हिंदुस्तान में इंक्रीमेंट और प्रमोशन का सिलसिला जारी है. उत्तराखंड से खबर आ रही है कि यहां इंक्रीमेंट को लेकर लोगों में खुशी है वहीं प्रमोशन को लेकर गम का माहौल बना हुआ है. हालांकि दिल्ली के सूत्रों के हवाले से जो खबर मिल रही है, उससे जाहिर है कि हिंदुस्तान मैनेजमेंट ने इस बार पूरे समूह में प्रमोशन देने में कंजूसी बरती है. दिल्ली में 125 लोगों की टीम में मात्र तीन लोगों को प्रमोट किया गया है. कानपुर में भी लगभग 54 लोगों की टीम में तीन, लखनऊ में भी तीन एवं उत्तराखंड में भी तीन लोगों को प्रमोट किया गया है.
उत्तराखंड में तीन लोगों को प्रमोशन मिला है. जबकि कम से कम आधा दर्जन लोग अपने को प्रमोशन की लाइन में मान रहे थे. सूत्र बता रहे हैं कि देहरादून के संपादक गिरीश गुरनानी तमाम कोशिशों के बाद तीन से ज्यादा लोगों का प्रमोशन नहीं करा पाए क्योंकि कंपनी ने इस बार कम लोगों को प्रमोट करने की पॉलिसी अपना रखा है. हालांकि इसके पीछे कारण यह भी बताया जा रहा है कि उत्तराखंड में चीफ सब लेबल स्तर के कम से कम एक दर्जन स्टाफ हैं, जो मैनेजमेंट के हिसाब से ज्यादा हैं. इसके अलावा आधा दर्जन की संख्या में स्पेशल करेस्पांडेंट, डीएनई और एनई मिलाकर हैं. बताया जा रहा है कि प्रबंधन ने संपादक के चाहने के बावजूद चीफ सब एडिटर के लेबल में एक भी प्रमोशन नहीं किया है.
वैसे भी उत्तराखंड में जिन तीन लोगों को प्रमोट किया गया है वे सब एडिटर लेबल के हैं. देहरादून में पवन कुमार तथा हल्द्वानी में बी भट्ट एवं हरीश बिष्ट को प्रमोट करके सीनियर सब एडिटर बनाया गया है. सूत्रों ने बताया कि खुद को प्रमोशन की कतार में मानने वाले लोग प्रमोशन लिस्ट देखकर असंतुष्ट थे, लेकिन स्थानीय संपादक गिरीश गुरनानी ने अपने नेतृत्व क्षमता का परिचय देते हुए इन लोगों को मना लिया है. उत्तराखंड के लगभग पांच दर्जन कर्मचारियों के प्रमोशन का गम इंक्रीमेंट ने दूर कर दिया है. खबर है कि पिछली बार इंक्रीमेंट से भी असंतुष्ट लोग इस बार के इंक्रीमेंट से संतुष्ट और खुश हैं. औसतन दस फीसदी तक इंक्रीमेंट मिला है.
इंक्रीमेंट ने कर्मचारियों का विश्वास भी संपादक के ऊपर बढ़ा दिया है. अन्य संपादकों की तर्ज पर गिरीश गुरनानी अमर उजाला से अपनी टीम लेकर नहीं आए बल्कि उन्होंने हिंदुस्तान के ही पुराने लोगों पर विश्वास करते हुए उन्हें काम करने का मौका दिया. इसी का परिणाम है कि कर्मचारी अब संपादक की बात मानने और समझने लगे हैं. सूत्रों ने बताया कि गिरीश गुरनानी ने पिछले कुछ समय में आधा दर्जन से अधिक स्ट्रिंगरों को कनफर्म किया है, इसके चलते भी संस्थान से जुड़े पत्रकार मेहनत से काम कर रहे हैं. उन्हें उम्मीद है कि देर सबेर काम देखकर उन्हें भी कनफर्म किया जा सकता है. स्ट्रिंगरों एवं रिटेनरों की मेहनत अखबार में भी दिखने लगी है. हालांकि किन स्ट्रिंगरों को कनफर्म किया गया है उनके नाम की जानकारी नहीं मिल पाई है.






