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राजुल जी, अमर उजाला को अरुण पाराशरियों से बचाइए

अमर उजाला में हरामखोर और बेइमानों की आवक बढ़ गई है. उदाहरण के तौर पर मैं शाहजहांपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात अरुण पाराशरी का ही नाम लेना चाहूंगा, क्योंकि अरुण पाराशरी के ईमान बेचने के इतने किस्से हैं कि पूरा एक ग्रंथ लिखा जा सकता है। पत्रकारिता के नाम पर बहुत से लोग छोटा-मोटा लाभ लेते रहते हैं और लेते भी रहेंगे, पर यह अरुण पाराशरी ऐसे-ऐसे हथकंडों से लोगों की जेब से रुपये निकालता है कि ऊपर बैठे लोग कल्पना तक नहीं कर सकते। सैकड़ों घटनायें हैं, पर मैं यहां दो घटनाओं का जिक्र करना चाहूंगा।

अमर उजाला में हरामखोर और बेइमानों की आवक बढ़ गई है. उदाहरण के तौर पर मैं शाहजहांपुर में ब्यूरो चीफ के पद पर तैनात अरुण पाराशरी का ही नाम लेना चाहूंगा, क्योंकि अरुण पाराशरी के ईमान बेचने के इतने किस्से हैं कि पूरा एक ग्रंथ लिखा जा सकता है। पत्रकारिता के नाम पर बहुत से लोग छोटा-मोटा लाभ लेते रहते हैं और लेते भी रहेंगे, पर यह अरुण पाराशरी ऐसे-ऐसे हथकंडों से लोगों की जेब से रुपये निकालता है कि ऊपर बैठे लोग कल्पना तक नहीं कर सकते। सैकड़ों घटनायें हैं, पर मैं यहां दो घटनाओं का जिक्र करना चाहूंगा।

शाहजहांपुर में तब कांग्रेस के दिग्गज नेता जितेन्द्र प्रसाद जीवित थे, उस समय पाराशरी दैनिक जागरण का ब्यूरो चीफ था। जितेन्द्र प्रसाद बड़े नेता थे, सो उन्होंने इसे रुपये नहीं दिये, जिससे यह उनकी खबरों को अपेक्षा के अनुरूप नहीं छाप रहा था, पर वह बर्दाश्त करते रहे। लेकिन हद तो तब हो गयी, जब सोनिया गांधी की विशाल जनसभा के प्रथम पेज पर छपे फोटो से बाबा जितेन्द्र प्रसाद का फोटो जानबूझ कर काट दिया गया। इस हरकत पर बाबा जितेन्द्र प्रसाद दंग रह गये और बहुत परेशान हुए तो उन्होंने अरुण पाराशरी की नीयत और हरकत के बारे में सीधे कानपुर बता दिया। कानपुर से अरुण पाराशरी को संस्थान से बाहर करने का मौखिक आदेश आया, पर उस समय के महाप्रबंधक चन्द्रकांत त्रिपाठी ने अरुण पाराशरी को बरेली कार्यालय में डेस्क पर रख लिया। लगभग एक साल तक अरुण पाराशरी चुपचाप डेस्क पर ही लगा रहा और सेटिंग कर पिछले विधानसभा चुनाव से पहले बदायूं का ब्यूरो चीफ बन गया। चुनाव में इसने क्या-क्या किया होगा? यह अंदाजा सहजता से ही लगाया जा सकता है।

सहसवान विधानसभा क्षेत्र के सपा नेता लड्डन मियां ने रोजा अफ्तार पार्टी का आयोजन किया, जिसमें सपा मुखिया मुलायम सिंह यादव ने भी शिरकत की। पार्टी में अरुण पाराशरी खुद गया और वहां जाकर तीन सपा नेताओं में मुलायम सिंह यादव के साथ फोटो छापने का कंपटीशन करा दिया। दो नेता दस हजार से ऊपर नहीं बढ़े। तीसरे नेता से पच्चीस हजार रुपये वसूले और मुलायम सिंह यादव का उसके साथ वाला फोटो प्रथम पेज पर प्रकाशित करा दिया। इस तरह एक बार राजकीय इंटर कॉलेज के ग्राउंड में पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह के साथ फोटो छापने का भी इसने पांच लोगों के बीच कंपटीशन कराया और जिसने सबसे अधिक दिये, उसका छाप दिया। इन घटनाओं का उल्लेख इसलिए किया कि इस तरह से पैसे कमाने का लोगों के मन में ख्याल तक नहीं आता होगा, क्योंकि ऐसे फंडे
और किसी के दिमाग में आ ही नहीं सकते।

इसी तरह इस अरुण पाराशरी ने बदायूं के व्यापारी नेताओं को अलग-अलग काम दे रखे थे। कोई बच्चों की फीस भरता था, कोई फोन रिचार्ज कराता था, तो कोई पेट्रोल देता था, पर समाजवादी पार्टी से संबद्ध एक व्यापारी संगठन के नेता ने यह सब करने से मना कर दिया, तो उसकी खबरों पर ब्रेक लगा दिया। इस पर व्यापारी नेता ने कानपुर लिखित शिकायत की। जांच के बाद अरुण पाराशरी को फिर हटाने का आदेश आया, पर महाप्रबंधक चन्द्रकांत त्रिपाठी ने फिर बरेली अटैच कर लिया। इस बीच इसने कई बार अमर उजाला जाने का भी प्रयास किया, पर उस समय शशि शेखर के कारण इसे ब्लैक लिस्टेड कर दिया गया था। कुछ महीनों के बाद दैनिक जागरण शाहजहांपुर का पुन: ब्यूरो चीफ बना दिया गया, क्योंकि बाबा जितेन्द्र प्रसाद स्वर्ग सिधार चुके थे। इस दौरान हिंदुस्तान लांच हुआ। पत्रकारों की कमी के कारण हिंदुस्तान अखबार में प्रशिक्षु भी बड़े-बड़े पद पा गये।

इसने भी आवेदन किया था, पर शशि शेखर के कारण इसे इंटरव्यू तक के लिए नहीं बुलाया गया, लेकिन शशि शेखर के अमर उजाला से हिंदुस्तान चले जाने के कारण यह अमर उजाला ज्वाइन करने में सफल हो गया, जहां अब पूरी मनमानी कर रहा है। पत्रकारिता का दुरुपयोग करने के कारण ही कथित स्वामी चिन्मयानंद के लॉ कॉलेज की प्रबंध समिति में कार्यकारिणी सदस्य है। उनसे तमाम तरह के अन्य लाभ भी लेता रहता है, साथ ही इसकी अधिकांश शामें मुमुक्षु आश्रम में ही लॉ कॉलेज के प्रधानाचार्य अवनीश मिश्रा के साथ गुजरती हैं, वह कर्ज उतारने के लिए ही कथित स्वामी चिन्मयानंद को महान संत घोषित करने के लिए आतुर है।

अंत में एक दिलचस्प बात। आरसी नाम की कोई शराब होती है, जिसकी एक बोतल प्रतिदिन के हिसाब से माफिया के यहां से इसके लिए आरक्षित है। माफिया के खुले निर्देश हैं कि अरुण पाराशरी उसके किसी भी ठेके से बोतल ले सकता है। मजे की बात यह है कि यह प्रतिदिन बोतल लेता है और घर जमा करता रहता है, क्योंकि अन्य पिलाने वाले एक दिन पहले से ही दावत तैयार रखते हैं, इसलिए महीने में मिलने वाली तीस बोतलों में से मुश्किल से एक-दो ही खुलती है। सील बंद बोतलें कुछ कमीशन काट कर सेटिंग वाले ठेकेदार को देकर पैसे मंगा लेता है। यह तो कुछ भी नहीं है, इसका चरित्र चित्रण बाद में अच्छे से करूंगा। फिलहाल निदेशक श्री राजुल माहेश्वरी जी और स्थानीय संपादक श्री प्रभात कुमार सिंह से यह निवेदन है कि अमर उजाला को अरुण पाराशरियों से बचा लो, ताकि अमर उजाला के प्रति पाठकों का विश्वास बना रहे। वैसे अरुण पाराशरी की छवि जांचने के लिए जनता में आप गोपनीय जांच भी करा सकते हैं।

बीपी गौतम

स्वतंत्र पत्रकार
बदायूं

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