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मीडिया में नंबरों की लडाई बनाम साड़युद्ध : (मृत्युलोक से औपमन्यव) :

वत्स, मीडिया में नंबरों की लडाई ने भी विधि-विधान का जनाजा निकाल रखा है। मारम-मार का दौर ऐसा चल रहा है कि कभी-कभी साडयुद्ध सा होता दिखाई देता है। कोई हुनर के बूते कागज झपट नंबर 1 बनता है तो कोई बढता अखबार। सही बात ये कि उनमें से ज्यादातर पाठक के सिर चढते ही दिखाई देते हैं। पाठक की जेब ढीली करने को सट्टा-लाटरी, रिश्वत, क्रिक्रेट की तरह फिक्सिंग की शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड रहा।

वत्स, मीडिया में नंबरों की लडाई ने भी विधि-विधान का जनाजा निकाल रखा है। मारम-मार का दौर ऐसा चल रहा है कि कभी-कभी साडयुद्ध सा होता दिखाई देता है। कोई हुनर के बूते कागज झपट नंबर 1 बनता है तो कोई बढता अखबार। सही बात ये कि उनमें से ज्यादातर पाठक के सिर चढते ही दिखाई देते हैं। पाठक की जेब ढीली करने को सट्टा-लाटरी, रिश्वत, क्रिक्रेट की तरह फिक्सिंग की शिक्षा देने में कोई कसर नहीं छोड रहा।

बढते का लाइसेंस थामने वाले ने इस दौड को बहुत रोमांचक बना दिया है। उसका असर इतना अधिक पडा है कि नंबर एक के दांत और अब आंत भी बाहर दिखाई देती हैं। इस युद्ध में यूं मंडल का वास्तव में एक नंबर अखबार भी शामिल है, लेकिन उसकी विश्वसनीयता अहमियत खोती कम ही नजर नहीं आती है।

परंतु जून की भीषण गर्मी में तीनों अखबारों के कपडे उतर गये हैं। बढते ने कीमत कम की तो असल दोनों नंबरियों के खजाने में भी उछलकूद हो उठी। दोनों ने बढते से पचास पैसे अधिक में बेचना शुरू कर दिया। इनका असर कभी अखबार की रीढ कहे जाने वाले हॉकर के पेट पर आ पडा। वह तिलमिला उठा। मथुरा शहर में हडताल कर दी। कमीशन बढाओ। पहले किया वायदा निभाओ। बढते ने कीमत दूसरों से कम की, लेकिन कमीशन नहीं घटाया, तो उस पर असर भी अधिक नहीं हुआ। कथित एक नंबर ने हालत अधिक पतली हो गई।

फैसला हुआ कि अब हॉकर महत्वपूर्ण हैं। कुछ को तोडा और कर्मवीर मान भविष्य संवारने का सब्जबाग दि खा दिया। बताया कि लालीपाप की दुकान यहां हैं। इस दुकान को देख कुछ लोग अभी समझ गये है कि लालीपाप मिल जाएगी। शायद इसलिये कि उन्हें अभी यह नहीं मालूम कि देहात में इस अखबार के आका ऐजेंटों को रद्दी बेच, कहीं से भी वसूलकर बिल जमा करने को धोंसाते हैं। अंदर नौकरी करने वाले कर्मचारियों का काटे जा रहे फण्ड तक को देने में ईमानदारी नहीं दिखाते। इस नंबरी में बहुत से तो ऐसे कर्मचारी हैं जिन्हें यह भी नहीं बताया जाता कि उनका कितना धन अब तक जमा हो गया है। बहरहाल अब हडताल बंद हो गई है और कौंन जीता युद्ध इसका आंकलन पाठक बढाने की जुगाड में लगे आका कर रहे हैं।

मृत्युलोक से औपमन्यव की रिपोर्ट.

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