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जो काम संजय गुप्ता, महेंद्र मोहन समेत पूरा जागरण नहीं कर पाया, वह नदीम ने एक दिन में करके दिखा दिया!

लखनऊ :  महेंद्र मोहन से लेकर संजय गुप्‍ता तक कई-कई दिन लखनऊ में पड़े रहे लेकिन सीएम अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। जागरण के लोग सीएम के इंटरव्‍यू के लिए एक साल से कोशिश करते रहे लेकिन प्रेस कांफ्रेंस को छोड़कर सीएम ने उन लोगों से कभी बात करना गंवारा नहीं किया। अखिलेश यादव को खुश करने के लिए दैनिक जागरण के मालिकों ने एक जुगत निकाली, अपने एक कार्यक्रम में सीएम की पत्‍नी को बतौर मुख्‍य अतिथि आमंत्रित किया लेकिन सीएम इस चाल को समझ गए और उन्‍होंने अपनी पत्‍नी को इस कार्यक्रम के लिए सहमति न देने को कह दिया।

लखनऊ :  महेंद्र मोहन से लेकर संजय गुप्‍ता तक कई-कई दिन लखनऊ में पड़े रहे लेकिन सीएम अखिलेश यादव से उनकी मुलाकात नहीं हो पाई। जागरण के लोग सीएम के इंटरव्‍यू के लिए एक साल से कोशिश करते रहे लेकिन प्रेस कांफ्रेंस को छोड़कर सीएम ने उन लोगों से कभी बात करना गंवारा नहीं किया। अखिलेश यादव को खुश करने के लिए दैनिक जागरण के मालिकों ने एक जुगत निकाली, अपने एक कार्यक्रम में सीएम की पत्‍नी को बतौर मुख्‍य अतिथि आमंत्रित किया लेकिन सीएम इस चाल को समझ गए और उन्‍होंने अपनी पत्‍नी को इस कार्यक्रम के लिए सहमति न देने को कह दिया।

धोबी से न जीते गधे के कान उमेठे, वाली कहावत को चरित्राथ करते हुए जागरण के मालिकों ने राज्‍य ब्‍यूरो में सपा की बीट देखने वाले विशेष संवाददाता स्‍वदेश कुमार को जिला डेस्‍क पर भेज दिया। अब तस्‍वीर का दूसरा पहलू देखिए। लखनऊ में नवभारत टाइम्‍स आने वाला है। उससे सबसे ज्‍यादा परेशान दैनिक जागरण वाले हैं। परेशानी का आलम यह है कि मुकाबले को प्रचार युद्ध पर उतर आए हैं। शहर में गाड़ियां चलवा कर प्रचार हो रहा है जागरण का, रेडियो पर विज्ञापन दिया जा रहा है।

जिस नभाटा से जागरण वाले इस हद दर्जे तक परेशान है, उसके लखनऊ से प्रकाशन से पहले ही सीएम अखिलेश यादव ने  उसे (नभाटा) को अपना इंटरव्यू दे डाला। और वह भी जागरण छोड़कर नभाटा के असिस्‍टेंट एडीटर बने नदीम को। नभाटा प्रबंधन ने सीएम अखिलेश यादव के इंटरव्‍यू को बहुत अच्‍छे डिस्‍प्ले के साथ 31 मई को दिल्‍ली एडीशन में छापा है। इसे आप क्‍या कहेंगे? क्या जागरण की असलियत अखिलेश यादव ने जान ली है या जागरण को अखिलेश यादव घर का अखबार मानते हैं इसलिए दूसरे अखबारों को इंटरव्यू देने में ज्यादा भरोसा रखते हैं?

जो भी हो, पर परसेप्शन तो यही है कि जागरण वाले अखिलेश को अपने रंग में रंग नहीं पाए। उधर, उन्हीं जागरण वालों का आदमी जो अब नभाटा के पाले में हैं, अखिलेश का इंटरव्यू करने में एक दिन में ही सफल हो गए और वह भी बिना लखनऊ एडिशन लांच हुए ही। यह जागरण वालों के लिए सोचने की बात है कि आखिर कहीं तो कुछ गड़बड़ है जिसके कारण उनकी धमक चमक फीकी पड़ती जा रही है। वो कहते हैं न कि जागरण वाले सब पाने के चक्कर में अपना जो कुछ ओरीजनल था, वो भी गंवा बैठे हैं। माया मिली न राम… जय श्री राम!!!!

नभाटा में छपा सीएम अखिलेश का इंटरव्यू पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें- Akhilesh Yadav Interview

लखनऊ से एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.

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