: कई अन्य बदलाव और उठापटक : बंगलौर से खबर है कि राजस्थान पत्रिका के संपादकीय विभाग में छह महीने के अंदर फिर से बड़ा बदलाव किया गया है. इस बार बदलाव के तहत छह महीने पहले डेस्क प्रभारी के पद से हटाए गए वरिष्ठ उपसंपादक जिवेंद्र झा को फिर से डेस्क प्रभारी बना दिया गया है जबकि मौजूदा डेस्क प्रभारी का कामकाज देख रहे वरिष्ठ उपसंपादक नूर रहमान को रिपोर्टिंग में भेज दिया गया है. नूर कोर्ट बीट भी देखेंगे जो रिपोर्टिंग में आने के बाद झा देख रहे थे.
झा के कुछ बीट अन्य रिपोर्टरों में बांट दिए गए हैं. डेस्क के बाकी तीन लोगों-संतोष पांडे, घनश्याम राय व आशुतोष गुप्ता गर्ग के कामकाज में कोई बदलाव नहीं हुआ है. पांडे काफी समय से पत्रिका में हैं और पिछले कुछ सालों से डेस्क पर ही काम कर रहे हैं जबकि राय व गर्ग इसी साल पत्रिका से जुड़े हैं. नूर व झा काफी समय से बेंगलूरु पत्रिका से जुड़े हैं. एक दशक से अधिक समय से पत्रिका में कार्यरत नूर बंगलौर में रिपोर्टिंग करने के अलावा हुबली संस्करण के लांच होने के बाद करीब ३ साल तक वहां का कामकाज देखते रहे वे पिछले साल वापस बंगलौर आए थे और कुछ दिनों तक अलग-अलग बीटों की रिपोर्टिंग करने के बाद अप्रैल में नंदकिशोर तिवारी के नाटकीय अंदाज में स्थानीय संपादकीय प्रभारी पद से इस्तीफा देने के बाद हुए बदलाव में उन्हें डेस्क प्रभारी की नई जिम्मेदारी दी गई थी.
मूलतः यूपी के रहने वाले नूर सहारा समूह के राष्ट्रीय सहारा अखबार के शुरुआती दिनों में उससे फोटोग्राफर के तौर पर जुड़े हुए थे. गौरतलब है कि बंगलौर पत्रिका में प्रबंधन का जिम्मा संभाल रहे पी जोस के अहमदाबाद तबादले के बाद तिवारी को प्रबंधक का भी कार्यभार दे दिया गया था लेकिन डेढ महीने बाद ही उनके ऊपर अहमदाबाद के संपादकीय प्रभारी व शाखा प्रभारी राजेंद्र सिंह को बैठा दिया गया. पत्रिका के काफी वफादार माने जाने वाले सिंह के आने के बाद प्रिंट लाइन से तिवारी का नाम हट गया और सिंह के रोजमर्रा के कामकाज में बढ़ते दखल के बाद तिवारी ने अप्रैल में इस्तीफा दे दिया.
तिवारी की विदाई के साथ ही संपादकीय विभाग में विदाई व बदलाव का दौर शुरू हो गया. सबसे पहले तिवारी के विश्वस्त रहे अमित श्रीवास्तव का चेन्नई तबादला हुआ फिर उसके बाद डेस्क प्रभारी रहे झा को डेस्क से हटाकर रिपोर्टिंग में भेज दिया गया. पांच साल से पत्रिका से जुड़े झा पहले भी बंगलौर में रिपोर्टिंग टीम के ही हिस्सा थे और तिवारी के कार्यकाल में हुए बदलाव अभियान के दौर में ही रिपोर्टिंग से डेस्क पर लाए गए थे.
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