महाराष्ट्र से पब्लिश होने वाला अखबार लोकमत, मध्यप्रदेश में अपनी जड़ें जमाने की तैयारी में है. इसका पहला संस्करण केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के गढ़ छिंदवाड़ा से प्रकाशित होना है. लेकिन लोकमत के लिए मध्य प्रदेश में सिर मुंड़ाते ही ओले पड़ने का मुहावरा सटीक बैठ रहा है.
लोकमत के छिंदवाड़ा संस्करण के उद्घाटन के लिए पहले 2 जुलाई की तारीख तय की गई थी. मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और स्पीकर ईश्वरदास रोहाणी ने उद्घाटन समारोह में पहुंचने के लिए अपनी सहमति भी दे दी थी. चूंकि चुनाव नजदीक हैं और पॉलिटिकल रेवेन्यू की संभावनांए बढ़ी हैं इसलिए लोकमत के उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता चाहते थे कि वो बीजेपी और कांग्रेस दोनों को एक साथ एक ही तराजू में तौल दें.
उद्घाटन समारोह के कर्ताधर्ता मुख्य मंत्री और बीजेपी के बड़े नेताओं के साथ ही कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के पास भी निमंत्रण लेकर पहुंचे. कांग्रेस के नेता लोकमत के कर्ताधर्ताओं की मंशा समझ गए और उन्होंने बीजेपी के नेताओं के साथ मंच शेयर न करने की अपरोक्ष भावना से 2 जुलाई को आने में असमर्थता जाहिर कर दी. लोकमत के कर्ताधर्ताओं ने चुपचाप दिग्विजय सिंह और कमलनाथ से सलाह की और उद्घाटन की तारीख दो जुलाई की जगह बारह जुलाई निर्धारित कर दी.
बड़ी चालाकी से उन्होंने शिवराज सिंह और रोहाणी की दोबारा सहमति भी ले ली. राज्य की अभिसूचना इकाई ने जब शिवराज सिंह को बताया कि लोकमत के उद्घाटन की तारीख कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह और केंद्रीय मंत्री कमलनाथ के कहने पर बदली गई है तो शिवराज सिंह और ईश्वर दास रोहाणी ने समारोह में शामिल होने से इंकार कर दिया और विधान सभा सत्र का हवाला देते हुए लोकमत वालों के पास समारोह में शामिल न हो पाने के लिए अपना खेद पत्र भेज दिया है.
लोकमत के प्रबंधन ने अब यह तय किया है कि उद्घाटन 12 जुलाई की सुबह होगा और शाम को रात्रि भोज. समारोह में कांग्रेसी नेता रहेंगे और रात्रि भोज बीजेपी के नेताओं के साथ किया जाएगा. यह तो सभी को मालूम है कि लोकमत, ‘कांग्रेसी दर्डा परिवार’ का अखबार है और मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है. इसलिए लोकमत प्रबंधन चाहता था कि कांगेस और बीजेपी दोनों को साध कर चला जाए.
शायद लोकमत वाले भूल गए कि एक म्यान में दो तलवारें कभी नहीं रहती. अब उन्हें यह डर भी लग रहा है कि सरकार की उपेक्षा के साथ मध्य प्रदेश में अखबार शुरु करना टेढ़ी खीर हो सकता है और पानी में रह कर मगरमच्छ से बैर रखना भी बुद्धिमानी वाला खेल नहीं है. सो लोकमत प्रबंधन ने उद्घाटन समारोह के बाद रात्रि भोज में मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को बुलाने के लिए ऐड़ी चोटी के जोर लगा दिए हैं.





