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सीवीबी न्‍यूज में दो महीने से नहीं मिली सेलरी

सीवीबी न्यूज यानि सी वोटर ब्राडकास्ट न्यूज की सांसें अभी चल रही हैं, पर इसके कर्मचारियों को आक्‍सीजन रूपी सेलरी नहीं मिल पा रही है. यशवंत देखमुख के इस प्रोजेक्‍ट में अब काम की बजाय तफरी करने वाला माहौल बन गया है. पत्रकारों के सामने ऐसा करने की मजबूरी और जरूरत दोनों है. अब चार दर्जन के आसपास के कर्मचारी ही रह गए हैं. धीरे-धीरे सबने छोड़ दिया, कहीं चले गए या फिर घर बैठ गए. नई खबर है कि पिछले दो महीने से ज्‍यादातर लोगों की सेलरी नहीं आई है. ज्‍यादातर कर्मचारी परेशान हैं कि यहां काम करें या छोड़ दें.

सीवीबी न्यूज यानि सी वोटर ब्राडकास्ट न्यूज की सांसें अभी चल रही हैं, पर इसके कर्मचारियों को आक्‍सीजन रूपी सेलरी नहीं मिल पा रही है. यशवंत देखमुख के इस प्रोजेक्‍ट में अब काम की बजाय तफरी करने वाला माहौल बन गया है. पत्रकारों के सामने ऐसा करने की मजबूरी और जरूरत दोनों है. अब चार दर्जन के आसपास के कर्मचारी ही रह गए हैं. धीरे-धीरे सबने छोड़ दिया, कहीं चले गए या फिर घर बैठ गए. नई खबर है कि पिछले दो महीने से ज्‍यादातर लोगों की सेलरी नहीं आई है. ज्‍यादातर कर्मचारी परेशान हैं कि यहां काम करें या छोड़ दें.

सूत्रों का कहना है कि अब इस चैनल में गिने-चुने कर्मचारी ही रह गए हैं. इसमें कुछ की एक महीने के सेलरी बकाया है तो ज्‍यादातर की दो महीने की. यहां काम कर रहे लोगों को सेलरी न आने से ज्‍यादा परेशानी आशु शर्मा, अदिति प्रसाद और एनबी नायर के व्‍यवहार और रवैये से है. यहां कोई किसी को पूछने वाला नहीं है. यशवंत देखमुख से कर्मचारियों को सेलरी के अलावा और कोई परेशानी नहीं है, पर त्रिमूर्ति के चलते ज्‍यादातर कर्मचारी मनमाने तरीके से काम पर आ रहे हैं. ज्‍यादातर काम इंटर्नों के जरिए चलाया जा रहा है.

यहां कार्यरत एक मीडियाकर्मी ने बताया कि सबसे पहले तो सेलरी नहीं मिलने और किराया ना होने के चलते हम रेगुलर आफिस नहीं जा पाते हैं, पर इससे भी ज्‍यादा परेशानी सीवीबी न्‍यूज में कार्यरत त्रिमूर्तियों के व्‍यवहार से होती है. उसने बताया कि कुछ लोगों को छोड़कर ज्‍यादातर लोग इनके व्‍यवहार से परेशान रहते हैं. जो नए हैं वो टाइम पास करने चैनल में चले आते हैं, जो परिवार पाल रहे हैं वो हाजिरी लगाने के बाद नई नौकरी की तलाश में निकलते हैं. उसने बताया कि प्रदीप सिंह भी दस-पंद्रह दिन में कभी कभार आ जाते हैं. चैनल बस भगवान भरोसे ही चल रहा है. ज्‍यादातर ब्‍यूरो बंद हो चुके हैं.

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