पत्रकार से प्रभावशाली नेता बने केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री राजीव शुक्ला की सबसे बड़ी खासियत है- 'कनेक्टिंग पीपुल'. शुक्ला जरुरतमंद लोगों को आपस में जोड़ते हैं और इस प्रक्रिया में खुद भी लोगों से जुड़ जाते हैं. अब यह अलग मुद्दा है कि उनके जरुरतमंद लोगों का समूह देश के सबसे प्रभावशाली लोगों में से है. आज शुक्ला की राजनीति, व्यवसाय, क्रिकेट और मनोरंजन, इन चारों क्षेत्रों में समान रूप से पकड़ है और सब जानते हैं कि भारत में जनता इन्हीं चार क्षेत्रों की दीवानी है और पैसे की बरसात भी इन्हीं पर होती है.
शुक्ला को जानने वाले कहते हैं कि जब उनके इन क्षेत्रों में सक्रिय किसी दोस्त को दूसरे क्षेत्र से जुड़ा हुआ कोई संकट आता है तो संकटमोचन होते हैं शुक्ला. शुक्ला न केवल दो जरूरतमंदों को मिलवाते हैं, बल्कि व्यक्तिगत रूप से प्रयास करते हैं कि उद्देश्य पूरा हो. आज इन क्षेत्रों में सक्रिय दिग्गजों पर, जब भी कोई मुश्किल आती है, तो वे याद करते हैं शुक्ला को. और यही शुक्ला की सबसे बड़ी उपलब्धि है.
2004 में जब सोनिया गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस की सत्ता में वापसी हुई, उसके बाद सोनिया गांधी ने शाहरुख खान की दो फिल्में `वीर जारा` और `मैं हूं ना` दिल्ली के महादेव ऑडिटोरियम में देखी. इस प्राइवेट स्क्रिनिंग में युवराज राहुल गांधी और प्रियंका भी मौजूद थे. इस स्क्रीनिंग के लिए राजीव शुक्ला ने किंग खान की पूरी मदद की. ये भाई बहन, जब भी किसी क्रिकेट मैच में देखे जाते हैं, शुक्ला उनके इर्द गिर्द जरूर दिखाई देते हैं. एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक शुक्ला के पास हमेशा लेटेस्ट गॉसिप होते हैं. उनके दिलचस्प किस्से लोगों को जोड़े रखते हैं और यही वजह है उनकी लोकप्रियता की.
राजीव शुक्ला की एक और खासियत है कि वे व्यक्तियों के राजनीतिज्ञ और व्यावसायिक कौशल का सही आंकलन करते हैं और जानते हैं कि फलाना व्यक्ति सफलता की कितनी सीढ़ियां चढ़ सकेगा. और फिर उनका इन व्यक्तियों के नजदीक जाने का प्रयास शुरू होता है, चाहे इसके लिए किसी भी तरह की पार्टी में उपस्थिति दर्ज कराना हो या फिर किसी कार्यक्रम की पहली पंक्ति में बैठने की कोशिश करना हो. एक बार एक संवाददाता ने शुक्ला से पूछा भी कि वे राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों और बीसीसीआई के विरोधी गुटों में समान रूप से कैसे लोकप्रिय रहते हैं, उन्होंने कहा कि मैं नेगेटिव काम नहीं करता. मैं लोगों को नुकसान नहीं पहुंचाता और जहां तक संभव होता है सबकी मदद करता हूं, चाहे इसके लिए मुझे कितना भी प्रयास क्यों न करना पड़े. मैं मानता हूं कि जैसा बोओगे, वैसा पाओगे.
…जारी…
(ईटी में छपी स्टोरी का भावार्थ)
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