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पेड न्‍यूज : दैनिक भास्कर और पंजाब केसरी ने पत्रकारों के हाथ में थमाया कटोरा!

: रिपोर्टर तो रिपोर्टर संपादक भी भीख मांगने उतरे, रात में होती है सेटिंग : हरियाणा में नगर निगम चुनाव क्या आए अखबारों की पौं बारह हो गई है। गंदा है पर धंधा है, धंधा करने के लिए टारगेट फिक्स हो चुके हैं। अभी तक ईमानदारी का चोला ओढ़ कर पत्रकारिता की दुहाई देने वाला दैनिक भास्कर भी अब पंजाब केसरी के पदचिन्हों पर चलने लगा है। पेड न्यूज पर चुनाव आयोग के डंडे ने तो पेड न्यूज तो रोक दी और नहीं भी रोकी। इस डंडे से भी बच जाएं और धंधा भी हो जाए।

: रिपोर्टर तो रिपोर्टर संपादक भी भीख मांगने उतरे, रात में होती है सेटिंग : हरियाणा में नगर निगम चुनाव क्या आए अखबारों की पौं बारह हो गई है। गंदा है पर धंधा है, धंधा करने के लिए टारगेट फिक्स हो चुके हैं। अभी तक ईमानदारी का चोला ओढ़ कर पत्रकारिता की दुहाई देने वाला दैनिक भास्कर भी अब पंजाब केसरी के पदचिन्हों पर चलने लगा है। पेड न्यूज पर चुनाव आयोग के डंडे ने तो पेड न्यूज तो रोक दी और नहीं भी रोकी। इस डंडे से भी बच जाएं और धंधा भी हो जाए।

इसके लिए संपादकों ने एक ऐसा तरीका निकाला कि नैतिकता चली गई भाड़ में। प्रत्याशियों की खबरें अब न्यूज के रूप में छप रही हैं न तो उन पर विज्ञापन लिखा है और न ही वे एड की फार्मेट में हैं। पॉलीटिकल बीट देख रहे पत्रकार सीधे संपादक के कांटेक्ट में हैं और संपादक मालिकों के कांटेक्ट में। दिन के समय पत्रकार खबरें छोड़ कर प्रत्याशियों की दरों पर जाकर फिक्सिंग करने में जुटे हैं। हजारों की नहीं लाखों में बात होती है। रात को संपादकों का खेल शुरू होता है। प्रत्याशियों के पीए और खासमखास रात के समय संपादकों के केबिन में जोड़ तोड़ करते देखे जा सकते हैं। दैनिक भास्कर के अम्बाला के संपादक ने हदें इस कदर लांघ दी हैं कि हर रिपोर्टर और फोटोग्राफर, स्ट्रिंगरों को कड़ी हिदायत दे रखी है कि पार्टी को उससे सीधे मिलवाया जाए। नहीं मिलवाओगे तो खबर नहीं छपेगी।

ये महाशय दिन में खद्दरधारियों की चौखट पर नजर आते हैं और शाम होते ही केबिन में सेटिंग करते हैं। बताते हैं कि इन भाई साहब ने मालिकों को टारगेट बता दिया है कि 50 लाख कमा कर देंगे। इन श्रीमान ने प्रत्याशियों के लिए अपने तक सीधी पहुंच का एक ओर तरीका निकाला है ये महाशय एक कॉलम लिख रहे हैं जिसमें इनका नाम जाता है। बाकी  चुनाव की किसी भी खबर में किसी अन्य रिपोर्टर का नाम देना ये अपने धंधे में अडंगा समझते हैं। अब तक लड्डू बांटने, तौलने, भाषण बाजी से गुरेज कर अपनी पाक साफ रहने की दुहाई देने वाले भास्कर के अम्बाला संपादक अब लड्डू की खबरें स्वयं लिखवाते हैं। कुछ पत्रकारों ने इन खबरों को चुनाव आयोग के ध्यानार्थ लाया है। आप भी देखिए पंजाब केसरी और दैनिक भास्कर की न्यूज की आड़ में पेड न्यूज की तिकड़म।

एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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