लखनऊ। आसमान में धुंध और मौसम में भारी ठिठुरन, बावजूद इसके रविवार को रमाबाई अम्बेडकर मैदान में लाखों की तादाद में जुटे बसपाइयों का राजनीतिक तापमान चढ़ा था। बसपा प्रमुख व मुख्यमंत्री मायावती की विरोधियों को ललकार और पांचवी बार सरकार बनाने के आह्वान ने बसपाइयों में और जोश भर दिया। मायावती ने ‘मुस्लिम-क्षत्रिय-वैश्य’ रैली में भारी भीड़ जुटाकर विरोधियों के साथ ही अपने समर्थकों को यह जताने की कोशिश की कि चुनाव पूर्व मीडिया में आ रहे ‘ओपिनियन पोल’ (सर्वे) का बसपा और उसके जनाधार पर कोई फर्क नहीं पड़ता।
मायावती ने बसपाइयों को विपक्ष व मीडिया से सावधान रहने की हिदायत देते हुए कहा कि चुनाव के दौरान बसपा व उनके (मायावती और उनके मंत्रियों, पदाधिकारियों) खिलाफ साजिश हो सकती हैं। उन्होंने कहा भी कि मीडिया ‘ओपिनियन पोल’ (सर्वे) के जरिये साजिश की शुरुआत हो चुकी है, मगर ऐसे सर्वे से बसपा पर फर्क नहीं पड़ता, क्योंकि उसकी ताकत तो सबके सामने मैदान में बैठी है।
अपने परिजनों के साथ ही पार्टी नेता सतीश चन्द्र मिश्र के परिजनों पर घोटाले और फर्जी कम्पनी बनाने के आरोपों पर मायावती ने रविवार को पहली बार मुंह खोला। उन्होंने इस मुद्दे पर भाजपा व उसके नेताओं को चेताते हुए कहा ‘जिनके घर शीशे के होते हैं वे दूसरों के घरों पर पत्थर नहीं फेंकते’। उन्होंने कहा कि भाजपा नेता यदि व्यक्तिगत आरोप बंद नहीं करते तो बसपा भी उसी भाषा में जवाब देगी, तब भाजपा नेताओं के लिए मुंह दिखाना मुश्किल हो जाएगा। ऐसा करके मायावती ने अपने समर्थकों को यह संकेत देने की भी कोशिश की है कि चुनाव बाद भाजपा से ‘समझौते’ की चर्चा में कतई न उलझें। साभार : राष्ट्रीय सहारा





