Ramakant Roy : जब मैं यह बात लिख रहा हूँ, उसी समूह में शामिल हो रहा हूँ. फेसबुक पर सिर्फ और सिर्फ मोदी की चर्चा है. कुछ विरोध में और कुछ प्रशस्ति गान में. यह विरोध और समर्थन का दो ध्रुव है. आप या तो उसके विरोध में हैं या उसके समर्थन में. अगर विरोध में हैं तो ऐसा नहीं कि आप सुरक्षित जोन में हैं. विरोध में होने का मतलब अनिवार्यतः कांग्रेस के पक्ष में होना है क्योंकि कांग्रेस के धुर विरोधी भी उसके विरोध के लिए एकजुट होंगे. होते रहे हैं. पक्ष में होने का मतलब है- तथाकथित फासीवाद को जन्म देना और उसका साथी होना.
दुविधाएं प्रबल हैं. एक ऐसी सरकार को पुनः चुने? जिसने बीते नौ सालों में छाती पर मूंग दला है और बेहयाई से शासन किया है. आशंका यह है कि उस शासन की ढिठाई और बढ़ेगी ही. लूट को खुली छूट मिलने का लाइसेंस होगा यह.. या ऐसी सरकार चुनें, जो फासीवाद को बढ़ावा देगी और तथाकथित सामाजिक असुरक्षा को बढ़ाएगी? हम बड़ी दुविधा में हैं.. आपके पास कोई विकल्प है? क्या किशन पटनायक की तरह कोई आकर कह सकता है कि 'विकल्पहीन नहीं है दुनिया'?
रमाकांत राय के फेसबुक वॉल से.





