आदरणीय यशवंत जी, भड़ास4मीडिया। आपके वेबसाइट में दिनांक 15/05/2013 को प्रकाशित अपनी खबर ‘‘सुशासन में पुलिस और निरंकुश हुई‘‘ देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि मानो, आज न कल, कोई-न-कोई सहारा अवश्य ही मिलेगा।
दैनिक जागरण के शैलेन्द्र दीक्षित के बारे में पढ़कर कोई आश्चर्य भी न हुआ क्योंकि इन महाशय के बारे में मैं स्वयं बात कर इनके पत्रकारिता के चरित्र को जान गया हूँ। इनके बारे में मैं अगली बार विस्तार से लिखूँगा। फिलहाल, आइये हम शशि शेखर नामक ‘‘महान‘‘ शख्स जो हिन्दुस्तान नामक अखबार के प्रधान संपादक हैं, के बारे में जनता के समक्ष कुछ तथ्य रखते हैं। जिससे यह ज्ञात होगा कि किस प्रकार एक आम आदमी, उच्च पदस्थ लोगों से प्रताड़ित होता है।
मैं शशि शेखर को दिनांक 19/04/13 से पत्राचार कर रहा हूँ, जिसमें आरा स्थित हिन्दुस्तान के ब्यूरो चीफ अविनाश एवं हिन्दुस्तान के ही पटना प्रमुख केके उपाध्याय के बारे में अपने स्तर से शिकायत कर रहा था, परन्तु एक ‘निम्न कोटि‘ के आम आदमी की सुनता कौन है? ठीक इसी प्रकार शशि शेखर द्वारा मेरे प्रत्येक शिकायती पत्रों को कूड़े में डाला गया! जबकि मेरे द्वारा 25/04/13 के प्रेषित शिकायत पत्र में ब्यूरो चीफ के वार्तालाप के रिकार्डस के बारे में शशि शेखर को अवगत कराया गया था, परन्तु उनके द्वारा अपने ही ब्यूरो चीफ के वार्तालाप के रिकार्डस को मंगा कर जांच करने की जरूरत तक न समझी गई!
दिनांक 03/05/13 को प्रेषित शिकायती पत्र ऐसा था कि जिसे शशि शेखर ने कूड़े में न फेंक कर Cyber Crime Department of India से इस पत्र के आलोक में गलत शिकायत कर, मुझे धमकी भी दिलवाई। धमकी में Cyber Crime Department of India द्वारा यह कहा गया कि जंक ईमेल भेजने पर 1-3 साल तक की जेल और 1-5 लाख रुपये तक जुर्माना लगा दिया जायेगा। मुझे कड़ी चेतावनी दी गई Cyber Crime Department of India के द्वारा! जब इस विभाग से यह पूछा गया कि शिकायतकर्ता कौन है तथा उसके द्वारा दिये गये शिकायत के पत्र को दिखाया जाय, तब इस विभाग ने मौन धारण कर लिया।
Cyber Crime Department of India से बार-बार यह पूछा जा रहा है कि एक पक्षीय कार्रवाई, एक आम आदमी के ही विरूद्ध क्यों? इस विभाग द्वारा सूचना पदाधिकारी एवं अपीलीय पदाधिकारी का भी पता नहीं प्रेषित किया जा रहा है! क्या विभाग उच्च पदस्थ लोगों के लिये मात्र 24 घंटे के अंदर किसी आम आदमी को कड़ी चेतावनी एवं धमकी दे सकता है? वह भी बिना दूसरे पक्ष के सुने! आजतक इस विभाग को 3 पत्र प्रेषित किये जा चुके हैं, परन्तु मेरे उच्च पदस्थ न होने के कारण 24 दिनों में भी मेरी सुनवाई नहीं की जा रही है, विभाग के द्वारा। यह हमारा विभाग है, जो भारतीय कानून को व्यक्ति के पद-प्रतिष्ठा को देखकर लागू करता है!
इसके बाद भी, मैं अपने कानूनी अधिकार के लिये लड़ते रहने को प्रतिबद्ध हूँ। शशि शेखर जैसे राष्ट्रीय स्तर के पत्रकार को यह कतई शोभा नहीं देता कि वह अपने पद एवं पहचान के बदौलत किसी सरकारी विभाग को गुमराह कर/गलत शिकायत कर, विभाग से ही एक आम आदमी को धमकी दिलवाने का घृणित कार्य करें। यदि शशि शेखर को मुझसे शिकायत थी तो वह स्वयं भी वार्ता कर सकते थे! परन्तु उनको यह कैसे स्वीकार्य होता कि एक आम जन से बात करें? अपने अहं एवं पद-प्रतिष्ठा के घमंड में एक आम जन को प्रताड़ित करने में एवं धमकी दिलवाने में कोई कसर नहीं छोड़ी, शशि शेखर ने! शशि शेखर को यह लगता है कि केवल, प्रतिष्ठा का हनन उनके ऐसे ‘प्रतिष्ठावान‘ व्यक्ति की ही हो सकती है, ‘आम आदमी‘ की तो प्रतिष्ठा होती ही नहीं है तो प्रतिष्ठा का हनन कैसे होगा! उदाहरणस्वरूप कई बड़े-बड़े पत्रकार और नेताओं के चरित्र देश के सामने है।
संलग्नक : शशिशेखर को प्रेषित पत्रों की प्रतियां..





प्रमोद कुमार सिंह
आरटीआई कार्यकर्ता
गौसगंज, आरा, बिहार
वर्तमान- भुरकुण्डा, रामगढ़,
झारखण्ड।
मो- 9431986774





