Dayanand Pandey : बीते पंद्रह जून को अमृतलाल नागर को लखनऊ में याद किया गया। उस दिन ना उन की जन्म-तिथि थी, ना पुण्यतिथि। फिर भी याद किया गया। लखनऊ एक्सप्रेशन संस्था की तरफ़ से उन्हें याद किया गया। हज़रतगंज में मास्टर शेफ़ पंकज भदौरिया की कुकिंग अकादमी में आयोजित इस कार्यक्रम में अमृतलाल नागर की छोटी पुत्र-वधू विभा नागर ने उन के दैनंदिन जीवन के रोचक संस्मरण सुनाए। अपने व्याह से ले कर उन के खाने-पीने-लिखने तक का दिलचस्प व्यौरा पेश किया उन्हों ने।
सब से जीवंत संस्मरण सुनाया कथाकार नवनीत मिश्र ने। कि कैसे उन के कठिन दिनों में नागर जी ने उन्हें संबल दिया। पिता के न रहने पर उन के साथ अपना दुख साझा किया और सीने से लगाते हुए बताया कि मेरे पिता का निधन भी तभी हुआ था जब मैं नौवीं कक्षा में था। नागर जी के साथ के और भी दुख-सुख साझा किए नवनीत जी ने। प्रदीप कपूर ने नागर जी की स्मृतियों को बरास्ता आगरा याद किया। जस्टिस हैदर अब्बास रज़ा ने नागर जी के साथ किए गए नाटकों के मार्फ़त उन्हें याद किया। पूर्व मंत्री स्वरुप कुमारी बख्शी ने भी अपनी यादों में उन्हें झांका। मैं ने भी नागर जी पर एक संस्मरण आलेख पढ़ा इस मौके पर। कार्यक्रम का सुंदर संचालन कनक रेखा चौहान ने किया। पेश हैं इस मौके के कुछ चित्र।
वरिष्ठ पत्रकार दयानंद पांडेय के फेसबुक वॉल से.





