उदयपुर में इन दिनों नगर विकास प्रन्यास की ओर से पत्रकारों को दिए जा रहे भूखंड को लेकर भास्कर प्रबंधन पर उनका ही एक पत्रकार भारी पड़ रहा है। लंबे समय से नगर विकास प्रन्यास की बीट देखने वाले भास्कर के एक रिपोर्टर ने उदयपुर के 102 पत्रकारों को सामूहिक रूप से धमकी दी कि उनके नाम लॉटरी में खुले भूखंड वे लेकर देख लें।
मामला इस कदर बढ़ गया कि सोमवार को पत्रकारों ने उदयपुर प्रन्यास कार्यालय के सचिव आरएएस अधिकारी आरपी शर्मा को घेर लिया और शाम तक उनको उनके कक्ष से बाहर निकलने नहीं दिया। इस दौरान सचिव को खूब खरीखरी सुनाई।
पत्रकारों ने आरोप लगाया कि इस मामले में मुख्यमंत्री गहलोत, नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल, प्रन्यास अध्यक्ष रूपकुमार खुराना ने यह कार्रवाई पूरी कराई और आप भास्कर के एक पत्रकार के कहने पर कैसे चल रहे हैं। इस दौरान कांग्रेस नेता नीलिमा सुखाडिय़ा भी वहां पहुंची और जयपुर में सीएम कार्यालय व शांति धारीवाल से बात की। बाद में सभी ने यही कहा कि आवंटन पत्र क्यों नहीं दिए जा रहे हैं। इस बीच नीलिमा ने भास्कर के रिपोर्टर की इस रणनीति को भी ठीक नहीं बताया। ये वही नीलिमा है जिन्होंने सोलह साल पहले उदयपुर में भास्कर के लांचिग के समय भोपाल के भास्कर मालिकों की बहुत मदद की थी।
सचिव ने पत्रकारों से कोर्ट में मामला होने की बात की तो पत्रकारों ने कहा कि कोर्ट ने करीब छह पत्रकारों के नाम पर आपत्ति दर्ज कराई है तो बाकी सभी को इसका नुकसान क्यों करवा रहे हैं, उन पर कोर्ट को कोई आपति नहीं है। आखिर पत्रकार आवंटन पत्र लेकर रहे और यूआईटी ने रात तक सभी को आवंटन पत्र दिए। गत दिनों 102 पत्रकारों के नाम भूखंड की लॉटरी निकाली लेकिन करीब 14 दिन निकल जाने के बाद भी भूखंड आवंटन पत्र व अन्य फॉमल्टी प्रन्यास पूरी नहीं कर रही और मामला अटका रखा था। इस दौरान प्रन्यास कार्यालय में भास्कर के एक वरिष्ठ साथी भी रिपोर्टर का साथ दे रहे थे।
उदयपुर में भास्कर के इस रिपोर्टर व इसको प्रश्रय देने वाले वरिष्ठ साथी ने भास्कर की साख को बट्टा लगा दिया है। भास्कर के एमडी सुधीर अग्रवाल व राजस्थान हेड ओम गौड को इस मामले को गंभीरता से लेना चाहिए, पत्रकारों ने साफ कहा कि इनके दबाव से भूखंड अटकाने की रणनीति अभी चल रही है। जनता का दु:ख-दर्द बांटने वाले भास्कर के ये रिपोर्टर अपनी दादागिरी के बूते पत्रकारों को क्यों परेशान कर रहे हैं। सबसे खास बात यह है कि भूखंड पाने वालों की सूची में कई पत्रकार भास्कर के भी है। इस पत्रकार व वरिष्ठ साथी को तो पांच साल पहले भूखंड मिल चुका है।
यह था मामला : गत दिनों पूर्व गृहमंत्री गुलाबचंद कटारिया की उदयपुर में प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली थी इस दौरान लेकसिटी प्रेस क्लब के पूर्व अध्यक्ष अख्तर खान व देवेन्द्र में विवाद हो गया था। तब से ये मामला बढ़ गया और बरसों से नगर निगम व प्रन्यास की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकार ने चेलेंज कर दिया कि उदयपुर के पत्रकार अब भूखंड लेकर देख लें।





