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बनारस के एसएसपी अजय मिश्रा ने धाराएं भी उस गरीब पर ऐसी लगायीं कि जैसे वो कोई दंगाई हो

बनारस में आसिफ को जमानत मिलने के साथ ही एसएसपी अजय कुमार मिश्रा की तानाशाही को तमाचा भी पड़ गया। निमेष राय और अमित सिंह के अलावा सभी पत्रकार खुश हैं।  दरअसल, लाशों पर सट्टा खबर को बनाने वाले काशीनाथ शुक्‍ला थे। आसिफ उसके साथ महज मजदूर की तरह कैमरा चलाने गया था। आसिफ बेहद गरीब है और काशीनाथ का कैमरा ढोया करता था।

बनारस में आसिफ को जमानत मिलने के साथ ही एसएसपी अजय कुमार मिश्रा की तानाशाही को तमाचा भी पड़ गया। निमेष राय और अमित सिंह के अलावा सभी पत्रकार खुश हैं।  दरअसल, लाशों पर सट्टा खबर को बनाने वाले काशीनाथ शुक्‍ला थे। आसिफ उसके साथ महज मजदूर की तरह कैमरा चलाने गया था। आसिफ बेहद गरीब है और काशीनाथ का कैमरा ढोया करता था।

काशीनाथ तो पूरे मामले के बाद से फरार हो गया लेकिन आसिफ कहीं नहीं भागा। पुलिस ने आसानी से उसे पकड़ लिया। बेचारा पाता तो टका नहीं था लेकिन जेल की हवा खानी पड़ गयी। एसएसपी ने धाराएं भी गरीब पर ऐसी लगायीं कि जैसे वो कोई दंगाई हो। अदालत ने भी देखा कि मामले में कुछ दम नहीं है लिहाजा उसे जमानत दे दी नहीं तो ऐसे मामलों में हाईकोर्ट तक से जमानत लेने में मुश्किल होती हैं।  

एसएसपी अजय मिश्र चाटुकारिता में राजा महाराजाओं की तरह व्‍यवहार करने लगे थे। लेकिन आसिफ की जमानत ने उनके सीख दी है कि वो राजा नहीं जनता के सेवक की तरह व्‍यवहार करें। ये खास बात है कि अजय मिश्रा लोगों को बताते हैं कि आइपीएस बनने से पहले वो खुद भी पत्रकार थे। वैसे उनकी बात पर यकीन करना मुश्किल है क्‍योंकि अगर ऐसा होता तो वो पत्रकारों के काम करने के तरीके और दबावों को जरूर समझते।

आईपीएस के भारी भरकम पद पर छोटी सोच और पूर्वाग्रह से काम कर रहे अजय मिश्रा अगर पत्रकार होते भी तो या तो चाटुकारिता में डूबकर इतिहास लिख रहे होते या फिर नौकरी की तलाश में सिर के बाल सफेद कर लेते। अजय मिश्रा अगर संवेदनशील पत्रकार रहे होते तो पूर्वाग्रह से ग्रसित होकर आसिफ को गंभीर धाराओं में बुक नहीं करते।

इसी बनारस में तमाम घटनाएं हुई जिनका ठीकरा मीडिया के सिर फोडा गया। वैसे कुछ में मीडिया का भद्दा रोल भी रहा है। आज तक उन घटनाओं में शामिल लोग जेल नहीं भेजे गये। बेचारा आसिफ जेल की हवा खा गया। कुसूर सिर्फ इतना था कि एसएसपी पर सत्‍ता का नशा छाया हुआ था और उस नशे में उसे दमनकारी कदम उठाना था। उसके नशे को और भी गहरा सहारा के ब्‍यूरो चीफ निमेष राय और जी न्‍यूज के ब्‍यूरो चीफ अमित सिंह की खुशामद ने कर दिया।

अब दूसरा पहलू देखिये एसएसपी के चाटुकार पत्रकारों का मुंह पीला पड़ गया है। निमेष राय ने भरी बैठक में कहा था कि आसिफ को जेल में ही रहना चाहिए। आसिफ बाहर आ रहा है और निमेष की मनोकामना पर तुषारापात हो गया। अमित सिंह की बात ही क्‍या करना, उन पर पूरा इलेक्‍ट्रानिक मीडिया और खुद उनके नोयडा आफिस के सहयोगी ठहाका लगाकर हंस रहे हैं। बहरहाल, ये उन लोगों की जीत है जो एसएसपी के दमनकारी कृत्‍यों का विरोध कर रहे थे साथ ही उन लोगों के मुंह पर तमाचा है जो आसिफ को जेल में ही पड़े रहने की पैरवी कर रहे थे और एसएसपी से मिलकर आसिफ की पैरवी करने वालों को जेल में डलवाने का षडयंत्र रच रहे थे।

विपिन कुमार

vipin kumar

[email protected]

जमानत आदेश की कापी


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