वाराणसी : इसे कहते हैं खबर का असर। बनारस में इलेक्ट्रानिक मीडिया की बैठक की सामान्य सी खबर का जोरदार असर हुआ है। जैसे ही रामसुंदर मिश्रा राजू की लिखी खबर को भड़ास ने पब्लिश किया। स्ट्रिंगर से सहारा के ब्यूरो चीफ बने निमेष राय को बुखार आ गया। निमेष बैठक के दौरान एसएसपी को जमकर गालियां दे रहे थे। लोगों ने मना किया तो वो मना करने वालों को समझाने लगे। लेकिन जब भड़ास ने उनका संयमित शब्दों में एसएसपी के कृत्यों के विरोध का बयान छाप दिया तो शेर निमेष चूहा बन गये।
अपनी बौखलाहट में उन्होंने मीटिंग में मौजूद रहे तमाम लोगों को फोन किया और भड़ास पर खबर देने वाले राम सुंदर मिश्रा राजू को गालियां देने लगे। उन्होंने मीटिंग को बुलाने वाले एएनआई के वरिष्ठ संवाददाता गिरीश दुबे को भी जमकर गालियां दी। उन्होंने रामसुंदर को फोन करके उनसे भड़ास पर से खबर हटवाने के लिए कहा। यहीं हाल कमोवेश जी न्यूज के ब्यूरो चीफ अमित सिंह का भी हो गया। एसएसपी के खिलाफ अपना बयान छपने पर अमित सिंह के चक्कर आने लगे। आखिरकार निमेष और अमित सिंह ने तय किया कि अब चलकर एसएसपी से ही मनुहार करके सफाई दी जाएगी।
दोनों गुपचुप तरीके से एसएसपी से मिलने पहुंचे और सफाई दी कि भड़ास में जो कुछ छपा है वो उनका बयान नहीं है बल्कि रामसुंदर मिश्रा ने अपनी तरफ से छापा है। वो तो वस्तुत एसएसपी के प्रशंसक है। दो प्रमुख रीजनल चैनलों के ब्यूरो चीफ की चाटुकारिता से हाथी की तरह मदमस्त हो चुके एसएसपी अजय मिश्रा काफी खुश हुए और उन्होंने दोनों को अभयदान देते हुए खबर छापने वाले रामसुंदर मिश्रा राजू को अरेस्ट करने की बात कही। निमेष राय एसएसपी के रूख से काफी प्रसन्न हुए। अमित और निमेष ने राजू की कमियों को बताकर उसे अरेस्ट करवाने में मदद का भरोसा दिलाया। ये सब कुछ एसएसपी और दोनों महान ब्यूरो चीफ के बीच दफन हो जाता वो तो वहां पर इंडिया न्यूज का कैमरा मैन भी बाइट लेने पंहुच गया और पूरा वाकया उसकी आंखों के सामने हुआ। बाहर आकर उसने लोगों को भीतर हुए वार्तालाप की जानकारी दी।
दरअसल, न्यूज नेशन के काशीनाथ शुक्ला ने एक खबर बनायी कि मणिकर्णिका घाट पर लाशों पर सट्टेबाजी होती है। काशीनाथ के साथ पत्रकार आसिफ और राजेश पन्ना भी खबर बनाने गये थे। काशीनाथ ने खबर लाकर हमेशा की तरह अपने सबसे नजदीकी जी न्यूज के अमित को दी। जी न्यूज ने खबर को सनसनी फैलाकर चलाना शुरू किया। उसके बाद खबर सहारा के शांतनु के हाथ लगी। सहारा भी पीछे नहीं रहा। ब्यूरो चीफ निमेष राय ने लाइव और फोनो देने शुरू कर दिया। समाचार प्लस पर भी एंकर खबर पर चिल्लाते नजर आया। तमाम चैनलों ने खबर को देखादेखी में चलाना शुरू कर दिया। अमूमन कोई खबर एक या दो दिनों तक चलकर खत्म हो जाती है। लेकिन सहारा और जी न्यूज ने खबर को चार पांच दिनों तक जमकर चलाया। पुलिस हलकान हो गयी।
आखिरकार पुलिस ने मामले में जांच शुरू कर दी। इस मामले में पुलिस ने आक्रामक रवैया अपनाते हुए जी न्यूज, सहारा, ईटीवी, न्यूज नेशन, समाचार प्लस सहित छह चैनलों को नोटिस दिया। इसके बाद पुलिस चैनलों पर हावी होने लगी। गिरीश दुबे से खुन्नस खाये दैनिक जागरण के आशुतोष शुक्ला को मसाला मिल गया। एसएसपी के बयानों से दैनिक जागरण में खबरें छपने लगी कि चैनलों ने खबर प्रायोजित की थी। उधर, जैसे ही पुलिस ने चैनलों को नोटिस दी। खबर चलनी बंद हो गयी। सहारा और जी न्यूज जिन्होंने खबर पर हो हल्ला मचा रखा था वहां सन्नाटा पसर गया। दोनों के ब्यूरो चीफ एसएसपी से मिलकर अभयदान मांगने लगे।
उधर, एसएसपी से मीठी मीठी बातें करके पटियाते और फील्ड में दीदादिलेरी दिखाते हुए एसएसपी को चुनौती देते कि जो उखाड़ सकता है उखाड़ ले। आखिरकार दो मुंहा चेहरा तब नुमाया हो गया जब शहीद उद्यान में हुई बैठक की खबर राम सुंदर मिश्रा ने भड़ास पर छपवा दी। अब पूरी बात रामसुंदर मिश्रा पर आ गयी है। एसएसपी रामसुंदर को जेल भेजने के लिए तरकीबें भिड़ा रहा है और दोनों मूर्धन्य ब्यूरो चीफ मुखबिर बनकर उसकी मदद करने में जुट गये हैं।
उपरोक्त पत्र भड़ास के पास [email protected] मेल आईडी के जरिए भेजा गया है.





