दैनिक जागरण, गोरखपुर में यह नीति लागू की गई थी कि एक जगह पर तीन वर्ष से अधिक समय तक कोई नहीं रहेगा, जो रिपोर्टिंग में रहेंगे वे डेस्क पर काम करेंगे और जो डेस्क पर तीन साल रह लेंगे वे रिपोर्टिंग में हाथ आजमाएंगे. हाल ही में हुए तबादले में जागरण्ा ने अपने ही नियम को ताक पर रखकर कुछ पत्रकारों को उनके कुंडली मारकर बैठने वाले स्थान पर ही रहने दिया है तो कई को तीन साल का समय पूरा होने के पूर्व ही उनकी जगह से हटा दिया है.
जागरण प्रबंधन के इस भेदभाव वाले व्यवहार से पत्रकारों में असंतोष है. कुशीनगर में मात्र एक साल ही प्रभार देख पाए आशीष श्रीवास्तव को गोरखपुर बुला लिया गया है. गोरखपुर डेस्क पर काम कर रहे कौशल त्रिपाठी का कार्यकाल अभी छ्ह माह भी नहीं पूरा हुआ कि उनके जैसे सीनियर पत्रकार को सजिशन संवादसूत्र के अंदर काम करने के लिए महाराजगंज भेज दिया गया. गोरखपुर डेस्क से त्रिलोकी नाथ पांडे को एक ही वर्ष में हटा कर सिद्धार्थनगर भेज दिया गया. जागरण ने जिन पत्रकारों का तबादला हुआ है उसमें बहुत भेदभाव किया गया है.
महाराजगंज में जिला का प्रभार देख चुके महेंद्र त्रिपाठी को जागरण नीति के तहत गोरखपुर डेस्क पर होना चाहिए लेकिन उन्हें बस्ती की कमान दे दी गयी. पता नहीं क्यूं महेंद्र त्रिपाठी से कभी डेस्क पर काम नहीं लिया गया. वह देवरिया के बाद महाराजगंज के प्रभारी बनाए गये थे तो अब बस्ती की कमान दे दी गयी. गोरखपुर जागरण के वरिष्ठ पत्रकार श्याम नारायण भट्ट को महेंद्र त्रिपाठी के अंडर काम करने के लिए बस्ती भेजा गया है.
कुशीनगर में रिपोर्टर रहे अनिल पाठक को गोरखपुर डेस्क पर आना था तो उन्हें महाराजगंज मे रिपोर्टिंग में भेज दिया गया है. गोरखपुर सिटी में एक ही जगह 6 से 14 वर्षों से जमे सात पत्रकारों को गोरखपुर से बाहर अन्य जिलों में कभी नहीं भेजा गया. बताया जाता है कि बड़ा पौवा होने के कारण प्रबंध तंत्र इन पर हाथ डालने से कतराता है. जागरण की इस नीति से जागरण कर्मी बहुत नाराज़ हैं और जिन चार वरिष्ठ लोगों ने तबादला की सूची तैयार की है, उन्हें कोस रहे हैं. इसका कारण यह है कि उन चारों वरिष्ठों ने अपनी पसंद और नापसन्द चेहरे देख कर पत्रकारों का तबादला कराया है.






