Dilip C Mandal : पत्रिकाओं में छपने वाले सेक्स सर्वे को लेकर ब्राह्मणवादियों की चिढ़ का राज कहीं ये तो नहीं कि इन सर्वे से साल दर साल यह बात सामने आ रही है कि महिलाएं अपने शरीर को लेकर ज्यादा स्वतंत्रता से फैसले करने की दिशा में आगे बढ़ रही हैं. अपनी देह को लेकर वे लिबरेट हो रही हैं. क्योंकि अगर चमड़ी दिखने से शिकायत होती तो कुंभ की नंग-धड़ंग तस्वीरों से भी शिकायत होती. मंदिरों की भांति-भांति के पोज वाली मूर्तियों से भी शिकायत होती. तमाम ग्रंथों के यौन वर्णनों से शिकायत होती. रीति काल के नख-शिख काव्य से शिकायत होती. यानी शिकायत सिर्फ महिलाओं की आजादी से है? वैसे देवदासी प्रथा से भी इन्हें कोई शिकायत नहीं है.
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Dilip C Mandal : देश में बड़े बड़े तोपचंद है. उद्योगपति हैं, वैज्ञानिक हैं, बैंकर हैं, टेक्नोक्रेट और मैनेजर हैं, डॉक्टर हैं, शिक्षाशास्त्री हैं. लेकिन इन क्षेत्रो में देश कहां हैं यह आपको पता है. लेकिन एक आदमी है, जिसने इस देश को 40 साल से कभी निराश नहीं किया. वह देश का किसान है, जिसने कभी देश को यह शिकायत नहीं होने दी कि देश का पेट भरने लायक अनाज क्यों नहीं उगाते. इसके बावजूद, मित्रो, किसानी को लेकर किसी भी तरह का रोमांटिक भाव खतरनाक है. जो समुदाय किसानी से हटकर सर्विस सेक्टर, शिक्षा या उद्योग-व्यापार में जुटा, वह आज आगे है.
पत्रकार दिलीप मंडल के फेसबुक वॉल से.





