उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री रमेश पोखरियाल निशंक करप्शन के एक बड़े मामले में फंसते नजर आ रहे हैं. आय से अधिक संपत्ति को लेकर दायर एक जनहित याचिका में नैनीताल हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने रमेश पोखरियाल निशंक से चार हफ्ते के भीतर जवाब मांगा है. याचिकाकर्ता की तरफ से जाने-माने वकील प्रशांत भूषण अदालत में पेश हुए और निशंक पर आरोपों के बारे में बताया.
जनहित याचिका में कहा गया है कि निशंक ने एक सोसाइटी गठित कर बेटी को उसका कोषाध्यक्ष बनाया और अपने ड्राइवर बालकिशन को सचिव. इस सोसाइटी के नाम सरकार से मुफ्त में पचास बीघे जमीन आवंटित कराया. फिर इसमें सौ करोड़ रुपये का निवेश कराया. इस पैसे के जरिए मेडिकल कालेज बनाया जा रहा है. अवैध तरीके से जमीन आवंटन और अघोषित सौ करोड़ रुपये का निवेश सवाल खड़ा करता है कि यह सब नियमों को ताक पर रखकर किया गया है.
प्रशांत भूषण के पक्ष व तर्क को सुनने के बाद निशंक को कोर्ट ने नोटिस जारी कर जवाब मांगा है. ज्ञात हो कि निशंक पर करप्शन के चार्जेज समय समय पर लगते रहे हैं. जब वे सीएम थे तब भी करप्शन को लेकर ढेर सारे मामले सामने आए थे. कोर्ट में करप्शन का प्रकरण जाने के बाद निशंक की मुसीबत बढ़ गई है क्योंकि अगर आरोप साबित हुए तो फिर निशंक का राजनीतिक करियर खत्म हो सकता है.





