एक दौर में खुद तमाम गंभीर आरोपों से घिरे रहे जगमोहन डालमिया को एक बार फिर क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) की कुर्सी मिल गई है। हालांकि, एकदम अस्थाई व्यवस्था के तहत उन्हें अंतरिम कार्य समूह दल का प्रमुख बनाया गया है। ऐसे में, स्पष्ट रूप से तय नहीं है कि उन्हें मौजूदा स्थितियों में कितने वित्तीय अधिकार हैं? फिर भी, 73 वर्षीय जगमोहन डालमिया स्पॉट फिक्सिंग से उठे विवाद को लेकर, साफ-सफाई की बड़ी-बड़ी बातें जरूर करने लगे हैं। दावा तो यही कर रहे हैं कि वे एक महीने के अंदर क्रिकेट की तमाम गंदगी को दूर कर देंगे। ताकि, क्रिकेट प्रेमियों का दरका हुआ विश्वास फिर से बहाल हो सके। लेकिन, वे यह सब कैसे कर पाएंगे? इस पर फिलहाल उनका जवाब यही है कि कुछ समय दीजिए और परिणाम देख लीजिए।
राजस्थान रॉयल्स चैलेंजर्स आईपीएल टीम के कुछ खिलाड़ी स्पॉट फिक्सिंग के आरोप में पिछले महीने धर लिए गए थे। टीम इंडिया के क्रिकेटर एस. श्रीशांत के साथ अजित चंदीला और अंकित चव्हाण को गिरफ्तार किया गया था। ये तीनों क्रिकेटर राजस्थान आईपीएल टीम में खेलते रहे हैं। आरोप है कि पैसे की लालच में इन लोगों ने सट्टेबाजों से मिलकर स्पॉट फिक्सिंग का गंदा खेल शुरू किया था। कई तरह के इशारों के जरिए ये लोग सट्टेबाजों को तय सिगनल दे देते थे। इस तरह से सट्टेबाज चुटकियों में करोड़ों रुपए का खेल कर लेते थे।
16 मई को दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने इन क्रिकेटरों को मुंबई से गिरफ्तार करके इनके गोरखधंधे का सनसनीखेज खुलासा किया था। पूछताछ के बाद लगातार तमाम चौंकाने वाली जानकारियां आती रहीं। यह पता चला कि इस फिक्सिंग रैकेट के तार अंतरराष्ट्रीय अंडरवर्ल्ड माफियाओं से जुडेÞ हुए हैं। इस गिरोह का संचालन डॉन दाऊद इब्राहिम की ‘डी’ कंपनी कराची और दुबई से कराती रही है। पुलिस ने दो दर्जन से ज्यादा सट्टेबाजों को भी गिरफ्तार किया है। पड़ताल से पता चला कि फिक्सिंग का यह गंदा खेल केवल आईपीएल के सीजन-6 तक ही सीमित नहीं रहा है। बल्कि, फिक्सिंग का रैकेट आईपीएल के पिछले मैचों से ही काम कर रहा था।
इस गिरोह ने अपना जाल बॉलीवुड तक फैला लिया था। मुंबई पुलिस यह पड़ताल करने में जुटी है कि बॉलीवुड के किन सितारों ने अपनी काली कमाई इस धंधे में लगाई है? इस रैकेट में भागीदारी करने के आरोप में अभिनेता विंदु दारा सिंह भी गिरफ्तार हुए थे। पूछताछ के दौरान विंदू ने इस धतकर्म का तमाम ब्यौरा पुलिस को बता दिया है। उसने यह भी कबूल लिया है कि इस फिक्सिंग रैकेट से उसने 17 लाख रुपए बनाए थे। इसी लालच में आकर उसने अपने काम को और विस्तार देने की योजना बनाई थी। यह भी बता दिया कि क्रिकेटरों को ललचाने के लिए कई बार लड़कियों का भी इस्तेमाल हुआ है।
विंदु दारा सिंह से मिली जानकारी के बाद ही चेन्नई आईपीएल टीम के प्रमोटर गुरुनाथ मयप्पन फंस गए हैं। पता चला है कि अपनी टीम की रणनीति के टिप्स लेकर मयप्पन पहले ही सट्टेबाजों को बता देता था। इसके बदले उसे एक झटके में लाखों रुपए मिल जाते थे। जबकि, इस सूचना को भुनाकर सट्टेबाज करोड़ों रुपए चंद मिनटों में बना लेते थे। मयप्पन के खिलाफ जब काफी मसाला मिल गया था, तो मुंबई पुलिस ने मयप्पन को गिरफ्तार किया था। मयप्पन के फंस जाने के बाद ही बीसीसीआई के प्रमुख एन. श्रीनिवासन की मुश्किलें बढ़ गईं। इसी बीच इस आशय की भी जानकारियां बाहर आने लगीं कि किस तरह से अपने दामाद को फायदा पहुंचाने के लिए बीसीसीआई प्रमुख ने अपने पद का दुरुपयोग किया था?
इन खुलासों के साथ ही दबाव बढ़ने लगा कि बीसीसीआई से श्रीनिवासन इस्तीफा दें। पहले तो वे यही कहते रहे कि बीसीसीआई के सभी कार्यकारी सदस्य उनके साथ हैं, ऐसे में वे इस्तीफा नहीं देंगे। लेकिन, श्रीनिवासन का यह अड़ियल रवैया लंबे समय तक टिकाऊ साबित नहीं हुआ। क्योंकि, कई राज्यों के क्रिकेट एसोसिएशन प्रमुखों ने श्रीनिवासन के खिलाफ आवाज उठानी शुरू की। यही मांग हुई कि कम से कम दामाद की भूमिका की पड़ताल होने तक वे क्रिकेट प्रशासन की भूमिका से अलग रहें। क्योंकि, ऐसा न होने से जांच प्रभावित हो सकती है।
लंबी जद्दोजहद के बाद रविवार को चेन्नई में बीसीसीआई कार्यकारिणी की आपात बैठक बुलाई गई थी। उम्मीद की जा रही थी कि अंदरूनी और बाहरी दबाव को देखते हुए श्रीनिवासन इस्तीफा दे देंगे। लेकिन, ऐसा नहीं हुआ। बीच का रास्ता निकाला गया। यही व्यवस्था की गई कि जांच होने तक श्रीनिवासन अध्यक्ष के तौर पर रोजमर्रा के कामकाज से अलग रहेंगे। अंतरिम कार्य समूह के अध्यक्ष के तौर पर जगमोहन डालमिया काम करेंगे।
कार्यकारिणी के इस फैसले से बीसीसीआई के अंदर भी कुछ-कुछ असंतोष है। पंजाब क्रिकेट संघ के प्रमुख आई एस बिंद्रा ने चेन्नई की बैठक में हिस्सा लिया था। उनका दावा है कि बैठक के अंदर उन्होंने श्रीनिवासन के इस्तीफे की मांग की थी। यही कहा था कि इस्तीफा न देने से क्रिकेट की विश्वसनीयता पर तमाम सवाल खड़े होंगे। ऐसे में, वे क्रिकेट की साख के लिए इस्तीफा दे दें। लेकिन, दूसरे सदस्यों ने खुलकर ऐसी मांग नहीं की। इसी के चलते श्रीनिवासन अपनी कुर्सी बचाने में सफल रहे हैं। बिंद्रा, चेन्नई की मीटिंग को एक तमाशा करार कर रहे हैं। वे तो यहां तक कह रहे हैं कि कुछ लोगों ने चेन्नई की मीटिंग को भी ‘फिक्स’ कर लिया था।
उल्लेखनीय है कि बीसीसीआई के सचिव संजय जगदाले और कोषाध्यक्ष अजय शिर्के ने श्रीनिवासन के अड़ियल रवैए से नाराज होकर अपने इस्तीफे दे दिए थे। दरअसल, इन्हीं इस्तीफों के बाद चेन्नई की मीटिंग तय हुई थी। जगमोहन डालमिया को नई जिम्मेदारी मिली है। उन्होंने कहा था कि 24 घंटे के अंदर यदि संजय और अजय शिर्के अपने इस्तीफे वापस ले लें, तो अच्छा है। वरना, इन दोनों की जिम्मेदारी भी वे खुद निभाएंगे। इसके जवाब में संजय ने तुरंत ऐलान कर दिया था कि वे अपना इस्तीफा वापस लेने नहीं जा रहे।
जगमोहन डालमिया कोलकाता के एक बड़े बिजनेसमैन हैं। क्रिकेट प्रशासक के रूप में वे लंबी पारी पहले भी खेल चुके हैं। डालमिया, बीसीसीआई और आईसीसी (अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट काउंसिल) के अध्यक्ष भी रह चुके हैं। दिसंबर 2006 में उन्हें बीसीसीआई ने भारी आर्थिक हेराफेरी के आरोप में बर्खास्त किया था। उन पर आरोप लगा था कि उन्होंने 1996 में हुए वर्ल्ड कप के दौरान भारी वित्तीय गड़बड़ियां की थीं। उन पर करोड़ों रुपए की हेराफेरी का आरोप लगा था। लेकिन, डालमिया ने सुप्रीम कोर्ट तक लड़ कर ‘क्लीन चिट’ ले ली थी। क्योंकि, अदालत में बीसीसीआई प्रबंधन, डालमिया के खिलाफ वित्तीय हेराफेरी के पुख्ता सबूत नहीं दे पाया।
अदालत से मिली राहत के बाद भी डालमिया की भूमिका को लेकर तमाम सवाल खड़े होते रहे हैं। लेकिन, क्रिकेट की राजनीति में माहिर डालमिया ने तमाम प्रतिद्वंद्वियों को पस्त करते हुए क्रिकेट एसोसिएशन आॅफ बंगाल में फिर से कब्जा जमा लिया। इन दिनों भी वे बंगाल क्रिकेट संघ के प्रमुख हैं। श्रीनिवासन पर आए संकट के बाद अब वे बीसीसीआई के नए ‘संकटमोचक’ की भूमिका में आ गए हैं। बीसीसीआई की अंदरूनी तिकड़मों को जानने वालों का मानना है कि डालमिया अब मजबूत भूमिका में अपने लिए फिर से ताने-बाने बुनेंगे। इसी के साथ उन लोगों से भी ‘हिसाब’ ले लेंगे, जिन्होंने उन्हें 2006 में बीसीसीआई से बर्खास्त करवाया था। बताया जा रहा है कि डालमिया ने ही अपने दौर में एन. श्रीनिवासन को काफी ‘प्रमोट’ किया था। शायद, इसीलिए श्रीनिवासन ने जगमोहन पर ही विश्वास जताया।
स्पॉट फिक्सिंग के मामले में श्रीनिवासन ने ही बीसीसीआई की तरफ से एक तीन सदस्यीय जांच आयोग गठित किया था। इसमें दो सदस्य हाईकोर्ट के रिटायर जज हैं। जबकि, एक सदस्य संजय जगदाले को बनाया गया था। उन्हें बीसीसीआई के सचिव के नाते इसमें रखा गया था, लेकिन अब वे इस्तीफा दे चुके हैं। ऐसे में, सवाल उठा कि जांच आयोग का नया स्वरूप क्या होगा? इस बारे में डालमिया यही कह रहे हैं कि जगदाले के जाने के बाद तीसरे सदस्य के रूप में वे जल्द ही नए नाम का ऐलान कर देंगे। जबकि, बाकी दो सदस्य वही रहेंगे, जिनके नाम का ऐलान पहले हो चुका है।
बीसीसीआई के कई सदस्यों ने अंदरूनी तौर पर इस जांच पैनल की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए हैं। क्योंकि, इस जांच पैनल में शामिल किए गए हाई कोर्ट के दोनों जजों का ताल्लुक तमिलनाडु से ही है। जबकि, इस मामले में मयप्पन की भूमिका की जांच भी होनी है। श्रीनिवासन और उनके दामाद मयप्पन दोनों का संबंध चेन्नई से है। श्रीनिवासन वहां एक बड़ी सीमेंट कंपनी के प्रमुख हैं। जबकि, ‘दामाद जी’ चेन्नई सुपरकिंग्स आईपीएल टीम के मालिकों में एक हैं।
जब मीडिया ने डालमिया से इस संदर्भ में सवाल किया, तो उन्होंने उस्तादीभरा जवाब दिया। यही कहा कि माननीय न्यायाधीशों के बारे में ऐसी गैर-जिम्मेदारी वाली बातें सोचना भी पाप है। उन्होंने उम्मीद जाहिर की है कि एक महीने के भीतर इस जांच आयोग की रिपोर्ट आ जाएगी। इसी से तय हो जाएगा कि इस फिक्सिंग के खेल में किसकी क्या भूमिका रही है? उनके संकेतों से यही लगा कि एक महीने के भीतर श्रीनिवासन फिर अपने काम पर लौट आएंगे।
स्पॉट फिक्सिंग के रैकेट में दिल्ली पुलिस को अंडरवर्ल्ड की भूमिका के सबूत भी मिले हैं। इसी से उसने डॉन दाऊद इब्राहिम और डॉन शकील को भी आरोपी बनाया है। दिल्ली पुलिस ने अंडरवर्ल्ड की भूमिका को देखते हुए क्रिकेटर श्रीशांत सहित 24 आरोपियों पर मकोका (महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम) के तहत भी मामला दर्ज कर लिया है। इससे आरोपियों को लंबे समय तक शायद ही राहत मिल पाए? जबकि, मुंबई पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए गुरुनाथ मयप्पन और विंदु दारा सिंह को एक अदालत ने जमानत की मंजूरी दे दी है। जाहिर है कि इस राहत के बाद ये लोग आजाद होकर घूमेंगे।
जगमोहन डालमिया ने दावा किया है कि वे भारतीय क्रिकेट की विश्वसनीयता को बहाल करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा देंगे। यह उनकी पहली प्राथमिकता भी है। उन्होंने यह स्वीकार किया है कि स्पॉट फिक्सिंग के ताजा बवाल से भारतीय क्रिकेट की छवि को बहुत नुकसान हुआ है। इसकी मरम्मत के लिए वे दूसरे पदाधिकारियों के सहयोग से एक कार्य योजना तैयार करने में लगे हैं। लेकिन, रणनीति की हर जानकारी मीडिया को देना वे मुनासिब नहीं समझ रहे हैं।
दरअसल, आईपीएल मैचों के बाद होने वाली रंगीन पार्टियां भी विवादों में रही हैं। इन पार्टियों में चीयर्स लीडर्स की भागीदारी पर भी तमाम आक्षेप लगते रहे हैं। आईपीएल मैचों को ज्यादा मनोरंजक बनाने के लिए सुंदर लड़कियों को चीयर्स लीडर्स के रूप में तैनात किया जाता है। कई बार ये लड़कियां उत्साहवर्धन के नाम पर ज्यादा धींगामुश्ती कर जाती हैं। इससे अश्लीलता बेचने का भी आरोप लगता रहा है। जदयू के प्रमुख शरद यादव जैसे नेता तो लंबे समय से मांग करते आए हैं कि आईपीएल क्रिकेट को ही प्रतिबंधित कर दिया जाए। क्योंकि, इसमें कई तरह का भोंडापन हो रहा है। चीयर्स लीडर्स और रंगीन पार्टियों के बारे में क्या बीसीसीआई प्रबंधन कोई फैसला लेगा? इस पर डालमिया कह रहे हैं कि वे हर फैसला सोच समझ कर लेंगे। किसी बाहरी दबाव में वे काम करने वाले शख्स नहीं हैं।
आईपीएल के पूर्व कमिश्नर ललित मोदी खासे विवादित रहे हैं। लेकिन, उन्होंने ही आईपीएल मैचों का पूरा भव्य तमाशा खड़ा किया था। वे खुलकर कह रहे हैं कि डालमिया खुद सवालों के घेरे में रहे हैं। ऐसे में, वे क्रिकेट की गंदगी कैसे दूर करेंगे? उन्होंने तो चेन्नई की बीसीसीआई की आपात बैठक को ही एक धोखा और मजाक करार किया है।
लेखक वीरेंद्र सेंगर डीएलए (दिल्ली) के संपादक हैं। इनसे संपर्क [email protected] के जरिए किया जा सकता है।






