Sanjay Tiwari : पांच साल के अनुभव के बाद बोलता हूं, विस्फोट को डॉट कॉम में तब्दील करके मैंने अपने जीवन की सबसे बड़ी गलती की। यह सिर्फ मैं जानता हूं कि इस साइट ने मुझे कैसे बर्बाद किया है। काश, मैं यह न करता।
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यह देश अगर ऐसा ही है कि दूसरों की बर्बादी से अपनी आबादी बरकरार रखेगा। तो तय मानिए एक दिन यह देश भी बर्बाद हो जाएगा। मेरी बर्बादी कोई इतिहास नहीं बनानेवाली। लेकिन देश की बर्बादी को भी कोई रोक नहीं पायेगा।
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मेरी निजी जिंदगी चौपट हो गई, कारण कुछ और नहीं यही वेबसाइट है। मेरी आर्थिक जिंदगी चौपट हो गई, कारण कुछ और नहीं यही वेबसाइट है। ऐसे ऐसे लोगों ने मेरे साथ दगा किया, धोखा दिया जिसकी मैं कल्पना नहीं कर सकता। फिर भी मैं चलता रहा। आगे बढ़ता गया कि एक दिन सब ठीक हो जाएगा। अच्छे विषय वस्तु की एक साइट की शुचिता बनाये और बचाये रखने के लिए जो कुछ कर सकता था, किया। लेकिन अब मैं टूट रहा हूं। ईमानदारी का ईनाम क्या ऐसे ही बर्बादी के रूप में आती है?
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लोगों को मौज चाहिए। लेकिन लोग भूल जाते हैं कि मदारी को भी पेट होता है। मौज मनानेवाले अनजाने ही मदारी को मार देते हैं।
विस्फोट डाट काम के संस्थापक और संपादक संजय तिवारी के फेसबुक वॉल से.





