यशवंत जी, कृपया 20 दिसंबर को भडास पर प्रकाशित सूचना, “पीएफ में हेराफेरी करने वाले 66 मीडिया संस्थानों के खिलाफ कार्रवाई” का संदर्भ लें. श्रम एवं रोजगार मंत्री मल्लिकार्जुन खड़गे क्या यह बताने का कष्ट करेंगे कि वो 66 मीडिया संस्थान कौन-कौन से हैं, उनमें कितने कथित न्यूज चैनल हैं. क्या उनमें एसवन चैनल का नाम शमिल है. अगर एसवन चैनल का नाम नहीं है तो खड़गे झूठ बोल रहे हैं. वो संसद-देश और पीड़ित मीडिया कर्मियों को गुमराह कर रहे हैं.
मैंने एसवन में कर्मचारी रहते हुए पीएफ और ईएसआई का पैसा हजम करने की शिकायत विभाग से लेकर मंत्रालय तक की, लेकिन आज तक एसवन के खिलाफ कोई कार्यबाही नहीं हुई है. उनसे कहिए कि वो जरा एस वन जैसे चैनल की ओर भी अपनी नजर डालें. एसवन में तो पीएफ के साथ-साथ ईएसआई का पैसा भी हजम कर लिया गया है. पांच महीने हो गए हैं अभी तक सैलरी नहीं दी है. इसरो का पांच करोड़ रुपया नहीं दिया है.
एसवन चैनल नोएडा के सेक्टर 32 की एक ऐसी विवादित बिल्डिंग में चल रहा है, जिसको नोएडा अथारटी ने एनओसी भी नहीं दिया है. भारत सरकार, संचार मंत्रालय और आई एंड बी मिनस्टरों की आंखों पर पर्दा पड़ा हुआ है. जिस बिल्डिंग को लोकल अथारटी से एनओसी नहीं मिली उसमें चैनल चलाने और टेलीपोट लगाने की परमीशन कैसे दे दी गई. कोई है जो इन सवालों पर जांच करेगा. अंबिका सोनी, कपिल सिब्बल या मल्लिकार्जुन खड़गे की आंखों पर बंधी पट्टी कब खुलेगी.
सतेंद्र कुमार
9868678629
[email protected]





