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चंदौली

मुगलसराय में छात्राओं ने लैपटॉप मांगा, पुलिस ने लाठी दी

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय में सोमवार को लैपटाप न मिलने से नाराज सैकड़ों छात्राएं सड़क पर उतर आईं और मुगलसराय – वाराणसी  मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। चक्का जाम की खबर पर मौके पर पहुंचे पुरूष पुलिस कर्मियों ने छात्राओं को लाठियों के बल पर खदेड़ना शुरू कर दिया, जिसके चलते दो छात्राएं बेहोश हो गईं। उन्‍हें उपचार हेतु एक निजी चिकित्सालय में ले जाया गया।

उत्तर प्रदेश के चंदौली जिले के मुगलसराय में सोमवार को लैपटाप न मिलने से नाराज सैकड़ों छात्राएं सड़क पर उतर आईं और मुगलसराय – वाराणसी  मार्ग पर चक्का जाम कर दिया। चक्का जाम की खबर पर मौके पर पहुंचे पुरूष पुलिस कर्मियों ने छात्राओं को लाठियों के बल पर खदेड़ना शुरू कर दिया, जिसके चलते दो छात्राएं बेहोश हो गईं। उन्‍हें उपचार हेतु एक निजी चिकित्सालय में ले जाया गया।

बड़ी बात तो यह रही कि इस पूरे घटना क्रम और लाठी भांजने के दौरान सीओ सदर सुधाकर यादव खुद मौके पर मौजूद थे। और तो और सीओ साहब इस शर्मनाक पुलिसिया कार्यवाही का विरोध करने की बजाय इन छात्राओं पर अपनी मर्दानगी दिखाने में पीछे नहीं रहे। वे खुद डंडा कोचते हुए प्रदर्शन कर रही छात्राओ को खदेड़ने में लग गए। इस सम्बन्ध में नाराज छात्राओं ने पुलिस पर बदसलूकी का आरोप लगाया है।

इस घटना से यूपी पुलिस का घिनौना और विद्रूप चेहरा लोगों के सामने आया है। लैपटॉप ना मिलने से नाराज छात्राओं को समझाने के बाद पुलिसकर्मियों ने उनसे बदसलूकी की। छात्राओ का आरोप था की सूबे के मुखिया अखिलेश यादव सभी जिलो में लैपटॉप का वितरण कर रहे हैं, लेकिन मुगलसराय में महिला कॉलेज में सैकड़ों लड़कियों से फॉर्म तो जरूर भरवा लिया गया, लेकिन बावजूद इसके अभी तक उन्हें लैपटॉप नहीं मिला। इस बात से नाराज आज सैकड़ों की संख्या में छात्राओं ने मुगलसराय-वाराणसी रास्ट्रीय राजमार्ग पर जाम लगा दिया।

छात्राओ की मांग थी कि जब तक उन्हें लैपटॉप नहीं मिल जाता इसी तरह वो सड़क पर बैठी रहेंगी। इसी बीच एक छात्रा बेहोश हो गयी जिसे देखकर अन्‍य छात्राओं का आक्रोश और भी बढ़ गया और वह मुख्यमंत्री के खिलाफ नारेबाजी करने लगीं। ताज्जुब की बात तो तब हुई जब मौके पर पहुंचे सीओ चंदौली ने खुद लाठी लेकर अपनी मर्दानगी उन मासूम छात्राओं पर दिखाई और उन्हें बुरी तरह धकेलते हुए खदेड़ दिया, जिसमें आधा दर्जन से ज्यादा छात्राएं घायल हो गयीं।

सवाल यह खड़ा होता है कि अगर दो घंटे तक छात्राएं सड़क पर बैठ कर प्रदर्शन कर रही थीं तो क्‍यों नहीं जिले की महिला पुलिसकर्मियों को बुलाया गया। क्‍यों पुरुष पुलिसकर्मी ही छात्राओं से अभद्रता करते रहे। हालांकि दौरान एसडीएम चंदौली भी वहां मौजूद थे लेकिन उन्होंने भी छात्राओं को समझाने की बजाय उनपर जोर-आजमाईश करना ही मुनासिब समझा। छात्राओं  के साथ हुए खुलेआम इस तरह के बदसलूकी को देखकर तो यही अंदाजा लगाया जा सकता है कि यू-पी की पुलिस को मानो अपनी मनमानी करने की पूरी छूट मिली हुई है।

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