महोदय/महोदया, मैं उत्तराखण्ड राज्य की सरकार के सभी सम्मानित उच्च प्रशासनिक अधिकारियों, देहरादून पुलिस के उच्च अधिकारीगण, राज्य की आम जनता व आम जनता के प्रति जबाबदेह सरकारी प्रतिनिधियों के रूप में बैठे मंत्रीगणों का ध्यान प्रजातंत्र के सबसे सशक्त आधारस्तंभ मीडिया के माध्यम से देहरादून में एक असामाजिक तत्व व अपराधी श्रीमती रेनू डी सिंह द्वारा अवैध एवं अपंजीकृत संस्था ‘समाधान’ की आड़ मे चलायी जा रही गैरकानूनी गतिविधियों की ओर आकर्षित कर रहा हूँI
श्रीमती रेनू डी सिंह देहरादून की आम जनता के समक्ष अपने आपको देहरादून की एक वरिष्ठ वकील/एडवोकेट के तौर पर पेश करती हैं, जो सरासर गलत व बेबुनियाद हैI उत्तराखण्ड बार कौंसिल व बार एसोसिएशन देहरादून, उत्तराखण्ड द्वारा लिखित में सूचित किया गया है कि रेनू डी सिंह नाम की कोई भी नामांकित अधिवक्ता नहीं हैंI मेरी स्वयं एक अधिवक्ता होने के नाते उत्तराखण्ड बार कौंसिल व बार एसोसिएशन, देहरादून में बैठे सम्मानित पदाधिकारियों व वरिष्ठ अधिवक्ताओं से व्यक्तिगत प्रश्न है कि अधिवक्ताओं की सम्मानित बिरादरी की शान में लगे इस काले-धब्बे व् अपराधी-तत्व को जड़ से उखाड़ फ़ेक कर कानूनी कार्यवाही क्यों नहीं की गयी व श्रीमती रेनू डी सिंह को एक अधिवक्ता के रूप मे देहरादून की अदालतों मे कानूनी प्रक्रिया को भुगत रही आम जनता की भावनाओ से खेलने का अधिकार किसने दे दिया हैI
कार्यालय उप-निबंधक, फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स, देहरादून, उत्तराखंड द्वारा सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत सूचित किया गया कि ‘समाधान’ पता 256, कृष्णा विहार जाखन, राजपुर रोड, देहरादून के पते पर कोई संस्था पंजीकृत नहीं है व कार्यालय उप-निबंधक, फर्म्स सोसायटीज एवं चिट्स, लखनऊ, उत्तर प्रदेश द्वारा भी सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 के अंतर्गत सूचित किया गया कि ‘समाधान’ पता 256, कृष्णा विहार जाखन, राजपुर रोड, देहरादून के पते पर कोई संस्था पंजीकृत नहीं हैI अगर संस्था ‘समाधान’ कार्यालय उप-निबंधक, फर्म्स, सोसायटीज एवं चिट्स, देहरादून व लखनऊ द्वारा पंजीकृत नहीं है तो संस्था ‘समाधान’ किस हैसियत से देहरादून में अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम दे रही है और निबंधक, फर्म्स, सोसायटीज व चिट्स कार्यालय देहरादून अपनी आँखों पर काली पट्टी बांधें क्यों बैठा हैI देहरादून की आम जनता देहरादून प्रशासन से पूछ रही है कि संस्था ‘समाधान’ इसकी संचालिका श्रीमती रेनू डी सिंह को गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए अभी तक खुला क्यों छोड़ा हुआ हैI
घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण अधिनियम 2005 की धारा 10 (1) के अंतर्गत अनिवार्य है कि सोसायटी रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 या कंपनी एक्ट, 1956 के अंतर्गत रजिस्टर्ड स्वैच्छिक संस्था को ही घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण अधिनियम 2005 के अंतर्गत “सेवा प्रदाता“ के रूप मे अधिकृत/नामित किया जाता हैI श्रीमती रेनू डी सिंह की उत्तराखण्ड शासन व देहरादून पुलिस के उच्च पदों पर आसीन अधिकरियों से मिली-भगत व सांठ-गाँठ से चलाई जा रही अपंजीकृत संस्था ‘समाधान’ को उत्तराखण्ड सरकार के महत्वपूर्ण महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग ने घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण अधिनियम 2005 धारा 10 (1) के अनिवार्य नियम/कानून को दरकिनार करते हुए अधिनियम के अंतर्गत “सेवा प्रदाता” के रूप मे अधिकृत/नामित कर दियाI घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण 2005 के अंतर्गत ”सेवा प्रदाता“ के रूप मे गैरकानूनी नामित/अधिकृत होने का अवैध लाभ लेते हुए श्रीमती रेनू डी सिंह ने अपनी अपंजीकृत व अवैध संस्था / NGO ‘समाधान’ को पथभ्रमित औरतों व लड़कियों का गैरकानूनी “आश्रय-घर” के रूप मे स्थापित कर दिया जो कि गैरकानूनी है व महिला का संरक्षण अधिनियम 2005 के प्रावधानों का खुल्ला उलंघन हैI
उत्तराखण्ड सरकार के महिला सशक्तिकरण व बाल विकास विभाग व इसके अधीनस्थ आई0 सी0 डी0 एस0 निदेशालय व जिला कार्यक्रम अधिकारी, देहरादून मे पदासीन अधिकारी गणों से मीडिया के माध्यम से पूँछना चाहूँगा कि उन्होंने ‘घरेलू हिंसा से महिला का संरक्षण अधिनियम 2005 ‘के किन नियमों के आधार पर ‘समाधान’ को ‘सेवा प्रदाता’ के रूप में नामित/अधिकृत कर समाज के गणमान्य व प्रतिष्ठित लोगों के खिलाफ झूठी व बेबुनियाद शिकायत दर्ज करवा जबरन धन वसूलने का सरकारी लाइसेंस दे दियाI अगर महिला सशक्तिकरण व बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार ने किसी कारणवश ‘सेवा प्रदाता’ के रूप में नामित/अधिकृत कर दिया है तो उसे तुरंत प्रभाव से बंद करवा देहरादून की आम जनता को ‘समाधान’ व् श्रीमती रेनू डी सिंह द्वारा किये जा रहे लगातार शोषण से राहत दिलवाए I मुझे यह भी सूचित किया गया है कि आज तक आई0 सी0 डी0 एस0 निदेशालय व जिला कार्यक्रम अधिकारी, देहरादून द्वारा आज तक श्रीमती रेनू डी सिंह या इनकी फर्जी संस्था से किसी प्रकार कि कोई सेवा आज तक प्राप्त नहीं कि गई है I मुझे यह बताया जाए कि आज तक जो भी झूटे मुक़दमे या झूटी लोक प्रसिधी के लिए जो कार्य इसके द्वारा किये गए हैं वह किस अधिकार के अंतर्गत किया गए हैं I
दिनाँक 22.09.2012 को राजपुर थाना पुलिस, देहरादून के साथ मिल सामाजिक व नैतिक हद की प्रत्येक सीमा पार कर अवैध व अपंजीकृत संस्था “समाधान” की संचालिका श्रीमती रेनू डी सिंह ने अपने अपराधी साथियो श्रीमती नंदिनी शर्मा, कुमारी सीमा चौधरी, श्री मनु उपाध्याय, कुमार प्रसेनजित सरकार, संजीव सरकार व अन्य अपराधियों के साथ मिलकर एसिड अटैक का स्वरचित ड्रामा रच मेरे खिलाफ झूठा मुकदमा नंबर 102/12 U/s 326/506 IPC PS राजपुर दर्ज करवा दियाI मेरे द्वारा व्यक्तिगत तौर पर एकत्र किये गए तथ्य/साक्ष्य व थाना राजपुर पुलिस द्वारा की गयी मुक़दमे की जाँच/विवेचना से ज्ञात हुआ कि श्रीमती रेनू डी सिंह ने स्वयं अपने ही एक अपराधी साथी श्री मनु उपाध्याय द्वारा दिल्ली के कश्मीरी गेट बस अड्डे के एक PCO से मेरा नाम लेकर धमकी-भरी कॉल करवायी और श्रीमती नंदिनी शर्मा व कुमारी सीमा चौधरी ने स्वयं ही एसिड अटैक का ड्रामा रच दियाI मैंने वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (देहरादून) को दिनाँक 22.09.2012 को वारदात के समय के आस-पास की कंप्यूटर पर तैयार गूगल मानचित्र पर श्रीमती रेनू डी सिंह, कुमारी सीमा चौधरी व श्री मनु उपाध्याय के दिए गए मोबाइल फोन नंबर से की गयी कॉल व SMS के समय उनकी लोकेशन, स्थान व एक दूसरे के दरम्यान उनकी दूरियाँ मानचित्र पर चिन्हित कर मुक़दमे की तफ्तीश/विवेचना मे मदद के लिए भेजी ताकि देहरादून के राजपुर थाने की पुलिस एसिड अटैक के असल मुलजिमान को गिरफ्तार कर सकेI
समय-समय पर मेरे द्वारा दिए गए तथ्य/साक्ष्य व राजपुर पुलिस द्वारा की गयी विवेचना से श्रीमती रेनू डी सिंह व उसके अन्य अपराधी साथियों श्रीमती नंदिनी शर्मा, कुमारी सीमा चौधरी, श्री मनु उपाध्याय, कुमार प्रसेनजित सरकार, संजीव सरकार समेत एसिड अटैक मुक़दमे मे फंसता देख देहरादून पुलिस के साथ मिलकर रेनू डी सिंह ने मुक़दमे मे F.R. लगवा मुक़दमे की विवेचना को बंद करवा दियाI ऐसा प्रतीत होता है कि देहरादून पुलिस के लिए श्रीमती रेनू डी सिंह द्वारा उद्घोषित कानून भारतीय संविधान व भारत की माननीय संसद द्वारा पारित कानून भारतीय दंड संहिता (IPC) व दंड प्रक्रिया संहिता (Cr.P.C.) पर भारी हैI मैं मीडिया के माध्यम से देहरादून की राजपुर थाने की पुलिस से एसिड अटैक के मुक़दमे के विषय मे पूँछना चाहता हूँ कि मुक़दमे के असल मुलजिमान श्रीमती रेनू डी सिंह, श्रीमती नंदिनी शर्मा, कुमारी सीमा चौधरी, श्री मनु उपाध्याय व कुमार प्रसनजीत सरकार को पर्याप्त सबूत होने के बावजूद भी गिरफ्तार क्यों नहीं किया गयाI श्रीमती रेनू डी सिंह के उत्तराखण्ड व देहरादून के उच्च पदों पर आसीन अधिकारीगणों से सम्बन्ध कानून से ऊपर है या देहरादून पुलिस इतनी साहसी व निर्भीक नहीं है कि वह अपने सांविधिक दायित्व का निर्वाह सुचारू रूप से कर सके तो उन्हें अपने पदों पर रहने का कोई अधिकार नहीं हैI
विश्व के विशालतम प्रजातान्त्रिक देश भारत की केन्द्र व प्रत्येक राज्य की लोकतान्त्रिक सरकार और इनके अधीनस्थ सभी सरकारी विभाग सर्वोच्च भारतीय संविधान की उच्च गरिमा को बनाये रखते हुए सामाजिक हित को सर्वोपरि मानते हुए भारतीय संविधान के अनुसार ही अपने कार्य करते हैंI देश की राजधानी नई दिल्ली मे स्थित एक सवैधानिक संस्था “राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग“ के माननीय सदस्य सचिव श्री लव वर्मा IAS द्वारा अपंजीकृत NGO “समाधान” 256, कृष्णा विहार जाखन, राजपुर रोड, देहरादून, उत्तराखण्ड को तुरंत बंद कराये जाने के सन्दर्भ में सचिव, महिला एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड सरकार, देहरादून व जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट, देहरादून, उत्तराखण्ड को पत्र संख्या UK-17018/29821/2010-11/Comp. दिनाँक 13.06.2012 व उचित कार्यवाही न होने पर समय-समय पर कई अनु-स्मारक भी भेजे गयेI सवैधानिक संस्था “राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग” द्वारा निर्देश जारी होने के बावजूद, उत्तराखण्ड और विशेषकर देहरादून में जब मामला श्रीमती रेनू डी सिंह और उसकी अवैध व अपंजीकृत संस्था “समाधान” से सम्बंधित हो तो उत्तराखण्ड व देहरादून की नौकरशाही मे हिम्मत नहीं है कि वह रेनू डी सिंह व उसकी अवैध NGO “समाधान” को बंद करा सकेI
भारतीय संविधान के अनुसार भारत सरकार, उत्तराखण्ड शासन व देहरादून पुलिस प्रशासन के अधिकारियों की अपने साविधिक दायित्व को पूर्ण करने हेतु कर्तव्य निभाने की एक परिधि होती है और उत्तराखण्ड शासनिक व देहरादून पुलिस प्रशासनिक अधिकारियो की कार्यशैली देख प्रतीत होता है कि श्रीमती रेनू डी सिंह व उसके द्वारा संचालित अवैध व अपंजीकृत संस्था ‘समाधान’ उनकी सवैधानिक व्यवस्था की परिधि से बाहर हैI उत्तराखण्ड सरकार मे सरकारी पदों को सुशोभित कर रहे महिला सशक्तिकरण एवं बाल विकास विभाग, उत्तराखण्ड के अधिकारीगणों व जिला कलेक्टर/मजिस्ट्रेट, देहरादून से मैं मीडिया के माध्यम से पूछना चाहूँगा कि भारत सरकार कि सवैधानिक संस्था “राष्ट्रीय बालक अधिकार संरक्षण आयोग” नई दिल्ली से बड़ी और कौन सी सरकारी एजेन्सी के दिशा-निर्देशों का इंतज़ार है और ये अवैध संस्था ‘समाधान’ अभी तक बंद क्यों नहीं करवायी गयीI मुझे यह भी बतलाया जाए कि इस पत्र के सन्दर्भ में SI ममता गोला ने वरिष्ट पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखा कि "उक्त प्रकरण उच्चस्तरीय प्रकरण हैI अतः उक्त प्रार्थना पत्र की कार्यवाही उच्चस्तर से होना ही न्यायोचित प्रतीत होता है "मेरे लिए यह समझ पाना बहुत मुश्किल है कि रेनू डी सिंह जैसी औरत के खिलाफ कार्यवाही करना पुलिस द्वारा इसे उच्चस्तरीय मामला बताने के पीछे क्या कारण हैI
मेरे द्वारा पुलिस को मुकदमा नंबर 102/12 दिनांक 22.09.2012 U/s 326/506 IPC के सन्दर्भ में भेजे गए पत्र दिनांक 23.09.12, 30.09.12, 06.10.12, 15.10.12, 21.11.12, 22.11.12, 23.11.12, 05.12.12, 07.12.12, 08.12.12, 12.12.12, 18.12.12, 24.12.12, 14.01.13, 08.02.13, 19.02.13, 21.02.13, 28.02.13, 01.03.13 व 07.03.13 पर क्या कार्रवाई की गई बतलाया जायेI मैं आपके सन्दर्भ के लिए एक पत्र दिनांक 28.02.2013 संलग्न कर रहा हूँI
थाना राजपुर पुलिस ने दिनांक 03.12.12. को मनु उपाध्याय को पकड़ने के लिए उसके घर गाजियाबाद में सुबह चार बजे दबिश डाली थी लेकिन वह पुलिस को वहाँ नहीं मिला था और उस समय वह देहरादून में रेनू डी सिंह के घर में सो रहा थाI पुलिस ने मनु उपाध्याय को दो बार विवेचना में शामिल होने के लिए नोटिस दिया लेकिन वह विवेचना में शामिल नहीं हुआI पुलिस ने दिनांक 02.04.13 को FR लगा दीI मुझे यह बतलाया जाए कि पुलिस द्वारा सुबह चार बजे दबिश डालने व दो बार नोटिस देना का क्या अर्थ हुआ अगर मनु उपाध्याय को बैगर विवेचना में शामिल किये ही FR लगानी थीI पुलिस के पास प्रयाप्त सबूत हैं कि यह एसिड अटैक का मुकदमा मुझे फ़ंसाने की दृष्टि से स्वरचित किया गयाI पुलिस को क्या डर है कि वह अपने कानूनी व संवैधानिक कर्त्तव्य को नहीं निभा रही है और रेनू डी सिंह, नंदिनी शर्मा, सीमा चौधरी, मनु उपाध्याय, कुमार प्रसेनजित सरकार व इनके अन्य साथियों को गिरफ्तार नहीं कर रही हैI
मुझे सुचना मिली थी कि पुलिस के कुछ बड़े अधिकारी रेनू डी सिंह के यहाँ गैर वक्त पर जाते हैं व गैर वक्त पर यानी देर रात में संपर्क साधते हैं जिसकी शिकायत मैने की थी, लेकिन आज तक इस पर कोई कार्यवाही नहीं की गईI रेनू डी सिंह कि कॉल डिटेल्स निकलकर इसकी जांच क्यों नहीं की गईI इन अधिकारियों के नाम उजागर किये जाएँ व इनके खिलाफ उचित कानूनी व विभागीय कार्यवाही की जाएI मुझे यह भी मालूम चला था कि एसिड अटैक का यह झूटा मुकदमा किसी बड़े पुलिस अधिकारी के मार्गदर्शन में हुआ था। मैंने इसकी भी शिकायत की थी, घटना के दो दिन पहले, घटना वाले दिन व घटना के दो दिन बाद की सभी सम्बंधित लोगों की कॉल डिटेल्स निकलकर जांच क्यों नहीं की गईI
मुकदमा नंबर 24/2011 U/s 385/376/511 IPC थाना राजपुर में रेनू डी सिंह की एक साथी शिखा शर्मा द्वारा किसी भले इंसान के खिलाफ दर्ज कराया गया था जो विवेचना के पश्चात पाया गया कि यह मुकदमा झूठा है और आपकी पुलिस ने उसमे FR No.01/2012 लगा दीI इसी शिखा शर्मा व सीमा चौधरी ने मेरे खिलाफ भी झूठी शिकायतें की हैं जो इनके चरित्र को दर्शाती हैंI मेरा जाती मानना है कि ऐसी पथभ्रष्ट औरतों का निरंतर लोगों के खिलाफ झूठी शिकायतें करने का हौसला इसीलिए बना रहता है क्योंकि ये काफी मामलों में अपने पैसा ऐंठने के मकसद में कामयाब हो जाती हैं और किसी कारणवश अपने पैसा ऐंठने के गलत मंसूबों में असफल होती हैं तो ये औरतें देहरादून पुलिस की मिली-भगत से झूठी शिकायतें कराकर झूठे मुक़दमे भी दर्ज करवा देती हैं, लेकिन इनके खिलाफ कोई भी कार्यवाही नहीं होतीI मैंने इस विषय में पुलिस से शिकायत की थी, मुझे बताया जाये कि पुलिस ने इनके खिलाफ क्या कार्यवाही करीI
श्रीमती रेनू डी सिंह ने अपने पत्र दिनांक 22.12.2008 जो कि उपाध्यक्ष MDDA को संबोधित है में लिखा है "मेरी मासिक आय गरीब बच्चों को ट्यूशन पढाने व पूजा पाठ यज्ञ इत्यादि करके हर माह 10 से 12 हजार रुपये तक ही होती है, पति अस्वस्थ हैं (हार्ट अटैक) बेरोजगार हैंI " (पत्र आपके संधर्भ के लिए संलग्न है). मैं आपके माध्यम से यह जानना चाहता हूँ कि जिस औरत की महीने की आमदनी मात्र दस हजार रुपये है और जो यह स्वयं घोषित कर चुकी है कि वह सरकार से या किसी संस्था व व्यक्ति से किसी प्रकार कि आर्थिक मदद नहीं लेती है तो वह अपने यहाँ पर गैरकानूनी तरीके से किस प्रकार से 10-12 लड़कियों/महिलाओं व अन्य लडकों को कैसे रख पा रही है व उसका मकसद क्या हैI मैं यहाँ संक्षेप में बताना चाहूँगा कि मकसद केवल और केवल जबरन वसूली का धन्धा करना है व इन महिलाओं के माध्यम से लोगों को झूठे मुकदमों में फ़ंसाना है जिसका एक पीड़ित मैं भी हूँI मेरी सरकार से प्रार्थना है कि इस सामाजिक कैंसर को जल्द से जल्द जड़मूल समाप्त किया जाए नहीं तो न जाने यह कितनी बहुमूल्य जाने व परिवारों को बर्बाद कर देगीI
मैं आप के संज्ञान में यह भी लाना चाहता हूँ कि श्रीमती रेनू डी सिंह अपने आपको बहुत जगह पर रेनू सरकार भी के रूप में भी प्रगट करती हैI इसी प्रकार से इसका पति (?) ने भी महिला सशक्तिकरण व बाल विकास विभाग में स्वयं को संजीव सिंह के रूप में घोषित किया हैI मेरी समझ से परे है कि कोई व्यक्ति कैसे अपने आपको दो दो नामों के साथ अलग अलग स्थानों पर इस्तेमाल कर रहा हैI यह अलग अलग स्थानों पर दस्तखत भी कभी रेनू डी सिंह व कभी रेनू सरकार करती हैI मुझे यह संदेह है कि किसी अपराधिक साजिश के तहत यह किया जा रहा है, इसकी जांच की जाएI
मैं उत्तराखण्ड राज्य के शासनिक अधिकारियों व देहरादून पुलिस अधिकारियों से उम्मीद करता हूँ कि वे अपने सवैधानिक कर्तव्यों / अधिकारों को समझते हुए उत्तराखण्ड व देहरादून समाज में श्रीमती रेनू डी सिंह व उसकी अवैध NGO ‘समाधान’ के रूप में पनप रहे पाप व समाज मे फैली अराजकता का जड़ से उन्मूलन कर समाज को सुव्यवस्थित ढंग से चला देहरादून की आम जनता को स्वच्छंद व उन्मुक्त जीवन जीने का वातावरण देI
विजय आनंद शर्मा
अधिवक्ता





