भोपाल और जबलपुर से प्रकाशित शाम के अखब़ार 'प्रदेश टुडे' का ग्वालियर संस्करण जुलाई के अंतिम हफ्ते से शुरू हो रहा है। इस संस्करण के निकलने की तारीख कई बार आगे बढ़ती रही है। इसके संपादक राकेश पाठक का नाम कई महीने पहले ही तय हो चुका है। राकेश पाठक पहले 'नईदुनिया' के स्थानीय संपादक थे, और पिछले साल 'नईदुनिया' बिकने के बाद वहां से बिदा कर दिए गए थे। ग्वालियर में संस्करण की सारी तैयारी हो चुकी है।
इससे भी ख़ास बात ये है कि 'प्रदेश टुडे' के डायरेक्टर्स इंदौर से संस्करण शुरू करने का कुछ ज्यादा ही दबाव बनाया। इसका नतीजा ये रहा कि इंदौर से 'प्रदेश टुडे' के प्रकाशन का डिक्लेरेशन फाइल किया गया है। क्योंकि, इंदौर से जो अखबार के डायरेक्टर्स हैं, पैसा लगाने के बाद भी उनकी दुकान खतरे में है! जमीन, बिल्डर और दूसरे धंधों से जुड़े इन डायरेक्टर्स का इंदौर के स्थानीय प्रशासन पर कोई असर न होने से अकसर वे प्रशासन के निशाने पर रहते हैं। हाल ही में हुई डायरेक्टर्स की मीटिंग में 'प्रदेश टुडे' के चेयरमेन ह्रदेश दीक्षित को इंदौर संस्करण के लेकर डायरेक्टर्स का काफी दबाव झेलना पड़ा।
बात इस हद तक बढ़ गई थी, कि ह्रदेश दीक्षित को आश्वासन देना पड़ा कि ग्वालियर के बाद इंदौर की तैयारी शुरू की जाएगी। 'प्रदेश टुडे' ने भोपाल में अपनी थोड़ी बहुत जगह जरुर बनाई है, पर इंदौर में शाम का अखबार दमदारी से निकाल पाना मुश्किल है, और इस बात को ह्रदेश भी समझते हैं, पर उनकी मजबूरी है कि वे ये बात डायरेक्टर्स को नहीं समझा सकते! इंदौर में 3 दशक से ज्यादा समय से प्रकाशित हो रहे 'अग्निबाण' के सामने 'प्रदेश टुडे' टिक पाएगा, ये संभव नहीं है! भोपाल और जबलपुर में शाम का कोई दमदार अखबार नहीं था, इसलिए 'प्रदेश टुडे' को जगह मिल गई, पर इंदौर में शाम के अखबारों का बाज़ार जमा हुआ है, जिसे तोड़ पाना 'प्रदेश टुडे' के लिए आसान नहीं लगता! लेकिन, डायरेक्टर्स के सामने ह्रदेश दीक्षित को झुकना पड़ा और डिक्लेरेशन फाइल करना पड़ा!
एक पत्रकार द्वारा भेजे गए पत्र पर आधारित.





