समाचार पत्रों में काम करने वालों का जनरल नालेज कम होता जा रहा है। कारण की इस पेशे में अब जानकारों की नहीं चाटूकारों की मांग बढ़ी है। जाहिर है कि कम पैसे में जानकार तो नहीं चाटूकार जरूर मिल जाएंगे। ऐसा ही एक कारनामा गाजीपुर में दैनिक हिंदुस्तान ने किया है। हिन्दुस्तान ने तो सारी हदें पार करते हुए जनपद के ऐतिहासिक स्थलों का पता बदलने में जुटा हुआ है। जिन स्थलों के नाम से लोग वहां के क्षेत्रों को परिभाषित करते हैं, जिनका स्थान सैकड़ों सालों से नहीं बदला जा सका है और नहीं बदला जा सकता है।
उन ऐतिहासिक स्थलों का नया पता हिन्दुस्तान दैनिक ने 01 जून 2013 के अंक में प्रमुखता से प्रकाशित किया है जो कि लोगों को मात्र गुमराह करने का काम कर रहा है। पाठकों को बरगलाने में माहिर हिन्दुस्तान दैनिक के एक जून के अंक में पेज नं0- 5 पर हेडर लाइन में छपा है कि ‘‘पहाड़ खान का पोखरा रौजा के पास स्थित है’’ जबकि यह ऐतहासिक पोखरा शहर के विशेश्वरगंज सकलेनाबाद क्षेत्र में स्थित है। वही ठीक इस पेज के बगल के पेज नं0- 4 पर छपा है ‘‘वेद बिहारी का पोखरा मोहम्मदाबाद में स्थित है’’ जबकि सैकड़ों सालों से यह स्थल जिले के कासिमाबाद क्षेत्र में स्थित है। इस प्रकार देखा जाय तो हिन्दुस्तान दैनिक के लोग शायद जिले का नक्शा बदलने में लगे है। जिले में तीसरे पायदान पर लगातार बने रहने का प्रमुख कारण ऐसी ही मिथ्या और अप्रमाणिक खबरों का प्रकाशन तो नहीं।







