बाड़मेर अपनी लोक कला और संस्कृति को जिलाए रखने के लिए कई शख्सियतें खुद को जला कर समाज को जागृत करने का प्रयास करते हैं. ऐसे ही दुस्साहसी शख्सियत हैं जैसलमेर के आनंद कुमार पुरोहित, जिन्होंने राजस्थानी भाषा के प्रति अपनी समर्पण भाव को राजस्थान के प्रथम दैनिक राजस्थानी भाषी समाचार पत्र राजस्थान 'री पाती' के रूप में समाज के बीच लाकर राजस्थानी भाषा का कर्ज चुकाने का साहसिक प्रयास किया.
पुरोहित के इस साहस को राजस्थानी भाषी प्रेमियों ने हाथों हाथ लिया. आनंद पुरोहित को बाड़मेर में अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति और राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति संसथान द्वारा राजस्थानी रत्न सम्मान देकर सम्मानित किया गया. वहीं राजस्थानी भाषा के वरिष्ठ जानकार पूर्व विधायक सीडी देवल, पदम् श्री सूर्यदेव सिंह, भंवर सिंह सामौर, पूर्व संसद एवं भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष ओंकार सिंह लखावत, अर्जुन दान देथा, राजेंद्र सिंह बारहट, पदम् मेहता सहित भाषा प्रेमियों ने आनंद पुरोहित के इस प्रयासों की सराहना की. उन्होंने ने राजस्थान 'री पाती' को एक समाचार पत्र की बजाय राजस्थान का आईना बताया. उन्होंने कहा कि समाचार पत्रों में राजस्थानी भाषा का एक कॉलम या पृष्ठ निकाले जा रहे हैं, मगर यह दैनिक समाचार पत्र वो भी रंगीन बहुत सुन्दर प्रयास है. सभी राजस्थानियों को इस पर गर्व है. आनंद पुरोहित को जब सम्मानित किया लोगों ने दिल से उनके सम्मान का आदर किया.
जैसलमेर जिला मुख्यालय के मूल निवासी चन्दन सिंह भाटी बाड़मेर जिले में गत पच्चीस सालों से पत्रकारिता क्षेत्र से जुड़े हैं. तीन साल पूर्व उन्होंने राजस्थानी भाषा को संवैधानिक मान्यता दिलाने के उद्देश्य से अखिल भारतीय राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति के माध्यम से बीड़ा उठाया था. उन्होंने युवा वर्ग के साथ मिल कर राजस्थानी भाषा का ना केवल व्यापक प्रचार प्रसार किया अपितु घर घर में राजस्थानी भाषा की अलख जगाई. उनके प्रयासों से राजस्थान भर में सर्वाधिक गतिविधियाँ बाड़मेर जिले में आयोजित की गई. जैसलमेर जिले में भी आपने प्रयास कर समिति का पुनर्गठन कर युवा वर्ग को जोड़ने का प्रयास किया. राजस्थानी भाषा के प्रति उनकी दीवानगी का आलम कुछ ऐसा है कि राजस्थानी भाषा की मान्यता की बात जरूर करते हैं. बाड़मेर जिले भर में राजस्थानी भाषा मान्यता संघर्ष समिति का अपना नेटवर्क है. हज़ारों की तादाद में सक्रिय कार्यकर्ता जुड़े हैं. भाटी के इन प्रयासों के चलते उन्हें राजस्थानी रत्न से सम्मानित किया गया. राजस्थानी भाषा के वयोवृद्ध साहित्यकार जेठमल पुरोहित किंकर को भी राजस्थानी रत्न से सम्मानित किया गया. उनके द्वारा राजस्थानी भाषा में अनेक पुस्तकें लिखी गई हैं. पुस्तक लेखन के माध्यम से जेठ मल पुरोहित समाज की सेवा कर रहे हैं. राजस्थानी साहित्य में उनका योगदान उल्लेखनीय है.






