चर्चित बिजनेस मैग्जीन 'फोर्ब्स इंडिया' से इसके संपादक इंद्रजीत गुप्ता समेत चार एडिटोरियल हेड को हटा दिया गया. ये जो बाकी तीन हैं, उनके नाम हैं- डायरेक्टर फोटोग्राफी दिनेश कृष्णन, एक्जीक्यूटिव एडिटर शिशिर प्रसाद और मैनेजिंग एडिटर चार्ल्स अस्सीसी. फोर्ब्स मैग्जीन का संचालन नेटवर्क18 ग्रुप करता है जिसके मुखिया राघव बहल हैं. नेटवर्क18 के ही वेंचर हैं सीएनएन-आईबीएन, आईबीएन7, फर्स्ट पोस्ट, सीएनबीसी टीवी18, सीएनबीसी आवाज आदि. सूत्रों के मुताबिक सभी के सामने इस्तीफे की स्थिति क्रिएट की गई और बेइज्जत करके निकाला गया.
ये चारों 'फोर्ब्स इंडिया' मैग्जीन के लांचिंग टीम के अगुवा रहे हैं. दुनिया की चर्चित बिजनेस मैग्जीन 'फोर्ब्स' की फ्रेंचाइजी है 'फोर्ब्स इंडिया'. मैग्जीन के संपादक इंद्रजीत गुप्ता समेत चार शीर्ष पत्रकारों को यूं निकाले जाने की चर्चा तेजी से फैल चुकी है. वहीं, कंपनी इसे 'रुटीन एक्जिट' बताकर छोटे-मोटे मामले की तरह पेश कर रही है.
नेटवर्क18 के चीफ आपरेटिंग आफिसर अजय चाको का कहना है कि रिस्ट्रक्चरिंग की प्रक्रिया के तहत यह सब हुआ है. फर्स्ट पोस्ट के एडिटर आर. जगन्नाथन को मार्च में ही कह दिया गया था कि वे प्रिंट यानि फोर्ब्स इंडिया के काम को भी देखेंगे. फर्स्ट पोस्ट वेबसाइट और फोर्ब्स इंडिया के कामकाज को रिस्ट्रक्चर किया जा रहा है. वेब और मैग्जीन के लोग एक साथ बैठने लगे हैं और ये लोग जगन्नाथन को रिपोर्ट कर रहे हैं. उसी के चलते इन लोगों ने इस्तीफा दिया.
उधर, फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन से जुड़े लोगों का कहना है कि चार साल पहले इंद्रजीत गुप्ता समेत चार लोगों ने जब फोर्ब्स इंडिया मैग्जीन ज्वाइन किया था तो इन लोगों से प्रबंधन ने 'इंप्लाई स्टाक आप्शन' (ESOPs) के लिए वादा किया था. ये चार एचआर डिपार्टमेंट को उसी वादे के बारे में बता रहे थे. चारों के लिए 'इंप्लाई स्टाक आप्शन' की रकम दो करोड़ से लेकर पांच करोड़ के आसपास बैठती है. इन चारों पत्रकारों ने डेढ़ महीने पहले अपना ESOPs कैश कराने की प्रक्रिया शुरू की.
24 मई को जब ये लोग एचआर से मिलने गए तो इन लोगों से कहा गया कि पुराने ESOPs स्कीम को ये लोग भूल जाएं और नए ESOPs स्कीम को अपनाएं. इन लोगों को ऐसा करने के लिए 48 घंटे का वक्त दिया गया. 27 मई को एचआर हेड शंपा कोचर ने फर्स्ट पोस्ट के एडिटर इन चीफ जगन्नाथन की मौजूदगी में इन चारों से कहा कि तुरंत नए प्लान को स्वीकारने के कागज पर दस्तखत करें या फिर इस्तीफा दें अन्यथा टर्मिनेट कर दिया जाएगा.
इस तरह इन चार वरिष्ठ पत्रकारों को बेइज्जत करके फोर्ब्स इंडिया से निकाल दिया गया. उसी फोर्ब्स इंडिया से जिसे इन लोगों ने अपनी अगुवाई में लांच कराया था और चार साल से ज्यादा समय से इससे जुड़े हुए थे. यहां बताना जरूरी है कि नेटवर्क18 में बड़ी हिस्सेदारी मुकेश अंबानी की है और अंबानी की तरफ से राघव बहल पूरे बिजनेस को रन करते हैं. मतलब कि इतने बड़े मीडिया हाउस में पत्रकारों के साथ ऐसा सलूक किया जा रहा है तो सोचा जा सकता है कि यह ग्रुप मीडिया व संपादकीय के मूल सिद्धांतों के प्रति कितना अगंभीर और असंवेदनशील है.





