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उत्तराखंड सरकार मरने वालों की संख्या कम बताने पर क्यों तुली हुई है?

प्रदेश में आई त्रादसी में अभी भी सरकारी आंकड़े मरने वालों की संख्या को छुपाने की कोशिश में लगे हुए हैं। सरकार द्वारा जो आंकड़े जारी किए जा रहे हैं वे विश्वास से परे हैं। केदार घाटी में रहने वाले और जो बचे तीर्थ यात्री हैं, ने जो हालात बताए हैं, वे बेहद भयावाह हैं।

प्रदेश में आई त्रादसी में अभी भी सरकारी आंकड़े मरने वालों की संख्या को छुपाने की कोशिश में लगे हुए हैं। सरकार द्वारा जो आंकड़े जारी किए जा रहे हैं वे विश्वास से परे हैं। केदार घाटी में रहने वाले और जो बचे तीर्थ यात्री हैं, ने जो हालात बताए हैं, वे बेहद भयावाह हैं।

बताया यह जा रहा है कि केवल केदारनाथ धाम में ही जो कि दूसरे दिन दर्शन के लिए रुके हुए थे, कि संख्या लगभग पांच हजार के आसपास थी। इसके अलावा वहां के स्थानीय लोग व दुकानदारों के साथ ही पंडे समाज के कई लोग भी थे। इतना ही नहीं देर शाम दर्शन कर 14 किलोमीटर पैदल चल कर गौरीकुंड की ओर रवाना होने वाले लोगों के साथ ही खच्चर के साथ चलने वाले लोग भी अभी तक लापता हैं।

यह समझ से परे है कि सरकार इस आपदा में मरने वालों की संख्या को कम बताने पर क्यों तुली हुई है। गौरी कुंड यदि आपदा से पूरी तरह से नष्ट हो गया है तो गौरी कुंड में उस रात्रि विश्राम करने वाले लोगों की ही संख्या पांच हजार के आसपास थी। इस सबसे आप सभी अंदाजा लगा सकते है कि केदार धाम में कितने लोगो दफन हुए होगे साथ ही रामबाणा में रुकने वाले और केदारनाथ की ओर पैदल चलने वालों के साथ ही गौरीकुड में ठहरे लोगों को मिला कर यदि देखे को तो मरने वालों का आंकड़ा हजारों से ऊपर जाता है। अगर सह सही है तो सरकार को मानना चाहिए कि इस आपदा में हजारों लोगों की मौत हो गई है।

अनिल बहुगुणा की रिपोर्ट.

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