Satish Tyagi : कल दैनिक भास्कर (रोहतक) में गैर -जिम्मेवार पत्रकारिता का एक शर्मनाक उदाहरण देखने को मिला। अख़बार ने लिखा कि इंडियन नेशनल लोकदल के बहादुरगढ़ से पूर्व विधायक नफे सिंह राठी को हत्या की साजिश में गिरफ्तार किया गया। पत्र लिखता है कि इस गिरफ्तारी की पुष्टि पुलिस कप्तान ने की। सच यह था कि इस नाम का कोई अन्य व्यक्ति था जिसे गिरफ्तार किया गया था। नौसिखिये पत्रकारों को उनका अति उत्साह कई बार उल्टा पड़ जाता है। सोच कर देखिये कि पूर्व विधायक पर क्या गुजरी होगी और एक राजनैतिक दल के रूप में इंडियन नेशनल लोकदल की प्रतिष्ठा को कितना आघात लगा होगा।
Satish Tyagi : दैनिक भास्कर की हेकड़ी देखिये। बिलकुल चोरी और सीनाजोरी की स्थिति है। पूर्व विधायक नफे सिंह राठी की गिरफ़्तारी गलत खबर छापने के बाद यह उम्मीद की जा रही थी कि कल अख़बार अपनी भूल को सुधारेगा लेकिन अख़बार का रवैया यह दिखता है कि -उखाड़ लो जो उखाड़ना है, नहीं मांगते माफ़ी और ऐसे ही लिखेंगे। व्यक्ति तो मानसिक रूप से बीमार मिलते रहते हैं लेकिन किसी संस्थान की नीति ही बीमार और अलोकतांत्रिक हो, यह भास्कर ही दर्शा रहा है। राठी भी दूसरे नेताओं की तरह बात को आगे नहीं बढ़ाना चाह रहे होंगे क्योंकि आगे भी अख़बार की जरूरत पड़ सकती है लेकिन इस ब्लैकमेलिंग को बर्दाश्त करना शुभ नहीं है। मीडिया के आतंक को झेलना और ओछे व सतही किस्म पत्रकारों की चिरौरी करना न तो पत्रकारिता के लिए ठीक है और न राजनीति के लिए। पत्रकार का थानेदार की तरह व्यवहार करना निंदनीय है। कुछ साल मैंने भी बतौर पत्रकार के बतौर गुजारे हैं और एक से एक कमीने और टुच्चे पत्रकार देखें हैं। चौथे खम्भे पर तरह- तरह के जहरीले सांप चिपटे हुए हैं।
वरिष्ठ पत्रकार सतीश त्यागी के फेसबुक वॉल से.





