क्रिकेटर महेंद्र सिंह धोनी के एक प्रशंसक को अपने दीवानगी की कीमत जेल जाकर उस वक्त चुकानी पड़ी जब घर लौटते वक्त उसके पास पैसे कम पड़ गए। ट्रेन के टीटीई आजाद ने युवक पर आरोप लगाया है कि उक्त युवक खुद को रेलवे के सतर्कता विभाग (विजिलेंस) का अधिकारी बता कर वसूली कर रहा था जबकि युवक सारे आरोपों को निराधार बता रहा है। आरोपी युवक धर्मेन्द्र ने बताया कि वह दिल्ली का रहने वाला है और एमबीए की पढ़ाई भी कर रहा है, साथ ही वह क्रिकेट स्टार महेन्द्र सिंह धोनी का प्रशंसक भी है। और इसी जूनून में वह धोनी के घर को देखने रांची जा पहुंचा।
युवक ने घर तो देख लिया लेकिन लौटते वक्त उसके पास पैसे कम पड़ और वह सामान्य टिकट लेकर गरीब रथ एक्सप्रेस के एसी कोच में चढ़ गया। टिकट बनवाने को लेकर टीटीई से अनबन हुई और मुग़लसराय पहुंचने पर उसे यह कह कर जीआरपी के हवाले कर दिया कि वो खुद को विजिलेंस का अधिकारी बता रहा था। फिलहाल जीआरपी ने मामला दर्ज कर छानबीन शुरू कर दिया है। गौरतलब है की ट्रेन में टीटीई द्वारा यात्रियों से दुर्व्यवहार की घटनाएं आम हो गयी हैं। कभी यात्रियों को डरा धमका कर पैसा छीनना तो कभी उनके साथ मारपीट कर प्रताड़ित करना। ऐसा नहीं है कि रेल के अधिकारी यह सब कुछ नहीं जानते हैं, क्योंकि यात्रियों की शिकायत पर मार पीट कर पैसा छीनने के मामले में अभी हाल ही में मुग़लसराय के कुछ टीटी को जीआरपी ने अरेस्ट किया था।
सबसे रोचक मामला अभी हाल में सामने आया था जिसमें एक सीनियर टीसी को पूर्वोत्तर संपर्क क्रान्ति एक्स की जनरल बोगी में वसूली का विरोध कर रहे यात्रियों ने धुनाई कर दी थी, जिसमें टीटीई लामबंद होकर काम काज ठप कर दिए थे और उक्त ट्रेन को एस्कार्ट कर रहे आरपीऍफ़ के खिलाफ मारपीट का मामला दर्ज कराया था। बावजूद इसके महकमा इनके व्यवहार को सुधारने की दिशा में बिलकुल संवेदनहीन है। रेलवे का दावा है कि यात्री सम्मानित अतिथि हैं …अब सवाल यह उठता है कि सम्मानित अतिथि के साथ इस तरह का व्यवहार क्या रेलवे को शोभा देता है।
मुगलसराय से महेंद्र प्रजापति की रिपोर्ट.





