: दारोगा की शह पर रची गई पत्रकारों को फर्जी फंसाने की साजिश : पुलिस ने क्रास एफआईआर दर्ज किया : अखिलेश सरकार की पुलिस अब पत्रकारों को आतंकी बनाने पर तुल गई है. झांसी से खबर है कि आजतक के पत्रकार अमित श्रीवास्तव को फर्जी फंसाए जाने के विरोध में धरना दे रहे पत्रकारों पर जानलेवा हमला किया गया. पुलिस ने आरोपियों पर सीधी कार्रवाई करने की बजाय क्रास एफआईआर दर्ज कर लिया है. खबर है कि यह सब काम पुलिस की शह पर किया जा रहा है. पुलिस ने जनसंदेश टाइम्स एवं आईबीएन7 से जुड़े शकील हाशमी को भी गलत तरीके से डीटेन करके रखा हुआ है. पत्रकारों को उनके बारे में कोई जानकारी नहीं है.
खबर के मुताबिक ईलाइट चौराहे पर इलेक्ट्रॉनिक मीडिया क्लब के अध्यक्ष शकील अली हाशमी, लक्ष्मी नारायण शर्मा, संतोष पाठक, सत्तार खान, जावेद असलम, एस एस झा, मो. इमरान, तारिक इकबाल शीबू, नीरज जैन, अजय झां, संजय सिन्हा, प्रमेन्द्र कुमार वर्मा, संजय सिन्हा, विनोद सुडेले, संजय गुप्ता, नंदकिशोर नंदू, परवेज आलम, विकास शर्मा, मनीष श्रीवास्तव, हनीफ खान, सुरेन्द्र कुमार, विनोद गौतम, शेख शमीम, उमेश शर्मा पत्रकार धरना और अनशन कर रहे थे.
इसी बीच पवन झा और नासिर नाम के दो व्यक्ति अनशन स्थल पर पहुंचते हैं, जो साप्ताहिक अखबार में पत्रकारिता का चोला पहले हुए हैं, बिना बात के हवाई फायर झोंक देते हैं. रिवाल्वर से दो फायर होते ही वहां खलबली मच जाती है. इसके बाद जब ये पत्रकारों पर सीधा निशाना साधने की तैयारी करते हैं तो मौके पर मौजूद स्थानीय लोगों ने दोनों को पकड़ लिया. इस के बाद पिटाई कर दी. पत्रकार इन दोनों को खुद पकड़कर पुलिस के पास ले गए तथा पिस्टल तथा गोलियां बरामद कराईं. वैसे आरोप है कि ये दोनों पुलिस की शह पर ही पत्रकारों का अनशन बिगाड़ने पहुंचे थे.
आरोपियों के पास से बरामद रिवाल्वर भी किसी दूसरे का बताया जा रहा है. इतना होने के बाद भी पुलिस सीधी एफआईआर दर्ज करने की बजाय क्रास एफआईआर दर्ज लेती है. बताया जाता है कि इसके बाद पुलिस रात को फोर्स के साथ अनशन स्थल पर पहुंचती है और इलेक्ट्रानिक मीडिया क्लब के अध्यक्ष शकील अली हाशमी को बात करने के बहाने बुलाकर जबरिया जीप में लादकर ले जाती है. पत्रकारों को अब तक पता नहीं है कि शकील हाशमी को पुलिस ने कहां रखा है. हालांकि बताया जा रहा है कि शकील को पुलिस अरेस्ट करके कोर्ट में पेश करने वाली है. झांसी के पत्रकारों में जबर्दस्त नाराजगी है.
बताया जा रहा है कि इस पूरे घटनाक्रम के पीछे मौजूद दारोगा जेपी यादव प्रदेश के कैबिनेट मंत्री शिवपाल यादव का रिश्तेदार है, लिहाजा पुलिस के बड़े अधिकारी भी उसके खिलाफ कार्रवाई करने से डर रहे हैं. इसी का परिणाम है कि झांसी का एक कोतवाली इंस्पेक्टर नहीं बल्कि दारोगा चला रहा है. पिछले एक साल के अंदर प्रदेश में जिस तरीके से पत्रकारों का उत्पीड़न किया जा रहा है उससे आपात काल जैसी स्थिति पैदा होती दिख रही है. पुलिस अपने कारस्तानी के खिलाफ उठने वाली हर आवाज दबाने को तत्पर है. निरंकुशता की हद तक जा रही पुलिस की कीमत सपा को लोकसभा चुनावों में जरूर भुगतना पड़ेगा.
इस पूरे मामले के बारे में जानने के लिए नीचे दिए गए लिंकों पर क्लिक करें –
अमित को फंसाए जाने के विरोध में अनशन पर बैठे झांसी के पत्रकार
रेप के प्रयास के आरोप में आजतक का पत्रकार अरेस्ट





