इस वक्त पूरा जागरण ग्रुप परेशान है। जागरण को नभाटा ने डैमेज कर रखा है तो आईनेक्स्ट को अमरउजाला ने। आईनेक्स्ट का डाउन फाल थमने का नाम नहीं ले रहा। पिछले दस दिनों में आईनेक्स्ट लखनऊ से पांच लोगों ने इस्तीफा दे दिया। इन पांच में से तीन लोगों को अमर उजाला ने अपने पाले में कर लिया है। लखनऊ में आईनेक्स्ट को न्यूज एडिटर ढूंढे नहीं मिल रहे और इम्पलाई एक के बाद एक आईनेक्स्ट का साथ छोड़ रहे हैं।
आईनेक्स्ट से नाता तोडऩे वालों में ताजा नाम जुड़ा है रमेश वर्मा और अब्बास रिजवी का। रमेश वर्मा आईनेक्स्ट में सीनियर सब एडिटर थे और डेस्क की पूरी जिम्मेदारी पिछले छह साल से निभा रहे थे। खबर है कि रमेश वर्मा अपनी नयी पारी अमर उजाला के साथ शुरू करने जा रहे हैं। रमेश वर्मा ने शनिवार को संस्थान छोडऩे का नोटिस दे दिया और एक दो दिन के अंदर अमर उजाला ज्वाइन कर लेंगे। दूसरा नाम रिपोर्टर अब्बास रिजवी का है। अब्बास रिजवी कहां जा रहे हैं इसका खुलासा उन्होंने अभी नहीं किया है।
कल्चरल रिपोर्टर जेबा हसन ने भी फाइनली आईनेक्स्ट को बॉय-बॉय बोल दिया है। हालांकि लम्बी छुट्टी पर जाने के बाद अमर उजाला जाने की खबर पहले ही उड़ चुकी थी। लेकिन वह संभवत: सोमवार से अमर उजाला के साथ अपनी नयी पारी की शुरुआत करेंगी। एक के बाद एक कई लोगों के आईनेक्स्ट छोडऩे की वजह आफिस का माहौल बताया जा रहा है। आफिस में मुखबिरों की खूब चल रही है। आफिस के माहौल का हाल यह है कि यहां अब हंसी मजाक भी कोई नहीं करता। जिस आफिस में रिपोर्टर और सब एडिटर को बैठने के लिए कुर्सियों के खाली होने का इंतेजार करना पड़ता था, उसी आफिस में अब एक एक इम्प्लाई के हिस्से में तीन तीन कुर्सियां हैं। यानी आईनेक्स्ट में पिछले दो साल में इम्पलाईज की संख्या 24 से घट कर 10 पर आ गयी है।
इतना ही नहीं आफिस का चपरासी भी अब एडिटोरियल का हिस्सा हो गया है और वह अपनी कुर्सी छोड़ कभी डिजाइनर की तो कभी रिपोर्टर की कुर्सी पर बैठ जाता है। किसी में बोलने की हिम्मत इसलिए नहीं होती कि वह भी मुखबिर खास की श्रेणी में आता है। अब देखना यह है कि आईनेक्स्ट से जाने वाला अगला कौन है? सूत्रों की मानें तो दो और लोगों ने आईनेक्स्ट छोडऩे का मन बना लिया है। यह दोनों ही आफिस के माहौल से परेशान हैं। आईनेक्स्ट के एक इम्प्लाई का कहना है कि मैडम शर्मिष्ठा शर्मा ने कुछ दिन पहले ही सभी से कह दिया था कि जिसे जाना है आईनेक्स्ट छोड़ कर वह जा सकता है, यह उसी का असर है। उधर अमर उजाला में लगातार भर्तियां हो रही हैं। माना जा रहा है कि भर्ती होने के बाद कुछ लोगों को ट्रांसफर पर भेजा जा सकता है।





