मीडिया में आई अवैध खदान आबंटन की खबरों को लेकर प्रदेश की राजनीति गरमा गई है. छत्तीसगढ़ में ईटीवी और पत्रिका पर लगातार शिकंजा कसने की कवायद चल रही है. तू डाल-डाल तो मैं पांत-पांत वाली कहावत यहां चरितार्थ हो रही है. जहां एक तरफ ईटीवी रायपुर के ब्यूरो चीफ शैलेष पांडे की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने छत्तीसगढ़/मध्यप्रदेश में ईटीवी का प्रसारण तुरंत शुरू करने का आदेश दिया है तो वहीं पत्रिका और ईटीवी द्वारा छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह का नाम खनिज घोटाले में होने की खबर जोरशोर दिखाने को लेकर पेपर एवं चैनल के खिलाफ जुर्म दर्ज करा दिया गया है. बस्तर के अलग अलग थानों में अलग-अलग लोगों द्वारा 10 एफआईआर दर्ज कराए गए हैं.
अपने खिलाफ खबर दिखाए जाने से नाराज मुख्यमंत्री रमन सिंह ने ईटीवी और पत्रिका अखबार के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. ईटीवी का प्रसारण पूरे राज्य में बंद करा दिया गया तो पत्रिका अखबार के खिलाफ कई तरह की जांच शुरू करा दी गई. अब खबर आ रही है कि मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह के खिलाफ समाचार प्रसारित करने वाले चैनल ईटीवी और समाचार पत्र पत्रिका के प्रबंधन के खिलाफ बस्तर संभाग के अलग- अलग थानों में दस रिपोर्ट दर्ज कराई गई है. इसके अलावा इलाके के निवासियों ने बस्तर की स्थानीय अदालत में सिविल सूट के तहत मामला दर्ज कराकर मुआवजा भी मांगा है. चैनल और समाचार पत्र ने मध्यप्रदेश के सीधी जिले में मुख्यमंत्री डॉ. सिंह द्वारा अपने रिश्तेदारों को खनिज ठेका दिलाए जाने संबंधी खबर प्रसारित एवं प्रकाशित की थी..मुख्यमंत्री ने इस मामले गहरी आपत्ति जताते हुए दोनों समूहों के नौ लोगों को कानूनी नोटिस भी दिया है.
टीवी चैनल ईटीवी और दैनिक अखबार पत्रिका की खबरों के मुताबिक छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के खिलाफ खनिज घोटाले का यह मामला सबसे पहले मध्यप्रदेश विधानसभा के शीतकालीन सत्र में कांग्रेस विधायक और नेता प्रतिपक्ष अजय राहुल सिंह ने उठाया था. अजय राहुल सिंह का आरोप है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करते हुए अपने रिश्तेदारों को सीधी जिले की गोपाल बनास तहसील के अंधरी गड़ई इलाके में 920 हैक्टेयर जमीन पर सात खदानों का पट्टा दिलाया है. ईटीवी और पत्रिका के अनुसार अजय राहुल सिंह का आरोप है कि 9 दिसम्बर 2010 को जारी आदेश में मैसर्स नाड प्रा.लि. को सीधी के 2458 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर आयरन ओर, मैग्नीज ओर, टाइटेनियम, वेनेडियम एवं निकिल खनिजों की खोज के लिए 4 फरवरी 2009 से 3 फरवरी 2012 तक की अवधि के लिए रिकोनेसेंस परमिट स्वीकृत किया है. यह फर्म विकास सिंह चौहान के नाम से है, जो छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह के रिश्तेदार है.
इधर रमन सिंह का पूरे आरोपों का जवाब देते हुए कहना है कि मप्र के सीधी जिले में उनके ससुराल पक्ष के किसी भी रिश्तेदार को खदान आबंटित नहीं की गई है, जिस कथित कंपनी नाड या उसके मालिक का नाम लिया जा रहा है, उसमें मेरा या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य का कोई रिश्ता नहीं है..उनकी छवि धूमिल करने राजनीतिक षड़यंत्र रचा गया है, इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई करूंगा…रमन सिंह के मुताबिक मेरा या मेरे परिवार के किसी भी सदस्य का कोई रिश्ता नहीं है..इसलिए मैं इस सम्पूर्ण आरोप तथा समाचार का पुरजोर ढंग से खंडन करता हूं..इस खबर के साथ तीन वरिष्ठ नेताओं नंद कुमार पटेल, अजीत जोगी और अजय राहुल सिंह द्वारा लगाया गया व्यक्तिगत आरोप भी प्रकाशित एवं प्रसारित हुआ है..मेरा स्पष्ट मानना है कि व्यक्तिगत तौर पर मेरी छवि धूमिल करने के लिए मुझ पर यह तथ्यहीन आरोप लगाया गया है..इसलिए मेरी मांग है कि वे इस आरोप को या तो तथ्य सहित रखें, मेरे किस रिश्तेदार के बारे में वह कह रहे हैं, उसका नाम सामने लाएं, मैंने कैसी मदद पहुंचाई है, इसे साबित करें या आरोप वापस लें…सत्ता की राजनीति के लिए विगत 8 वर्षों से निरर्थक प्रयास करने और उसकी हताशा का यह मतलब नहीं होना चाहिए कि आप किसी का भी चरित्रहनन करें…चरित्र हत्या की गंदी राजनीति से सिर्फ मेरा व्यक्तिगत नुकसान नहीं होगा, बल्कि इससे राज्य का भी नाम खराब होगा..यह बात कम से कम इन वरिष्ठ राजनीतिज्ञों को तो सोचना चाहिए…मेरे 25 साल के सार्वजनिक, सामाजिक और राजनीतिक जीवन में कहीं कोई दाग नहीं है..पहले केन्द्रीय मंत्री और फिलहाल विगत 8 वर्षों से मुख्यमंत्री के रूप में मैंने जो काम किए हैं, वे सब जनता के सामने हैं..मेरे ससुराल का नाम लेकर एक खबर कुछ लोगों के माध्यम से मीडिया में उछाली जा रही है, वह सरासर झूठ, मनगढंत और घोर आपत्तिजनक है..इन खबरों से मैं बुरी तरह आहत हुआ हूं, इसलिए ऐसी खबरें उछालने वालों के खिलाफ मैंने कठोर कानूनी कार्रवाई का मन बनाया है..जिस गैर जिम्मेदाराना ढंग से कीचड़ उछालने के अंदाज में वरिष्ठ राजनेताओं ने बयानबाजी की है, वह दुखद है..किस राज्य की खदान, स्वीकृति देने वाली कौन सी सरकार, उसमें किसी तीसरे, चौथे व्यक्ति का नाम घसीटने से सिर्फ दुर्भावना ही प्रकट होती है..थोड़ा भी तार्किक ढंग से चिंतन किया जाए तो यह साफ दिख जाता है कि ऐसे आरोप तो किसी पर भी नहीं लगाए जा सकते है..
बहरहाल छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ.रमन सिंह की अपनी दलीलें है..रमन सिंह अपने खिलाफ खबर प्रसारित प्रकाशित किए जाने से ईटीवी चैनल और पत्रिका अखबार से नाराज हो गए और इन दोनों को सबक सिखाने का फैसला किया है..ईटीवी का प्रसारण बंद करा दिया तो पत्रिका अखबार के खिलाफ प्रदर्शन करवाए और जांच शुरू करा दी..अब इन संस्थानों पर बस्तर संभाग के अलग-अलग थानों में
एफआईआर दर्ज करवा दिए गए हैं..ऐसे में मीडिया के प्रति इस अलोकतांत्रिक रुख से प्रदेश की फिजां में काफी भूचाल सा आया हुआ है..
रायपुर से आरके गांधी की रिपोर्ट.





