: दैनिक जागरण के मालिकों के लिए सोचने का वक्ता : लखनऊ : अपने को दुनिया का नम्बर एक अखबार बताने वाले दैनिक जागरण के मालिकों के लिए यह सोचने का वक्त है कि आखिर क्या वजह है कि लखनऊ में नवभारत टाइम्स में नौकरी पाने के लिए दरख्वास्त लगाने वाले दूसरे अखबार के मुकाबले सबसे ज्यादा दैनिक जागरण के लोग है।
सूत्रों के अनुसार दैनिक जागरण की अलग-अलग यूनिटों से सबसे ज्यादा 107 लोगों ने अप्लाई किया है, उसमें डीएनई स्तर तक के लोग शामिल हैं। 107 लोगों में सबसे ज्यादा लखनऊ यूनिट के हैं, इसके बाद सेंट्रल डेस्क, दिल्ली डेस्क के हैं। मेरठ, इलाहाबाद, कानपुर, गोरखपुर, पटना, जम्मू से भी आवदेकों की बड़ी संख्या है।
हालांकि डेस्क पर काम करने के लिए दैनिक जागरण से जिन लोगों ने अप्लाई किया था, उन सबके आवेदन नभाटा प्रबंधन ने इस आधार पर खारिज कर दिया है कि ये लोग जिस तरह का जागरण निकाल रहे हैं, वैसा अगर नभाटा निकालने लगे तब तो उनकी लुटिया ही डूब जाएगी। इसलिए जागरण की डेस्क पर काम करने वाले किसी भी बंदे को नभाटा में लेने के लिए विचार न करने में ही भलाई है। सूत्रों के अनुसार लखनऊ की लोकल टीम से सात रिपोर्टरों के आवेदन मिले हैं, लेकिन इनमें से अधिकांश के नामों पर नदीम ने आपत्ति दर्ज करा दी है।
सूत्रों के अनुसार भरी मीटिंग में नदीम ने इनमें से कइयों के नाम लेकर उनके व्यापारी नेताओं, इंजीनियरों, ठेकेदारों, बिल्डरों और प्रापर्टी डीलरों से कारोबारी रिश्ते होने की बात कह कर उन्हें किसी भी सूरत में नभाटा में न लेने को कहा। कुछ ऐसे थे, जिनके नाम पर कोई आपत्ति नहीं थी लेकिन वह टेस्ट में जरूरी नम्बर ही नहीं ला सके। ऐसे में दैनिक जागरण लखनऊ से सिर्फ एक जूनियर रिपोर्टर को नभाटा में लेने की सहमति बनी। इसके अलावा दैनिक जागरण के एक फोटोग्राफर का भी चयन हो गया है।
दैनिक जागरण के राज्य ब्यूरो से तीन नाम नदीम ने सुझाए थे, एक नाम पर सुधीर को आपत्ति थी और दो नामों पर नभाटा प्रबंधन ने बाजार से फीड बैक लिया तो उनके बारे में बाजार से रिपोर्ट अच्छी नहीं आई, ऐसे में उनके लिए नभाटा का दरवाजा बंद हो गया।





