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क्‍या ऐसे ही रहेंगे आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ के हालात?

आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं. संपादक शर्मिष्‍ठा शर्मा के खास बनने के चक्‍कर में संस्‍थान का नुकसान किया जा रहा है. इसी माहौल के चलते पिछले कुछ दिनों में रिपोर्टिंग और डेस्‍क से कई लोगों ने इस्‍तीफा दे दिया है. कई दिन तो डेस्‍क पर एक कर्मचारी भी मौजूद नहीं रहा. पेजीनेटरों के सहारे ही अखबार प्रकाशित हो रहा था. खबर है कि बुधवार को एक वरिष्‍ठ पेजीनेटर से बदतमीजी के बाद बचे खुचे लोगों में नाराजगी है.

आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ के हालात दिन-ब-दिन खराब होते जा रहे हैं. संपादक शर्मिष्‍ठा शर्मा के खास बनने के चक्‍कर में संस्‍थान का नुकसान किया जा रहा है. इसी माहौल के चलते पिछले कुछ दिनों में रिपोर्टिंग और डेस्‍क से कई लोगों ने इस्‍तीफा दे दिया है. कई दिन तो डेस्‍क पर एक कर्मचारी भी मौजूद नहीं रहा. पेजीनेटरों के सहारे ही अखबार प्रकाशित हो रहा था. खबर है कि बुधवार को एक वरिष्‍ठ पेजीनेटर से बदतमीजी के बाद बचे खुचे लोगों में नाराजगी है.

कई लोगों के इस्‍तीफों के बाद डेस्‍‍क पर केवल कुशल मिश्रा ही बचे थे. वे भी दुर्घटना में घायल होकर घर पर आराम कर रहे हैं. जिसके बाद पेज डिजाइनर और पेजीनेटर ही अखबार निकाल रहे थे. फिलहाल आई नेक्‍स्‍ट में गुलशन द्विवेदी और श्‍याम सिंह के जुड़ने के बाद डेस्‍क पर एक पत्रकार की उपस्थिति हो गई है, लेकिन इस बीच शर्मिष्‍ठा के खास माने जाने वाले काजी फराज की बदतमीजी ने स्थिति बिगाड़ दी है.

सूत्रों का कहना है कि काजी फराज दैनिक जागरण के काफी टेबल बुक से जुड़े हुए हैं लेकिन उनका हस्‍तक्षेप लगातार आई नेक्‍स्‍ट में होता है. लगातार संपादकीय तथा गैर संपादकीय कर्मचारियों से उनका बुरा बर्ताव चलता रहता है, जिसके चलते कई इस्‍तीफे हुए हैं. काजी को शर्मिष्‍ठा का खास माना जाता है. वे कई तरह की सूचनाएं शर्मिष्‍ठा शर्मा तक पहुंचाते रहते हैं, जिससे वे उन पर आंख बंद करके भरोसा करती हैं. इसके चलते अन्‍य कर्मचारियों में असंतोष बढ़ता है, जिसकी परिणिति इस्‍तीफों से होता है.

बताया जा रहा है कि बुधवार को एक वरिष्‍ठ पेजीनेटर के साथ काजी फराज ने बदतमीजी कर दी. इतना से मन नहीं भरा तो गाली-ग्‍लौज करते हुए पेजीनेटर को मारने के लिए हाथ भी उठा लिया. इससे बुरी तरह डरे पेजीनेटर ने फोन से कई जगह इस बात की सूचना दी. बताया जा रहा है कि इस घटना के बाद बचे खुचे कर्मचारी भी नाराज हैं. वे काजी फराज के खिलाफ कार्रवाई चाहते हैं. आई नेक्‍स्‍ट से इस्‍तीफा दे चुके एक पत्रकार ने नाम ना छापने की शर्त पर बताया कि इस अखबार की दुर्गति काजी फराज के चलते ही हो रही है. शर्मिष्‍ठा का उन पर आंख मूंदकर विश्‍वास करना संस्‍थान के लिए खतरनाक साबित हो रहा है.

उल्‍लेखनीय है कि संपादकीय प्रभारी राधाकृष्‍ण त्रिपाठी के जाने के बाद से दिलीप मिश्रा, प्रभात दीक्षित, जेबा हसन, अब्‍बास रिजवी, रमेश वर्मा भी इस्‍तीफा देकर दूसरे संस्‍थानों में जा चुके हैं. अब डेस्‍क पर कुशल मिश्रा के अलावा नए ज्‍वाइन करने वाले गुलशन हैं, जबकि रिपोर्टिंग में रितेश कुमार, संजीव पांडेय, यासिर रजा तथा पंकज अवस्‍थी ही बचे हुए हैं. जबकि श्‍याम सिंह की नई ज्‍वाइनिंग हुई है. सब मिलाकर आई नेक्‍स्‍ट, लखनऊ की हालत बुरी हो चुकी है. सर्कुलेशन तो गड़बड़ हो ही रहा है, कर्मचारी भी नहीं टिक रहे हैं और प्रबंधन आंख बंद किए हुआ है.

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