर रहे थे। उनकी इस सक्रियता से कांग्रेस को बड़ा लाभ मिलता दिख रहा था। उदय मुदलियार की पहचान भी तेज-तर्रार नेता की रही है। उनकी इसी छवि को ध्यान में रखते हुए नंदकुमार पटेल ने अपनी टीम में उन्हें कार्यकारिणी सदस्य बनाया था और बस्तर लोकसभा का प्रभारी भी। उधर, बस्तर में पार्टी की रणनीति को उदय मुदलियार अमलीजामा पहना रहे थे।

नक्सली हमले में कई कार्यकर्ताओं को जान गंवानी पड़ी है। वहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल की हालत गंभीर बनी हुई है। कांग्रेस के लोग पूछ रहे हैं कि क्या यह वाकई केवल नक्सली हमला था या इसके पीछे कोई राजनीतिक साजिश थी? सवाल पूछने की वजह भी स्पष्ट है, आखिर कांग्रेस को विधानसभा में बहुमत मिलता तो नंदकुमार पटेल का कद बढ़ता। वे मुख्यमंत्री पद के प्रबल दावेदार भी होते। कयास और भी बहुत तरह के लगाए जा रहे हैं।

इस बीच, केंद्र सरकार ने मामले में राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट तलब की है। राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की टीम जांच के लिए बस्तर पहुंच गई है, जांच के बाद ही वस्तुस्थिति सामने आ पाएगी।

हर पहलुओं की जांच जरूरी : छत्तीसगढ़ के नेता प्रतिपक्ष रवींद्र चौबे का साफ तौर पर कहना है कि नक्सली हमले के पीछे राजनीतिक साजिश की पूरी आशंका है। घटना की सच्चाई तभी सामने आ सकती है, जब तीन मामलों की एक साथ उच्चस्तरीय जांच हो। चौबे के मुताबिक, दंतेवाड़ा जेल ब्रेक, सुकमा के तत्कालीन कलेक्टर अलेक्स जॉन पाल का नक्सलियों द्वारा अपहरण, फिर रिहाई और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा पर हुए हमले की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।

चौबे ने कहा कि बस्तर में नेताओं पर पहले भी नक्सली हमले होते रहे हैं, लेकिन इतनी बड़ी वारदात पहली बार हुई है। प्रदेश में अराजकता की स्थिति है। बस्तर में सामानांतर सरकार चल रही है। चौबे ने पूछा कि आखिर इस नक्सली हमले का जिम्मेदार कौन है? नेता प्रतिपक्ष का बयान भविष्य में क्या रंग लाता है, इस पर सबकी नजरें लगी हैं।

मुख्यमंत्री को इस्तीफा देना चाहिए : महंत

छत्तीसगढ़ के एकमात्र कांग्रेस सांसद और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री डॉ. चरणदास महंत को भी कांग्रेस नेताओं पर हमले में राजनीतिक साजिश नजर आती है। उनका कहना है कि सत्ताधारियों की विकास यात्रा पर हमला क्यों नहीं होता? विकास यात्रा की सुरक्षा में 10-10 हजार सुरक्षा जवान तैनात किए जाते हैं और कांग्रेस की परिवर्तन यात्रा में एक हजार जवान भी नहीं होते।

महंत ने कहा कि प्रदेश में राष्ट्रपति शासन तो रविवार रात को ही लग जाना था, इस घटना के बाद मुख्यमंत्री को इस्तीफा दे देना चाहिए।

नंदकुमार पटेल के परिवार को भी नक्सली हत्या के पीछे राजनीतिक साजिश होने का संदेह है। पारिवारिक सूत्रों के मुताबिक, इस संबंध में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से शिकायत किए जाने की पूरी संभावना है। बहरहाल, सोमवार को कांग्रेस के दिग्गज नेता नंदकुमार पटेल, महेंद्र कर्मा, उदय मुदलियार सहित अन्य कार्यकर्ताओं के पार्थिव शरीर पंचतत्व में विलीन हो गए। (एनडीटीवी)

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