दैनिक जागरण के पत्रकार अपने व्यक्तिगत स्वार्थों के चलते अखबार का नाम बदनाम करने में जरा भी नहीं चूक रहे हैं. जागरण जैसा ब्रांड अपने पत्रकारों के कारनामों के चलते ही लगातार पाठकों में अविश्वसनीय बनता जा रहा है. सही खबरों का प्रकाशन करके अखबार की छवि मजबूत करने की बजाय खुद का स्वार्थ इन पत्रकारों को ज्यादा रास आ रहा है. मामला बनारस यूनिट से जुड़े चंदौली जिले के मुगलसराय का है. यहां सीबीएसई की परीक्षा में उच्च स्थान प्राप्त करने वाले प्रतिभाशाली छात्रों की तस्वीर तथा उनके स्कूलों की जानकारियां प्रकाशित की गई हैं.
यहां पास होने वाले छात्रों का स्कूल तथा उनका सीजीपीए प्रकाशित किया गया है. इसी में सारा खेल किया गया है. इस लिस्ट में दिखाया गया है कि सेंट्रल पब्लिक स्कूल से उच्च रैंक पाकर तीन छात्र पास हुए हैं, लेकिन सच्चाई यह है कि सेंट्रल पब्लिक स्कूल नामक संस्था को चंदौली जिले में सीबीएसई से मान्यता ही नहीं मिला है, इसके बावजूद इस अखबार ने गलत सूचना प्रकाशित करते हुए तीन छात्रों को सेंट्रल पब्लिक स्कूल से पास दिखाया है. जबकि सच्चाई यह है कि ये तीनों यूनिवर्सल पब्लिक स्कूल, बबुरी के छात्र हैं तथा वहीं से पास हुए हैं. इसकी तस्दीक उनके मार्कशीटों से भी की जा सकती है.
अगर इन तीनों छात्रों के अंकपत्र की जांच की जाए तो सारा खुलासा खुद-ब-खुद हो जाएगा, लेकिन पता नहीं किस लालचवश मुगलसराय की जिम्मेदारी देखने वाला संवाद सूत्र विनय वर्मा ने इस तरह की फर्जी सूचना प्रकाशित की है. वैसे कुछ लोगों का कहना है कि या तो संबंधित पत्रकार ने संस्था से पैसा लिया होगा या फिर संस्था से ही किसी तरीके से उसका जुड़ाव होगा. हालांकि इसमें जो भी सच्चाई हो इस फर्जी और गलत सूचना से लोगों के बीच जागरण का विश्वास कम हुआ है. कम से कम शिक्षा जगत से संबंध रखने वाले लोग तो अखबार और उसके पत्रकार के इस फर्जीवाड़े पर थू-थू कर रहे हैं. वैसे भी इस संवादसूत्र पर पहले भी आरोप लगते रहे हैं कि यह व्यक्तिगत हितों के चक्कर में अखबार की साख को प्रभावित करता रहता है.
पिछले दिनों भी मुगलसराय डेटलाइन से एक गलत खबर प्रकाशित की गई थी, जिसके बाद अखबार की जमकर थू-थू हुई थी. इस संवाद सूत्र पर पत्रकारिता के नाम पर अपनी दुकान सजाने के भी आरोप गाहे बगाहे लगते रहते हैं क्योंकि पत्रकारिता इसके लिए सेकेंडरी तथा पत्रकारिता की आड़ में अन्य काम प्राइमरी लिस्टों में शामिल हैं. सूत्रों का कहना है कि संवाद सूत्र अखबार को कम समय देता है, लिहाजा आए दिन गड़बडि़यां होती ही रहती हैं. बताया जाता है कि इस संवाद सूत्र ने अपने पास से एक हजार रुपये देकर पी धनंजय उर्फ बंटी नामक एक युवक को रखा हुआ है, जो दिन भर इसके लिए काम करता है तथा शाम को इसके आने के बाद रिपोर्ट देता है. माना जा रहा है कि इस मामले में भी गड़बड़ी इसी युवक ने की है. आप भी देखिए जागरण में प्रकाशित गलत सूचना…

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