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करोड़ों की जमीन आधी कीमत पर सौरव गांगुली को!

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मां माटी मानुष की सरकार की भूमि नीति की वजह से राज्य में औद्योगीकरण खटाई में है। पर राजारहाट जैसे बेशकीमती पाश इलाके में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान को राज्य सरकार आधी कीमत पर जमीन दे रही है। सौरभ गांगुली को राजारहाट में स्कूल खोलने के लिए 10 करोड़ 98 लाख कीमत की जमीन 55 पीसदी छूट के साथ दी जा रही है। एक मुश्‍त करीब छह करोड़ की छूट के लिए हालांकि राज्य सरकार ने शर्त यह लगायी है कि इस स्कूल में गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा इन बच्चों से कोई फीस नहीं लेनी है।

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और मां माटी मानुष की सरकार की भूमि नीति की वजह से राज्य में औद्योगीकरण खटाई में है। पर राजारहाट जैसे बेशकीमती पाश इलाके में भारतीय टीम के पूर्व कप्तान को राज्य सरकार आधी कीमत पर जमीन दे रही है। सौरभ गांगुली को राजारहाट में स्कूल खोलने के लिए 10 करोड़ 98 लाख कीमत की जमीन 55 पीसदी छूट के साथ दी जा रही है। एक मुश्‍त करीब छह करोड़ की छूट के लिए हालांकि राज्य सरकार ने शर्त यह लगायी है कि इस स्कूल में गरीब बच्चों के लिए 25 फीसदी सीटें सुरक्षित रहेंगी। इसके अलावा इन बच्चों से कोई फीस नहीं लेनी है।

अब सवाल है कि क्या राज्य सरकार दूसरे निजी शिक्षा संस्थानों के लिए भी यह नीति लागू करेगी? लेकिन सबसे खास बात तो यह है कि शिक्षा के अधिकार कानून के तहत पहले से यह प्रावधान लागू है और किसी भी शिक्षा संस्थान के लिए अनिवार्य शर्त है। फिर आधी कीमत पर सौरभ को जमीन देने के लिए इस शर्त का हवाला क्यों दे रही है राज्य सरकार? सौरभ गांगुली इस वक्त विदेश यात्रा पर हैं और इस सिलसिले में उनकी प्रतिक्रिया मालूम नहीं हो सकी है। मालूम हो कि पिछले 5 फरवरी को राज्य सरकार ने बिना टेंडर सौरभ गांगुली को राजारहाट में दो एकड़ यानी 120 कट्ठा जमीन देने का फैसला कर चुकी थी। अब यह जमीन आधी कीमत पर दे देने का फैसला भी हो गया।

वाममोर्चा सरकार ने साल्ट लेक के सीए ब्लाक में सौरभ गांगुली को स्कूल खोलने के लिए मुफ्त जमीन दी थी। तब सौरभ मुख्यमंत्री बुद्धदेव भट्टाचार्य और अशोक भट्टाचार्य के करीबी माने जाते थे। तब 63 कट्ठा जमीन की कीमत बतौर राज्य सरकार को मात्र 63 लाख रुपये दिये थे सौरभ ने। लेकिन इस सौदे के खिलाफ मुकदमा हुआ और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक ममता बनर्जी की सरकार ने 2011 में सत्ता में आने के बाद सौरभ से यह जमीन वापस ले ली। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्‍तान सौरव गांगुली ने जो जमीन स्‍कूल खोलने के लिए ली थी, उसके आवंटन पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा दी। कोर्ट ने गांगुली को निर्देश दिये कि वो यह जमीन पश्चिम बंगाल सरकार को वापस लौटा दें। इस आदेश में पश्चिम बंगाल सरकार द्वारा सौरव गांगुली को कम दाम पर दी गई जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया। कोर्ट का कहना है कि आवंटन के लिए हेरफेर किया गया है। साथ ही नियमों का उल्‍लंघन किया गया है। इस आवंटन पर एक मानवाधिकार संगठन ने पहले हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। वहां हारने के बाद सुप्रीम कोर्ट में यह मामला गया था।

समझा जाता है कि इसी के एवज में सौरभ को राजारहाट में आधी कीमत पर जमीन दी जा रही है। कुछ दिनों पहले राइटर्स में हाजिर होकर रियायती दाम पर राजारहाट में जमीन देने का आवेदन किया था सौरभ ने, जिसे फौरन मंजूर कर लिया गया! सिलीगुड़ी में भी माटीगाड़ा उत्तरायन से सटे हिमाचल विहार में पूर्व क्रिकेटर सौरभ गांगुली की ओर से एक इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की जाएगी। सिलीगुड़ी- जलपाईगुड़ी विकास प्राधिकरण (एसजेडीए) की ओर से मिली 2.3 एकड़ भूमि पर सौरभ गांगुली ने बहुत पहले ही स्कूल स्थापना की घोषणा थी लेकिन मौके पर कोई काम नहीं किया गया। इस बीच जमीन देखने एवं नए सिरे से प्लाट पर प्लान बनाने पहुंचे सौरभ! सौरभ ने कहा कि यहां नर्सरी से लेकर कक्षा 12 वीं तक आइसीएसई के अंर्तगत पढ़ाई के लिए विसन इंटरनेशनल स्कूल की स्थापना की जाएगी। उन्होंने कहा कि यहां पढ़ाई के साथ साथ स्पो‌र्ट्स के लिए भी अलग व्यवस्था होगी। यहां क्रिकेट ही नहीं, अन्य खेलों को भी विद्यार्थियों के बीच बढ़ावा दिया जाएगा। स्कूल बनने की संभावना के बारे में उन्होंने कहा कि प्रक्रिया शुरू कर दी गई है, फिलहाल कोई तय समय सीमा नहीं है। एक के बाद एक कार्य पूरा किया जा रहा है।

दीदी सादगी का अवतार हैं, इसमें शायद ही दो राय हो। लेकिन ग्लैमर के पीछे वे किसी भी फर्राटा दौड़ाक को पछाड़ देंगी। बाजार का प्रबल विरोध करने के वावजूद बाजार के देव देवियों को अपने अगल बगल रखना उनकी आदत हो गयी है। कोषागार का बहुत सारा पैसा इन दिग्गजों को पुरस्कार और सम्मान देने में खर्च होता है। परिवर्तनपंथी तमाम बुद्धिजीवियों को उन्होंने न्यारा वारा कर दिया है। अभी पिछले दिनों दिग्गज फिल्म अदाकारा सुचित्रा सेन को पश्चिम बंगाल के सर्वोच्च सम्मान बंग विभूषण से सम्मानित किया गया। हालांकि वह पुरस्कार लेने के लिए मंच पर मौजूद नहीं थीं। वह लंबे समय से आम लोगों की नजरों से दूर हैं। 81 साल की अदाकारा की ओर से उनकी बेटी मुनमुन सेन और नातिन राइमा सेन ने इस प्रतिष्ठित पुरस्कार को एक समारोह में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से ग्रहण किया। प्रदेश सरकार ने पिछले साल अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों को सम्मानित करने के लिए इस पुरस्कार की स्थापना की थी, जिसमें एक स्मृति चिन्ह और 2 लाख रुपये की पुरस्कार राशि दी जाती है। भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व कप्तान सौरव गांगुली, ओलंपियन पी.के बनर्जी एवं चुनी गोस्वामी, अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती डांसर थंकामणि कुट्टी और उद्योगपति बी.के बिड़ला समेत 24 हस्तियों को 20 मई को भी बंग विभूषण से सम्मानित किया गया। इसी तरह दीदी ने सुपरस्टार शाहरुख खान को बंगाल के ब्रांड एंबेसेडर बनाया हुआ है।  

सौरभ गांगुली दक्षिण कोलकाता में बेहला के निवासी हैं, जो दीदी के चुनाव क्षेत्र के अंतर्गत है। फिल्म अभिनेत्री सुचित्रा सेन से आम बंगालियों का जो रोमांटिक लगाव है, उसी तरह की दीवानगी सौरभ गांगुली को लेकर भी है। लेकिन सौरभ हमेशा वाम मोर्चा के नजदीक रहे हैं। उन्हें बंगाल क्रिकेट एसोसिएसन का अध्यक्ष बनाये जाने की भी तैयारी है। जगमोहन डालमिया की वे पहली पसंद बताये जाते हैं। बंगविभूषण खिताब से नवाजने के बाद दादा को अपने पाले में लाने के लिए दांव लगाया है दीदी ने।

एक्सकैलिबर स्टीवेंस विश्वास​ की रिपोर्ट.

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