सरकारी संगठन प्रसार भारती ने आरोप लगाया है कि कुछ बड़ी प्रसारण कंपनियों ने इंडियन ब्राडकास्टिंग फेडरेशन ‘आईबीएफ’ में एकाधिकार जमा लिया है. वे दूरदर्शन को मंच की निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखती है. प्रसार भारती का कहना है कि इसके चलते कार्यक्रमों के दर्शकों का आकलन करने की नयी व्यवस्था नहीं हो पा रही है. इसके विपरीत आईबीएफ के अधिकारियों ने इस आरोप को खारिज किया कि टेलीविजन दर्शकों को आंकने की टैम रेटिंग की जगह वैकल्पिक प्रणाली ब्रॉडकास्ट आडिएंस रिसर्च काउंसिल बनाने से जुड़ी निर्णय प्रक्रिया से दूरदर्शन को अलग रखा जा रहा है.
सूत्रों ने बताया कि दूरदर्शन इस बात से नाराज है कि उसे बार्क बनाने की प्रणाली से अलग कर दिया गया है. प्रसार भारती के मुख्य कार्यकारी जवाहर सिरकार ने इस मामले को सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री मनीष तिवारी और सचिव उदय कुमार वर्मा के सामने उठाया है. सिरकार ने तिवारी और वर्मा को लिखे पत्र में कहा ‘कुछ बड़े प्रसारकों द्वारा आईबीएफ पर एकाधिकार और प्रसार भारती व दूरदर्शन को उसकी निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखने की कोशिश के संबंध में मैंने कई चिट्ठियां लिखीं और ई-मेल किए.’ उन्होंने कहा है कि मंत्रालय की ओर से कड़े संदेश बावजूद प्रसार भारती और दूरदर्शन को उस मंच की निर्णय प्रक्रिया से बाहर रखा गया है और नयी व्यवस्था नहीं बन पा रही है.





