Mayank Saxena : अभी एनडीटीवी के उत्तराखंड ब्यूरो हेड Dinesh Mansera से फोन पर बात हुई…उन्होंने बताया कि सबसे ज़्यादा ज़रूरत श्रमदान की है, जिससे कि टूटे हुए राष्ट्रीय राजमार्ग दुरुस्त किए जा सकें…और राहत सामग्री ऊपर के इलाकों में पहुंचाई जा सके…क्योंकि ज़्यादातर इलाकों के बारे में सही हालात अभी पता ही नहीं हैं…नेश्नल हाईवे अथॉरिटी के पास इतना संख्याबल नहीं है कि रातों रात सड़कें बन जाएं, इसके लिए लोगों को श्रमदान करना होगा…तमाम साथी जो ऋषिकेश के आस पास हैं…वहीं हैं…और बाकी जगहों से वहां जाने का इरादा कर रहे हैं…
उनसे अनुरोध है कि सड़कों को दुरुस्त करने में मदद करें…हम संभवतः शनिवार शाम को ऋषिकेश के लिए निकलेंगे…साथ में कुछ राहत सामग्री भी होगी…इसके बाद हम कुछ लोग जो दिल्ली में रह कर फंड जेनरेशन और राहत सामग्री के अलावा मानव बल को मोबिलाइज़ करने का काम करेंगे…वापस दिल्ली रविवार रात ही लौटेंगे…एक टीम वहां रहेगी…और फिर वापस यहां से और लोग जाकर उनको रिलीव करेंगे…
पत्रकार मयंक सक्सेना के फेसबुक वॉल से.





