मथुरा-वृंदावन : पत्रकार बिरादर इन दिनों संकट में है। इसका एक कारण भ्रष्टाचार है तो दूसरा जनता का उठ रहा विश्वास। इसकी नतीजा है कि जिस देश में मिशनरी पत्रकारों ने आजादी हासिल करने में सफलता प्राप्त की उसी में अब मनमाफिक इज्जत नसीब नहीं हो रही। चंद ईमानदार संग भाग्यशाली पत्रकारों को छोड दें तो अधिकांश उपेक्षा और परेशानी झेल रहे हैं। उनमें वह तबका भी शामिल है, जो मीडिया को ग्लेमर समझकर लाखों रूपये देकर थाने-चौकी जाने का अधिकार हासिल करता है।
ये वह जमात है, जिसे लिखने-पढने का ज्ञान भले नहीं, लेकिन धंधा करने की ललक बहुत है। इन्हीं में शामिल कई पत्रकार साहिब तो थाने में पीआरडी जबानों की हैसियत में चाकरी करते भी नजर आते रहते हैं। चोखा धंधा करने के चक्कर में कई ऐसे भी हैं, जिन्होंने अपने खर्चे भी बहुत बढा लिये हैं। सिपाही, दरोगाओं को सेल्यूट ठोंकने वाले ये जनता को लूटने में पूरी ताकत लगाते हैं। तुर्रा और हुर्रा ऐसा कि थानों-चौकियों में सभ्यता की धज्जियां उडाने में उन्हें शर्म नहीं आती।
खाकी को भी उनसे हर दिन उम्मीद बंधी रहती है। नारद कहते हैं, वत्स राया में तो ऐसे पत्रकार साहिबों को बाकायदा खाकी ने जुआ, सटटे, चोरी, उठाईगीरी करने वालों का काम देकर हिस्सेदारी तय कर दी है। उन्हीं में शामिल एक ऐजेंट कम पत्रकार ने बीते दिनों जनता द्वारा दी गई शिकायत को दरोगा को दे दिकर अपनी विश्वसनीयता सिद्ध कर दी। वह यह भी भूल गया कि चंद दिन पहले ही इसी थाने के दरोगा से एक पत्रकार से थूका हुआ साफ कराया था।
गालियां इतनी दीं, उनकी गूंज कप्तान तक पहुंची थी। जिले की पत्रकार बिरादर तक भौचक्की रह गई थी। शायद यही वजह है कि राया नगर में इन दिनों द्यूत क्रीडा, जुआ, सटटा सरेआम होता है। हाल इतना खराब है कि जिस इलाके में पत्रकारों और पुलिस की बहुत चहलकदमी रहती है, वहां भी कानून की धज्जियां रोजाना उडती हैं। जिले की बातें आगे के लिये छोडते नारद बोले, वत्स, हमें ऐसा एक कस्बा नहीं मिला, जिसमें बिरादर गंदगी के भंवर में नहीं फंसी। महावन में तो हाल यह है कि एक साधु रोजाना लोगों को ठगता है, लेकिन कोई इस ओर कान नहीं धरता। इस साधू की ताकत दबंग बने हुये हैं। उनमें कई नये-नये मुरीद खोजते और ठगवाते हैं।
इस साधु का कार्यक्षेत्र कई राज्यों में फैला है। राया क्षेत्र के कोयल, नगला भीमा, कस्बा, चौमुहां, वृंदावन में साधु की ठगी के अनेक झंडे गढे हैं। तपस्या का भय दिखाकर यह साधु धन-दौलत नहीं देने या असहाय हो जाने पर बंद करने पर नाश करने, नाक रगडवाने, भष्म करने की धोंस देता है। उसकी चक्कर में दस साल से एक पत्रकार भी फंसा हुआ था। जब वह पत्रकार रोजी-रोटी के लिये तरसने लगा तो साधु ने उसकी फजीहत करने में कसर नहीं छोडी। हालांकि दस साल में साधु ने उससे लाखों रूपये ठगे और जब संकट आया तो भगवान की मर्जी कहकर भंवर में छोड दिया। शिष्य का धन हरना और शोक में डुबाना इस साधु का आनंद बना है।
गुरू की आज्ञा मानो कह-कहकर उसे लोगों से करोडों रूपये हडप लिये हैं। वृंदावन के एक एनआरआई से की गई करीब डेढ करोड की ठगी की सो अलगी। हाल ही में एक बल्देव के व्यक्ति से जमीन दिलवाने के नाम पर चालीस लाख कब्जा लिये। इस बडी रकम को दिलवाने में जब पत्रकार ने मशक्कत की तो साधु उसका भी जानी दुश्मन बन गया है। हकीकत ये है, वत्स कि यह साधु इन दिनों एक कामनी के चक्कर में फंसकर योग-तप भ्रष्ट हो चुका है। इधर-उधर से ठग कर माल कामनी के हवाले कर देता है। कामनी भी इस कदर बलिहारी है कि एक चंद दिन भी उससे दूर नहीं रहना चाहती। गंभीर बात ये कि साधु उसी कामनी को बाल साध्वी बताकर अपना उत्तराधिकारी घोषित कर रहा है। कामनी के परिवार का भी कम नहीं और वह भी भक्त जमात को गुलाम से अधिक नहीं समझता।
भक्तों में चिंता बहुत है, लेकिन गुरू-धर्म भाव के चक्कर में वह अधिक कह नहीं पाते और साधु है कि चार पाये की तरह गुर्राकर डराता रहता है। यूं आये दिन साधु के पास आने वाले दिखाई देते हैं, लेकिन असलियत में उनमें से अधिकतर ऐसे हैं जिन्हें धन लेकर फंसा रखा है। वह आते हैं, कुछ लाते हैं और साधु संग कामनी की सेवा कर दफा हो जाते हैं। वत्स कामनी पर फिदा यह साधु हुतात्मा एनआरआई के बेटे और बहन आदि से भी बहुत खफा है। उसका कारण एनआरआई की वृंदावन में मौजूद डेढ करोड की ईमारत कामनी के नाम नहीं होना है। हालांकि साधु ने कामनी के राजस्थान स्थित गांव में करीब डेढ करोड का विशाल भवन बनाया, लेकिन उन दोनों की मन मुराद अभी पूरी नहीं हुई है। एक जमीन, आयोजन के लिये कई-कई लोगों से धन ले लेना और उनको बर्बाद करना साधु और कामनी का भजन है। सच्चाई ये कि उसके आश्रम में आरती, भजन, पूजा, घंटे-घडियालों की आवाजें भी नहीं आती।
मृत्युलोक से औपमन्यव की रिपोर्ट.





