विश्व में कारपेट सिटी नाम से मशहूर यूपी के भदोही जिले में पत्रकारों पर आफत सी आ गयी है। आपातकाल के हालात हैं मीडिया के लिए। शहर कोतवाली भदोही में बीते दो महीनों में आधा दर्जन पत्रकारों को पुलिस ने पीटा। मुकदमा लादा। एक पत्रकार पर गुंडा एक्ट के तहत जिलाबदर की कार्यवाई भी की। यह सब कारनामा कोतवाल संजय नाथ तिवारी ने किया। दो दिन पहले ही कोतवाल ने दो मीडियाकर्मियों का थाने में थोबड़ा सुजाया। इनके ऊपर कई मुकदमे भी लाद दिए।
कोतवाल का शिकार हुए दोनों मीडियाकर्मियों में एक रफ़्तार न्यूज़ चैनल के रिपोर्टर आनंद तिवारी हैं और दुसरे हिंदुस्तान के फोटोग्राफर चंद्रबलक राय हैं। इन पर आरोप है कि इन लोगों ने एक सिपाही से बदसलूकी की। बाजार में जो चर्चाओं का माहौल गर्म है उससे पता चला है कि ये दोनों मीडियाकर्मी भदोही रेलवे स्टेशन टिकट लेने गए थे। खिड़की पर थाने का एक सिपाही सादे ड्रेस में कुछ टिकट दलालों के साथ मिलकर अपनी गुंडई दिखा रहा था।
इसका इन दोनों पत्रकार ने विरोध किया। हो हल्ला मचा और मामला शांत हो गया। लेकिन दूसरे दिन वर्दी में सिपाही की इन दोनों मीडियाकर्मियों से भेंट हो गयी और पुलिसकर्मी वर्दी का रौब झाड़ने लगा। साथ ही सिपाही ने इसकी सूचना कोतवाल को भी दी। सूचना मिलते ही कोतवाल दोनों मीडियाकर्मियों को थाने ले गए जहाँ दो दिनों तक इन मीडियाकर्मियों की पिटाई की गई। 12 जून को थाने से ही जमानत दे दिया गया।
इस घटना के बाद हिन्दुस्तान अखबार ने अपने फोटोग्राफर चंद्रबलक राय को संसथान से बाहर का रास्ता दिखा दिया है ताकि अखबार की बदनामी न हो। छह माह पहले बाइक चोरी में हिंदुस्तान का विज्ञापन प्रभारी पकड़ा गया था और उसके पास से चोरी की बाइक भी बरामद हुई थी। इसके बाद अखबार की काफी छिछालेदर हुई थी। इसके पहले जनसंदेश टाइम्स के पत्रकार सुरेश गांधी को भी गुंडा एक्ट के तहत जिलाबदर किया गया जिस पर न्यायालय ने रोक लगा दिया।
कुछ दिनों पहले दैनिक जागरण के मीडियाकर्मी होरीलाल यादव को सरेराह कोतवाल और उनके हमराहियों ने पीटा था। उनकी गलती सिर्फ ये थी की वो उपजिलाधिकारी के कहने के अनुसार कुर्सी पर बैठ गए और यह बात कोतवाल को नागवार गुजरी जिसके बदले में कोतवाल ने पिटाई की और दो चार मुकदमे भी लाद दिए। यही हाल एक दाढ़ी वाले पत्रकार के भी साथ हुआ जिसके साथ कोतवाल ने गाली गलौज की और चेतावनी दी कि पत्रकरिता का रौब झाड़ोगे तो दो चार मैडल तुमको भी चिपका दिया जाएगा। मौजूदा समय में दो मीडियाकर्मी टारगेट पर चल रहे हैं जिन्हें दबोचने के लिए दबिश की भी बात सामने आई है।
12 जून की बात है जब उपजिलाधिकारी एनजीओ टीम और सिपाहियों को लेकर मोंढ़ में एक इंट भट्ठे से बंधुआ मजदूरों को मुक्त कराने पहुंचे पर स्थानीय पुलिस की हीलाहवाली के चलते दबंग भट्ठा मालिक पूरी टीम पर हावी होने लगा और एनजीओ के लोगों को जमकर पीटा और वहां उपजिलाधिकारी के साथ भी हाथापाई की गयी। साथ में लगी पुलिस से भी मारपीट हुई। गाड़ियों पर पत्थरबाजी की गई।
उपजिलाधिकारी की सुरक्षा में लगे होमगार्ड का कारतूस से भरा बेल्ट लूट लिया गया। एनजीओ के एक सदस्य को गंभीर हालत में वाराणसी रेफर करना पड़ा। अभी तक पुलिस आरोपी को पकड़ नहीं पायी। पत्रकारों पर त्वरित कार्रवाई करने वाली पुलिस जब खुद दबंगों से पिटी तो उनकी लाचारी साफ़ तौर पर देखने को मिली। ऐसे में बड़ा सवाल है कि क्या पुलिस के लिए सबसे लाचार पत्रकार ही हैं, जब चाहा धुन दिया।





