नई दिल्ली : सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज और प्रेस काउंसिल के अध्यक्ष जस्टिस मार्कंडेय काटजू के विवादास्पद बयानों का सिलसिला जारी है। काटजू ने ताज़ा बयान क्रिकेटरों और फिल्मी सितारों को भारत रत्न दिए जाने की मांग पर दिया है। काटजू का कहना है कि क्रिकेटरों और फिल्मी सितारों को भारत रत्न देना इस पुरस्कार का मजाक उड़ाना होगा क्योंकि इन लोगों का समाज के लिए कोई योगदान नहीं है।
क्रिकेटर सचिन तेंदुलकर और हॉकी के महान खिलाड़ी ध्यानचंद को भारत रत्न देने की मांग पर काटजू ने कहा, "लोग क्रिकेटर और फ़िल्मी सितारों को भारत रत्न देने के बारे में बात कर रहे हैं। यह हमारे गिरे हुए सांस्कृतिक स्तर को दर्शाता है।" काटजू ने इस बारे में कहा, 'हम अपने असली हीरो को नजरअंदाज करते हैं और सतही लोगों के बारे में बातें करते हैं। आज हमारा देश बहुत ही निर्णायक दौर से गुजर रहा है। हमें ऐसे लोगों की जरूरत है जो देश को दिशा देकर इसे आगे ले जा सकें। वे जीवित न भी हों तो भी ऐसे लोगों को भारत रत्न देना चाहिए।'
काटजू ने कहा कि जब उन्होंने मिर्जा गालिब और शरत चंद्र चटोपाध्याय के लिए भारत रत्न की मांग की थी, जिसके लिए उनकी आलोचना हो चुकी है। मैं यह कहना चाहता हूं कि मरणोपरांत पुरस्कार देने में कोई बुराई नहीं है। इससे पहले भारत रत्न कई विभूतियों को मरणोपरांत मिला है। इनमें सरदार पटेल और डॉ. अंबेडकर शामिल हैं। ग़ौरतलब है कि भारत सरकार ने कुछ ही दिन पहले भारत रत्न सम्मान की नियमावली में बदलाव करते हुए सचिन तेंदुलकर और मेजर ध्यानचंद जैसे खिलाड़ियों को भारत का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिए जाने का रास्ता साफ़ कर दिया था। इससे पहले केवल कला, साहित्य, विज्ञान और लोकसेवा के क्षेत्र में ही यह सम्मान दिया जाता था।
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