Sanjeev Chandan : ये देखिये विभूति राय की धोखाधड़ी. छाती ठोंक के किये जा रहे हैं जनाब. इसमें एक ऑफिसर ऑन स्पेशल ड्यूटी के लिए विज्ञापन है, किसी चहेते को वे यहाँ पदस्थापित करना चाहते हैं. विज्ञापन में साफ़ दिख रहा है कि यह पद अशोसिएट प्रोफ़ेसर के वेतनमान में विज्ञापित है. जबकि कल ही विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने मुझे जानकारी भेजी है कि यह पद २००१ में विश्वविद्यालय को २५ हजार रुपये फिक्स पर आवंटित हुआ था.
इस प्रकार यह पद वेतनमान में नियुक्त करना धोखाधड़ी तो है ही, कायदे से यह लैप्स हो चुका है, और नियुक्ति हो ही नहीं सकती है. वैसे विभूति ने इसी २००१ के आवंटन वाले कई पदों पर नियुक्तियां ही नहीं की है, बल्कि उसे पिछले कार्यपरिषद की बैठक में कन्फर्म भी करा लिया है. इस धोखाधड़ी की श्रृंखला में ही पिछले दिनों अपने राजस्थान प्रवास में आतिथ्य देने वाले पालीवाल दम्पति के एक सदस्य को उन्होंने अकादमिक कोऑरडीनेटर बना दिया है. घपले तो कई हैं, इससे ज्यादा अपराधिक प्रवृत्ति के. यह एक ताजा नमूना है. इसलिए जानकारी के लिए यहाँ सार्वजनिक कर रहा हूँ.

संजीव चंदन के एफबी वॉल से साभार.






