Mayank Saxena : जिस जगह 500 लाशें सिर्फ गौरीकुंड में मिली हों…वहां के लिए एक अखबार छाप रहा है कि करिश्मा देखिए…मंदिर बच गया…देखिए दैनिक जागरण शर्मनाक ढंग से क्या छापता है.
"इसे बाबा का प्रताप ही कहेंगे कि सब कुछ तबाह होने के बावजूद ज्योतिर्लिग और उसे आच्चदित किए सदियों पुराना गुंबद सुरक्षित है." ज़रा सोचिए कि धर्मांधता की पराकाष्ठा है कि आप इतने असंवेदनशील हैं…कि एक जगह जहां मंदिर के अंदर बाहर सब जगह लाशें बिछी हों…वहां पर आप मंदिर की इमारत बचे रहने पर चमत्कृत हो रहे हैं.
कल ही मैंने अंध श्रद्धा पर एक पोस्ट लिखी थी…जिस भी मूर्ख ने जागरण की ये ख़बर लिखी है…उससे सिर्फ ये जानना है कि बाबा के प्रताप से बाबा का मंदिर और ज्योतिर्लिंग बच गया…तो बाबा ने निरीह लोगों की जान क्यों नहीं बचा ली…सिर्फ अपना मंदिर बचाया बाबा ने…ये तो बड़ा स्वार्थ हुआ…. थूकिए ऐसे अखबारों पर…और शर्म है ऐसे सम्पादक पर…लानत है.
युवा पत्रकार मयंक सक्सेना के एफबी वॉल से साभार.






