Kumar Sauvir : शशांक शेखर सिंह के लिए ही शायद छन्नूलाल जी ने यह लाइनें गायीं हैं:- सोना साथ जाएगा ना चांदी जाएगी। सजधज के जिस दिन मौत की शहजादी आयेगी। कहने वाले लोग तो तब भी शशांक शेखर सिंह पर खूब मर्सिया पढ़ते थे और आज भी पढ़ रहे हैं। कहते हैं कि लाखों करोड़ की लूट और करीब 25 हजार करोड की सम्पत्ति वाले यूपी के आईएएस अफसरों को कुत्ता बना डालने वाले शशांक शेखर सिंह के माथे पर मोहिंदर सिंह की मौत अमिट दर्ज है।
राजू शर्मा को इस्तीफा दिलाने में एक बड़ा अध्याय शशांक-संहिता में लिखा जा चुका है। जरा पूछिये किसी नेता-अफसर से, कि एक पायलट रहा शख्स कैसे प्रदेश का कैबिनेट सक्रेट्री बन गया। कैसे बड़े-आला आईएएस अफसर उसके सामने अपनी पूंछ अपने पेट में घुसेड़ लेते थे। कैसे शशांक सिंह ने सरकारी नौकरी में रहते हुए भी जाट आंदोलन करवा दिया और 17 दिनों तक लखनऊ-दिल्ली की ट्रेनें टप्प कर दीं। वह तो हाईकोर्ट ने जमकर लताड़ा, तब शशांक का तेज ढला।
किसी कांग्रेसी से कि पूछिये कि कभी यूपी यूथ कांग्रेस में रहा रामपाल सिंह आज कैसे अरबों की अकूत सम्पत्ति का मालिक बन गया। कैसे अचानक वह नोएडा में एक बड़ा गांव बेनामी हासिल कर गया और जिसके इशारे पर उसके ऊपर करीब 300 करोड़ रूपयों का खर्च कर एक बड़ा ओवर-ब्रिज बना दिया गया। नतीजा, यहां की जमीन खरबों-अरबों तक उचक गयी। और हां, वह महिला कौन है जिसके पति को शशांक शेखर सिंह ने सचिवालय में कोई बहुत बड़ा ओहदा अता किया।
कुमार सौवीर के फेसबुक वॉल से.





