Yashwant Singh : कल जवान और दीवाना दोनों बन गया, 'ये जवानी है दीवानी' के लिए लेकिन बहती गंगा में हाथ नहीं धो पाया यानि फिलिम का टिकटवा नहीं पा सका. कल शाम मन हुआ कि बहुत दिनों से जीवन मोनोटोनस है, सो कुछ अलग हो जाए. दिल्ली में अलग करने होने के नाम पर हम जैसों के लिए फिलिम, थिएटर और माल, यही चीजें हैं. सो, छह बजे के आसपास वी3एस माल लक्ष्मीनगर पहुंच गया और फिल्म का टिकट लेने बाक्स आफिस यानि खिड़की तक पहुंचा. वहां अगले दो शो हाउसफुल थे. रात दस बजे का टिकट मिल रहा था.
वहां से भागा अट्टा. वेब सिनेमा में इत्ती बड़ी लंबी लाइन लगी दिखी कि हताश हो गया. आगे वालों से पूछा तो वो बता रहे थे कि रात दस बजे शो का टिकट ले रहे हैं. वहां से सड़क फांदकर उस पार ग्रेट इंडिया पैलेस के तीसरे माले बिग सिनेमा पहुंचा. वहां भी वही हाल. पैर थक चुके थे यहां-वहां करते. अंत में तीसरे माले पर ही गुजराती-राजस्थानी-उत्तर भारतीय खानों की बड़ी सी संयुक्त थाली परोसने वाले रेस्टोरेंट में घुस गया और पौने तीन सौ रुपये चुकाकर इंद्रियों का समवेत आह्वान कर लीलने में जुट गया.. जमकर निगला और इसी बहाने गुस्सा मिटाया…
कहते हैं कि आदमी फ्रस्ट्रेशन में ज्यादा खा जाता है… इसका सच्चा और लाइव पता अब चल रहा जब कई दफे 'बड़े घर' आ-जा चुका हूं… अब सोच रहा कि जब फिल्म नहीं देख पाया तो इसके गाने ही सुन लूं… भागते भूत की लंगोटी सही… फिलिम के सारे गाने मस्त और सुपर डुपर हिट बताए गए हैं.. हम ठहरे सड़क छाप जो हर तरह की महफिलों में दीवाना बना फिरते हैं, सो आइए नए जमाने की इस पापुलर लव स्टोरी के गानों पर भी हो-हल्ला कर लें..
बाकी कसम है हर जमाने की प्रेम कहानियों की, कि कल नहीं सफल हुए तो आज, आज नहीं हो पाए तो फिर आने वाले कल… फिल्म देख कर रहूंगा जी.. न सही खिड़की वाली टिकट, आनलाइन वाले रास्ते से, 20 रुपये एक्स्ट्रा ब्लैक(बुकिंग)रेट देकर देखूंगा…
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दिल्ली वाली गर्लफ्रेंड छोड़छाड़ के…
https://www.bhadas4media.com/vividh/11934-2013-06-04-10-18-01.html
भड़ास के संपादक यशवंत सिंह के फेसबुक वॉल से.





