कोर्ट के आदेश के बाद बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) द्वारा सहारा समूह की दो कंपनियों के निवेशकों को करीब 24 हजार करोड़ रुपये की राशि वापस करने की पिछले महीने प्रक्रिया शुरू किए जाने के बाद सेबी के रकम वापसी के लिए बड़ी भारी तादाद में निवेशकों के आवेदन जमा हो गए हैं।
सेबी के लिए इसमें सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि ज्यादातर आवेदनों में जरूरी कागजात व विवरण नहीं दिए गए हैं। ऐसे में उसके लिए इन मामलों का निस्तारण कर पाना मुमकिन नहीं हो पा रहा है। मामले से जुड़े सेबी के सूत्रों के मुताबिक ज्यादातर आवेदनों में वापसी (रिफंड) की रकम जमा कराने के लिए आवेदकों ने अपने बैंक खाते का कोई विवरण नहीं दिया है।
इसके अलावा पैन व पते के प्रमाण (एड्रेस प्रूफ) जैसे जरूरी विवरण भी रकम वापसी के ज्यादातर आवेदनों में नदारद हैं। हालांकि पैन नंबर की जानकारी केवल उन ही आवेदकों के लिए जरूरी है, जो वापसी की रकम से स्रोत से कर कटौती (टीडीएस) से बचना चाहते हैं, जबकि खाते का विवरण सभी आवेदकों के लिए जरूरी है।
केवल वास्तविक निवेशकों को ही रकम मिले यह सुनिश्चित करने के लिए सेबी ने सीधे खाते में रकम डालने का प्रावधान रखा है। इसलिए रकम वापसी के लिए निवेशक का बैंक खाता होना व उसका विवरण सेबी को दिया जाना जरूरी है। (एजेंसी)






